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सीएसडी डिपो आधुनिकीकरण: रांची बैठक में संजय सेठ ने इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी और स्वदेशी उत्पादों पर दिया जोर

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सीएसडी डिपो आधुनिकीकरण: रांची बैठक में संजय सेठ ने इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी और स्वदेशी उत्पादों पर दिया जोर

सारांश

सीएसडी की 80वीं बोर्ड बैठक महज़ समीक्षा नहीं थी — यह सैनिकों की कैंटीन व्यवस्था को हाईटेक बनाने का रोडमैप था। रामगढ़ पायलट डिपो से शुरू होकर देशभर में फैलने वाला यह आधुनिकीकरण, इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी और स्वदेशी उत्पादों के समावेश के साथ, सीएसडी को 21वीं सदी की ज़रूरतों के अनुरूप ढालने की कोशिश है।

मुख्य बातें

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 14 जुलाई 2025 को रांची में सीएसडी की 80वीं नियंत्रण बोर्ड बैठक की अध्यक्षता की।
देशभर के सीएसडी डिपो को आधुनिक वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में बदलने की योजना पर विस्तृत चर्चा हुई।
रामगढ़ सहित पाँच पायलट डिपो को प्राथमिकता से आधुनिक बनाया जा रहा है; रामगढ़ मॉडल राष्ट्रीय आधार बनेगा।
सीएसडी के माध्यम से खरीदे जाने वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर केंद्र और राज्य सरकारों की सब्सिडी विस्तार पर विचार हुआ।
खादी, जनजातीय उत्पाद, किसान संगठन और सहकारी संस्थाओं के उत्पाद चरणबद्ध तरीके से सीएसडी पोर्टफोलियो में शामिल किए जा रहे हैं।
दिव्यांग सैनिकों और पूर्व सैनिकों के लिए सहायक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष चर्चा हुई।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 14 जुलाई 2025 को रांची में आयोजित कैंटीन सर्विसेज विभाग (सीएसडी) की 80वीं नियंत्रण बोर्ड बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें देशभर के सीएसडी डिपो के आधुनिकीकरण, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी विस्तार और स्वदेशी एवं सहकारी उत्पादों को आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस बैठक का केंद्रीय उद्देश्य सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को अधिक सुलभ, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित सेवाएं उपलब्ध कराना था।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में रक्षा मंत्रालय, तीनों सेनाओं और सीएसडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में सीएसडी के लिए बजटीय सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव, देशभर के डिपो को आधुनिक भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रों में बदलने की योजना, और दिव्यांग सैनिकों तथा पूर्व सैनिकों के लिए सहायक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल रहे।

अधिकारियों के अनुसार, बढ़ती माँग और बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए डिपो को तकनीक-सक्षम केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे वितरण व्यवस्था अधिक तेज और प्रभावी बनेगी।

रामगढ़ पायलट डिपो का निरीक्षण

रांची दौरे के दौरान संजय सेठ ने रामगढ़ स्थित सीएसडी डिपो का स्थलीय निरीक्षण किया। यह देश के उन पाँच पायलट डिपो में से एक है, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर आधुनिक बनाने के लिए चुना गया है। उन्होंने वहाँ उपलब्ध बुनियादी ढाँचे और जारी उन्नयन कार्यों का जायजा लिया।

अधिकारियों के अनुसार, रामगढ़ मॉडल भविष्य में देशभर के अन्य सीएसडी डिपो के आधुनिकीकरण का आधार बनेगा। इससे न केवल आपूर्ति प्रणाली सुदृढ़ होगी, बल्कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों को वस्तुओं की उपलब्धता भी अधिक सुगम होगी।

इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी और स्वदेशी उत्पाद

बैठक में सीएसडी के माध्यम से खरीदे जाने वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर केंद्र और राज्य सरकारों की सब्सिडी के विस्तार पर विशेष चर्चा हुई। इस कदम से सैनिकों और पूर्व सैनिकों को पर्यावरण-अनुकूल वाहनों की खरीद में अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिल सकता है।

