16 जुलाई 2026
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सप्त शक्ति कमांड ने ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया, DOT डिवीजन में सैन्य क्षमताओं का निरीक्षण

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सप्त शक्ति कमांड ने ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया, DOT डिवीजन में सैन्य क्षमताओं का निरीक्षण

सारांश

सप्त शक्ति कमांड के सेना कमांडर ने DOT डिवीजन में ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया — यह भारतीय सेना की काउंटर-UAV क्षमता को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम है, जो स्वदेशी नवाचार और आत्मनिर्भरता की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्य बातें

सप्त शक्ति कमांड के सेना कमांडर ने 30 मई 2026 को DOT डिवीजन का परिचालन निरीक्षण किया।
एक अत्याधुनिक ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया गया, जो ड्रोन पहचान, निगरानी और निष्क्रियीकरण का प्रशिक्षण देगा।
सैनिकों ने स्वदेशी तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया, जो सेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए विकसित किए गए हैं।
सेना कमांडर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और जवानों को सम्मानित किया।
यह पहल भारतीय सेना के आत्मनिर्भरता और तकनीकी उन्नयन अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।

सप्त शक्ति कमांड के सेना कमांडर ने 30 मई 2026 को DOT डिवीजन का दौरा कर परिचालन तैयारियों और सैन्य क्षमताओं का विस्तृत मूल्यांकन किया। इस दौरे की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि एक अत्याधुनिक ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन रही, जो आधुनिक युद्धक्षेत्र में बढ़ते मानवरहित हवाई खतरों से निपटने के लिए सैनिकों को विशेष दक्षता प्रदान करेगा।

दौरे का मुख्य घटनाक्रम

सेना कमांडर ने DOT डिवीजन में सैनिकों के प्रशिक्षण, आधुनिक युद्ध संबंधी तैयारियों और विभिन्न सैन्य गतिविधियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों और जवानों के साथ सीधी बातचीत कर उनकी कार्यप्रणाली, सामने आने वाली चुनौतियों और हासिल उपलब्धियों की जानकारी ली।

इस अवसर पर उन सैनिकों से भी मुलाकात की गई जिन्होंने स्वदेशी तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया। इन तकनीकी समाधानों का विकास सेना की विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है, जिनका उद्देश्य युद्धक क्षमता और अभियानों की प्रभावशीलता को बढ़ाना है।

ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र की विशेषताएँ

नवस्थापित ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र सैनिकों को ड्रोन की पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने की आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करेगा। यह केंद्र ऐसे समय में खोला गया है जब वैश्विक संघर्षों में मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है और ड्रोन खतरे एक नई सुरक्षा चुनौती के रूप में उभरे हैं।

गौरतलब है कि यह पहल भारतीय सेना की आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदमों के अनुरूप है, जिसमें स्वदेशी तकनीक और प्रशिक्षण ढाँचे को प्राथमिकता दी जा रही है।

सेना कमांडर की प्रतिक्रिया

सेना कमांडर ने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में नई तकनीकों और आधुनिक प्रणालियों का समावेश अनिवार्य हो गया है। उन्होंने सैनिकों द्वारा प्रदर्शित समर्पण, अनुशासन और नवाचार की भावना की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सेना लगातार आत्मनिर्भरता और तकनीकी उन्नयन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

दौरे के समापन पर सेना कमांडर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और जवानों को सम्मानित किया और भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

आम जनता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर

यह ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र भारतीय सेना की काउंटर-UAV क्षमता को एक संस्थागत रूप देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे प्रशिक्षण ढाँचे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को अधिक चुस्त बनाते हैं और जवानों को वास्तविक खतरों के लिए तैयार करते हैं। यह पहल भारतीय सेना के आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है जो आने वाले वर्षों में और व्यापक रूप लेने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की गहराई में है। वैश्विक संघर्षों — विशेषकर यूक्रेन और मध्य पूर्व — ने साबित किया है कि काउंटर-UAV क्षमता केवल एक प्रशिक्षण केंद्र से नहीं, बल्कि एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, AI-आधारित पहचान प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल से बनती है। स्वदेशी नवाचारों का प्रदर्शन उत्साहजनक है, परंतु इन तकनीकों के व्यापक परिचालन तैनाती तक पहुँचने की समयसीमा और मापनीयता पर स्पष्टता अभी बाकी है। सेना का यह कदम आत्मनिर्भरता की कथा को मज़बूत करता है — लेकिन केवल तब जब ये प्रयास संस्थागत ढाँचे में तब्दील हों, न कि प्रदर्शनी तक सीमित रहें।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सप्त शक्ति कमांड का ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण केंद्र क्या है?
यह भारतीय सेना की सप्त शक्ति कमांड द्वारा DOT डिवीजन में स्थापित एक विशेष प्रशिक्षण सुविधा है, जो सैनिकों को ड्रोन की पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने की आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाएगी। इसका उद्घाटन 30 मई 2026 को सेना कमांडर द्वारा किया गया।
इस ड्रोन-रोधी केंद्र की ज़रूरत क्यों पड़ी?
आधुनिक युद्धक्षेत्र में मानवरहित हवाई वाहनों (ड्रोन) का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है, जिससे ये एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गए हैं। इस केंद्र का उद्देश्य सैनिकों को इन खतरों से निपटने के लिए विशेष और व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है।
DOT डिवीजन में किन स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया?
सैनिकों ने देश में विकसित कई आधुनिक उपकरणों और तकनीकी समाधानों का प्रदर्शन किया, जिन्हें सेना की विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनका उद्देश्य युद्धक क्षमता और अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाना है।
सप्त शक्ति कमांड क्या है और यह कहाँ स्थित है?
सप्त शक्ति कमांड भारतीय सेना की एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमांड है जिसका मुख्यालय जयपुर, राजस्थान में है। यह पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस दौरे में सेना कमांडर ने और क्या किया?
सेना कमांडर ने अधिकारियों और जवानों से बातचीत कर उनकी कार्यप्रणाली और चुनौतियों की जानकारी ली, स्वदेशी नवाचारों का अवलोकन किया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सैनिकों को सम्मानित किया।
राष्ट्र प्रेस
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