8 अगस्त 2026
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डीपीई ने खेलों को सीपीएसई सीएसआर का साझा विषय बनाया, वित्त वर्ष 2026-28 के लिए अधिसूचना जारी

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डीपीई ने खेलों को सीपीएसई सीएसआर का साझा विषय बनाया, वित्त वर्ष 2026-28 के लिए अधिसूचना जारी

सारांश

पहली बार डीपीई ने खेलों को सीपीएसई सीएसआर के साझा विषय ढाँचे में शामिल किया है। 18 जून 2026 की यह अधिसूचना वित्त वर्ष 2026-28 के लिए लागू है और 'खेलो भारत' मिशन के साथ नीतिगत समन्वय का संकेत देती है।

मुख्य बातें

डीपीई ने 18 जून 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन में पहली बार 'खेल गतिविधियों का विकास' को सीपीएसई सीएसआर का साझा विषय घोषित किया।
यह अधिसूचना वित्त वर्ष 2026-27 और वित्त वर्ष 2027-28 के लिए प्रभावी है।
हस्तक्षेप के प्रमुख क्षेत्रों में खेल अवसंरचना , उपकरण प्रावधान , पेशेवर कोचिंग , खेल प्रोत्साहन और खिलाड़ी पोषण शामिल हैं।
सीपीएसई को 2018 से अपने सीएसआर व्यय का कम से कम 60% डीपीई-अधिसूचित विषयों पर खर्च करने की सलाह है।
यह कदम सरकार की 'खेलो भारत नीति 2025' और 'खेलो इंडिया मिशन' के अनुरूप है।

सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) ने 18 जून 2026 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर पहली बार 'खेल गतिविधियों का विकास' को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) ढाँचे में एक साझा विषय के रूप में अधिसूचित किया है। यह अधिसूचना वित्त वर्ष 2026-27 और वित्त वर्ष 2027-28 के लिए लागू होगी और खेल क्षेत्र में सीएसआर निवेश को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है।

कॉमन थीम फ्रेमवर्क की पृष्ठभूमि

डीपीई ने 2018 में 'कॉमन सीएसआर थीम' की अवधारणा प्रस्तुत की थी, जिसके तहत स्कूली शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया था। सीपीएसई को सलाह दी गई थी कि वे अपने सीएसआर व्यय का कम से कम 60 प्रतिशत इन्हीं विषयों पर केंद्रित करें। बाद में स्वास्थ्य और पोषण जैसे विषयों को भी इस ढाँचे में शामिल किया गया।

गौरतलब है कि कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची सात के तहत खेलों को बढ़ावा देना हमेशा से एक पात्र सीएसआर गतिविधि रही है। बावजूद इसके, डीपीई के साझा विषय ढाँचे में खेलों को कभी स्पष्ट स्थान नहीं मिला, जिससे इस क्षेत्र में सीएसआर निवेश काफी हद तक सीपीएसई की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर रहा और समन्वित नीतिगत प्रोत्साहन का अभाव बना रहा।

अधिसूचना में क्या है

18 जून 2026 के कार्यालय ज्ञापन में हस्तक्षेप के प्रमुख क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इनमें खेल अवसंरचना का विकास, खेल उपकरणों का प्रावधान, पेशेवर कोचिंग तक पहुँच, खेलों का प्रोत्साहन और खिलाड़ियों का पोषण शामिल हैं।

यह ढाँचा सीएसआर संसाधनों को खेल विकास की ओर निर्देशित करने के लिए एक संस्थागत तंत्र प्रदान करता है। चूँकि सीपीएसई आमतौर पर अपने सीएसआर व्यय का एक बड़ा हिस्सा डीपीई-अधिसूचित विषयों के अनुरूप रखते हैं, इसलिए अब खेल क्षेत्र को भी इसी प्रकार का संस्थागत समर्थन मिलने की उम्मीद है।

