सप्त शक्ति कमांड ने ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया, DOT डिवीजन में सैन्य क्षमताओं का निरीक्षण
सारांश
मुख्य बातें
सप्त शक्ति कमांड के सेना कमांडर ने 30 मई 2026 को DOT डिवीजन का दौरा कर परिचालन तैयारियों और सैन्य क्षमताओं का विस्तृत मूल्यांकन किया। इस दौरे की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि एक अत्याधुनिक ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन रही, जो आधुनिक युद्धक्षेत्र में बढ़ते मानवरहित हवाई खतरों से निपटने के लिए सैनिकों को विशेष दक्षता प्रदान करेगा।
दौरे का मुख्य घटनाक्रम
सेना कमांडर ने DOT डिवीजन में सैनिकों के प्रशिक्षण, आधुनिक युद्ध संबंधी तैयारियों और विभिन्न सैन्य गतिविधियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों और जवानों के साथ सीधी बातचीत कर उनकी कार्यप्रणाली, सामने आने वाली चुनौतियों और हासिल उपलब्धियों की जानकारी ली।
इस अवसर पर उन सैनिकों से भी मुलाकात की गई जिन्होंने स्वदेशी तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया। इन तकनीकी समाधानों का विकास सेना की विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है, जिनका उद्देश्य युद्धक क्षमता और अभियानों की प्रभावशीलता को बढ़ाना है।
ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र की विशेषताएँ
नवस्थापित ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र सैनिकों को ड्रोन की पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने की आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करेगा। यह केंद्र ऐसे समय में खोला गया है जब वैश्विक संघर्षों में मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है और ड्रोन खतरे एक नई सुरक्षा चुनौती के रूप में उभरे हैं।
गौरतलब है कि यह पहल भारतीय सेना की आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों के अनुरूप है, जिसमें स्वदेशी तकनीक और प्रशिक्षण ढाँचे को प्राथमिकता दी जा रही है।
सेना कमांडर की प्रतिक्रिया
सेना कमांडर ने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में नई तकनीकों और आधुनिक प्रणालियों का समावेश अनिवार्य हो गया है। उन्होंने सैनिकों द्वारा प्रदर्शित समर्पण, अनुशासन और नवाचार की भावना की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सेना लगातार आत्मनिर्भरता और तकनीकी उन्नयन की दिशा में आगे बढ़ रही है।
दौरे के समापन पर सेना कमांडर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और जवानों को सम्मानित किया और भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
आम जनता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर
यह ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र भारतीय सेना की काउंटर-UAV क्षमता को एक संस्थागत रूप देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे प्रशिक्षण ढाँचे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को अधिक चुस्त बनाते हैं और जवानों को वास्तविक खतरों के लिए तैयार करते हैं। यह पहल भारतीय सेना के आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है जो आने वाले वर्षों में और व्यापक रूप लेने की उम्मीद है।