डीपीई ने खेलों को सीपीएसई सीएसआर का साझा विषय बनाया, वित्त वर्ष 2026-28 के लिए अधिसूचना जारी
सारांश
मुख्य बातें
सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) ने 18 जून 2026 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर पहली बार 'खेल गतिविधियों का विकास' को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) ढाँचे में एक साझा विषय के रूप में अधिसूचित किया है। यह अधिसूचना वित्त वर्ष 2026-27 और वित्त वर्ष 2027-28 के लिए लागू होगी और खेल क्षेत्र में सीएसआर निवेश को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है।
कॉमन थीम फ्रेमवर्क की पृष्ठभूमि
डीपीई ने 2018 में 'कॉमन सीएसआर थीम' की अवधारणा प्रस्तुत की थी, जिसके तहत स्कूली शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया था। सीपीएसई को सलाह दी गई थी कि वे अपने सीएसआर व्यय का कम से कम 60 प्रतिशत इन्हीं विषयों पर केंद्रित करें। बाद में स्वास्थ्य और पोषण जैसे विषयों को भी इस ढाँचे में शामिल किया गया।
गौरतलब है कि कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची सात के तहत खेलों को बढ़ावा देना हमेशा से एक पात्र सीएसआर गतिविधि रही है। बावजूद इसके, डीपीई के साझा विषय ढाँचे में खेलों को कभी स्पष्ट स्थान नहीं मिला, जिससे इस क्षेत्र में सीएसआर निवेश काफी हद तक सीपीएसई की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर रहा और समन्वित नीतिगत प्रोत्साहन का अभाव बना रहा।
अधिसूचना में क्या है
18 जून 2026 के कार्यालय ज्ञापन में हस्तक्षेप के प्रमुख क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इनमें खेल अवसंरचना का विकास, खेल उपकरणों का प्रावधान, पेशेवर कोचिंग तक पहुँच, खेलों का प्रोत्साहन और खिलाड़ियों का पोषण शामिल हैं।
यह ढाँचा सीएसआर संसाधनों को खेल विकास की ओर निर्देशित करने के लिए एक संस्थागत तंत्र प्रदान करता है। चूँकि सीपीएसई आमतौर पर अपने सीएसआर व्यय का एक बड़ा हिस्सा डीपीई-अधिसूचित विषयों के अनुरूप रखते हैं, इसलिए अब खेल क्षेत्र को भी इसी प्रकार का संस्थागत समर्थन मिलने की उम्मीद है।
खेल क्षेत्र पर संभावित असर
इस नीतिगत बदलाव से देशभर में जमीनी स्तर की खेल अवसंरचना, खिलाड़ी सहायता प्रणालियों, कोचिंग और प्रतिभा विकास कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त निवेश प्राप्त होने की संभावना है। सीएसआर योजना में खेलों की दृश्यता और प्राथमिकता में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक खेल मंच पर अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सरकार की 'खेलो भारत नीति 2025' और 'खेलो इंडिया मिशन' के साथ यह अधिसूचना नीतिगत समन्वय का संकेत देती है।
व्यापक नीतिगत संदर्भ
यह अधिसूचना भारत की एक अग्रणी वैश्विक खेल राष्ट्र के रूप में उभरने की आकांक्षाओं के अनुरूप है। शिक्षा और स्वास्थ्य की तर्ज पर खेलों को साझा सीएसआर विषय का दर्जा मिलने से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ अब खेल विकास में अधिक सुव्यवस्थित और लक्षित निवेश कर सकेंगी।
आने वाले दो वित्त वर्षों में इस ढाँचे के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होगा कि खेल क्षेत्र में सीएसआर निवेश किस हद तक जमीनी बदलाव ला पाता है।