इसके साथ ही, खादी एवं ग्रामोद्योग, जनजातीय उत्पादों, किसान संगठनों और विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा निर्मित वस्तुओं को चरणबद्ध तरीके से सीएसडी के उत्पाद पोर्टफोलियो में शामिल किया जा रहा है। संजय सेठ ने कहा कि यह पहल आत्मनिर्भर भारत, सहकार से समृद्धि और वोकल फॉर लोकल जैसे राष्ट्रीय अभियानों को मजबूती देगी और देश के कारीगरों, किसानों व जनजातीय समुदायों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराएगी।

दिव्यांग सैनिकों और पूर्व सैनिकों के लिए विशेष प्रावधान

बैठक में दिव्यांग सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए सहायक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों ने इस वर्ग की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का दायरा बढ़ाने पर सहमति जताई।

आगे की राह

रक्षा राज्य मंत्री ने अधिकारियों से निरंतर नवाचार, बेहतर प्रबंधन और समयबद्ध कार्यान्वयन पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार रक्षा बलों के वर्तमान और पूर्व कर्मियों के कल्याण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि रामगढ़ पायलट डिपो की सफलता पर ही देशभर में सीएसडी आधुनिकीकरण की गति और दिशा निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्यापन-योग्य ढाँचा है या नहीं। इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी और स्वदेशी उत्पादों का समावेश सैनिकों के लिए व्यावहारिक लाभ दे सकता है, लेकिन क्रियान्वयन की समयसीमा और बजटीय आवंटन का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है — जो इन वादों की विश्वसनीयता की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएसडी (कैंटीन सर्विसेज विभाग) क्या है और यह किसके लिए काम करता है?
सीएसडी भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक विभाग है जो सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को रियायती दरों पर उपभोक्ता वस्तुएं और वाहन उपलब्ध कराता है। इसके डिपो देशभर में फैले हैं और लाखों रक्षाकर्मी परिवारों को सेवा प्रदान करते हैं।
80वीं सीएसडी बोर्ड बैठक में कौन-से प्रमुख निर्णय लिए गए?
14 जुलाई 2025 को रांची में हुई इस बैठक में सीएसडी डिपो के आधुनिकीकरण, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी विस्तार, स्वदेशी और सहकारी उत्पादों को आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने तथा दिव्यांग सैनिकों के लिए सहायक उपकरणों की उपलब्धता पर विस्तृत चर्चा हुई। बजटीय सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव भी प्रमुख एजेंडे में रहा।
रामगढ़ सीएसडी डिपो को पायलट प्रोजेक्ट के लिए क्यों चुना गया?
रामगढ़ डिपो उन पाँच डिपो में से एक है जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर आधुनिक वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए चुना गया है। अधिकारियों के अनुसार, यहाँ विकसित मॉडल भविष्य में देशभर के अन्य सीएसडी डिपो के आधुनिकीकरण का आधार बनेगा।
सैनिकों को इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी कैसे मिलेगी?
बैठक में सीएसडी के माध्यम से खरीदे जाने वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर केंद्र और राज्य सरकारों की मौजूदा सब्सिडी का विस्तार करने पर विचार हुआ। इससे सैनिकों और पूर्व सैनिकों को पर्यावरण-अनुकूल वाहन खरीदने में अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिल सकता है, हालाँकि विस्तृत दिशानिर्देश अभी जारी होने हैं।
स्वदेशी और सहकारी उत्पादों को सीएसडी में शामिल करने से किसे फायदा होगा?
खादी एवं ग्रामोद्योग, जनजातीय उत्पादों, किसान संगठनों और सहकारी संस्थाओं के उत्पादों को सीएसडी पोर्टफोलियो में चरणबद्ध तरीके से शामिल करने से देश के कारीगरों, किसानों और जनजातीय समुदायों को बड़ा बाज़ार उपलब्ध होगा। साथ ही, सैनिकों और पूर्व सैनिकों को उत्पादों की अधिक विविधता मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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