खेल क्षेत्र पर संभावित असर

इस नीतिगत बदलाव से देशभर में जमीनी स्तर की खेल अवसंरचना, खिलाड़ी सहायता प्रणालियों, कोचिंग और प्रतिभा विकास कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त निवेश प्राप्त होने की संभावना है। सीएसआर योजना में खेलों की दृश्यता और प्राथमिकता में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक खेल मंच पर अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सरकार की 'खेलो भारत नीति 2025' और 'खेलो इंडिया मिशन' के साथ यह अधिसूचना नीतिगत समन्वय का संकेत देती है।

व्यापक नीतिगत संदर्भ

यह अधिसूचना भारत की एक अग्रणी वैश्विक खेल राष्ट्र के रूप में उभरने की आकांक्षाओं के अनुरूप है। शिक्षा और स्वास्थ्य की तर्ज पर खेलों को साझा सीएसआर विषय का दर्जा मिलने से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ अब खेल विकास में अधिक सुव्यवस्थित और लक्षित निवेश कर सकेंगी।

आने वाले दो वित्त वर्षों में इस ढाँचे के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होगा कि खेल क्षेत्र में सीएसआर निवेश किस हद तक जमीनी बदलाव ला पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। अब तक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों में भी सीएसआर व्यय की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल उठते रहे हैं। खेल अवसंरचना में निवेश तब तक टिकाऊ नहीं होगा जब तक परियोजनाओं के परिणामों — जैसे प्रशिक्षित खिलाड़ियों की संख्या या राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व — को मापने का कोई स्वतंत्र तंत्र न हो। 'खेलो इंडिया' और 'खेलो भारत नीति 2025' के साथ नीतिगत समन्वय का दावा तब ही सार्थक होगा जब सीपीएसई की सीएसआर परियोजनाएँ इन मिशनों के डेटा से जुड़ी हों।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीपीई ने खेलों को सीएसआर का साझा विषय कब और क्यों बनाया?
डीपीई ने 18 जून 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से 'खेल गतिविधियों का विकास' को वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए सीपीएसई सीएसआर का साझा विषय घोषित किया। यह इसलिए किया गया क्योंकि इससे पहले खेल क्षेत्र में सीएसआर निवेश समन्वित नीतिगत प्रोत्साहन के अभाव में सीमित और असंगठित था।
इस अधिसूचना के तहत सीएसआर के लिए कौन-से खेल क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं?
अधिसूचना में खेल अवसंरचना का विकास, खेल उपकरणों का प्रावधान, पेशेवर कोचिंग तक पहुँच, खेलों का प्रोत्साहन और खिलाड़ियों का पोषण — ये पाँच प्रमुख हस्तक्षेप क्षेत्र निर्दिष्ट किए गए हैं।
डीपीई का कॉमन सीएसआर थीम फ्रेमवर्क क्या है?
डीपीई ने 2018 में यह ढाँचा शुरू किया था, जिसके तहत सीपीएसई को अपने सीएसआर व्यय का कम से कम 60% डीपीई द्वारा अधिसूचित साझा विषयों पर खर्च करने की सलाह दी जाती है। इससे पहले स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पोषण इस ढाँचे में शामिल थे।
इस नीतिगत बदलाव से खेल क्षेत्र को क्या फायदा होगा?
इससे देशभर में जमीनी स्तर की खेल अवसंरचना, कोचिंग, प्रतिभा विकास और खिलाड़ी सहायता कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त सीएसआर निवेश प्राप्त होने की संभावना है। सीपीएसई की सीएसआर योजनाओं में खेलों को अब स्पष्ट संस्थागत प्राथमिकता मिलेगी।
यह अधिसूचना 'खेलो इंडिया मिशन' से कैसे जुड़ी है?
यह अधिसूचना सरकार की 'खेलो भारत नीति 2025' और 'खेलो इंडिया मिशन' के अनुरूप है, जो भारत को एक अग्रणी वैश्विक खेल राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। सीएसआर संसाधनों को इन मिशनों के लक्ष्यों से जोड़ने का यह एक नीतिगत प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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