21 अगस्त 2026
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हैदराबाद कार हादसा: जनसेना सांसद के बेटे की गिरफ्तारी न होने पर साइबराबाद पुलिस ने दी सफाई

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हैदराबाद कार हादसा: जनसेना सांसद के बेटे की गिरफ्तारी न होने पर साइबराबाद पुलिस ने दी सफाई

सारांश

हैदराबाद के माधापुर में 16 अगस्त को सेल्स एग्जीक्यूटिव भारती मुखी की मौत के बाद जनसेना सांसद के बेटे लिंगमानेनी संजुश की गिरफ्तारी न होने पर उठे सवालों के जवाब में साइबराबाद पुलिस ने बीएनएस धारा 106(1) और सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार दिशा-निर्देशों का हवाला दिया।

मुख्य बातें

16 अगस्त 2026 को हैदराबाद के माधापुर में भारती मुखी (26 वर्ष) की लग्जरी कार की चपेट में आने से मृत्यु हो गई।
आरोपी लिंगमानेनी संजुश (21 वर्ष) , जनसेना सांसद लिंगमानेनी रमेश के बेटे, के खिलाफ बीएनएस धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज।
साइबराबाद पुलिस ने कहा — गिरफ्तारी न करने का निर्णय बीएनएसएस धारा 35 और सर्वोच्च न्यायालय के अर्नेश कुमार बनाम बिहार दिशा-निर्देशों के अनुरूप।
शराब और नशीले पदार्थों के प्रारंभिक परीक्षण की रिपोर्ट नकारात्मक ; रक्त नमूने एफएसएल को भेजे गए।
हादसे में शामिल कार जब्त; एमवीआई रिपोर्ट अभी आनी बाकी।
पुलिस ने कहा — बाहरी दबाव के आरोप "गलत और निराधार" हैं; जांच जारी है।

साइबराबाद पुलिस ने 21 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि जनसेना सांसद लिंगमानेनी रमेश के बेटे लिंगमानेनी संजुश (21 वर्ष) को हैदराबाद के माधापुर कार हादसे में गिरफ्तार न करने का निर्णय किसी बाहरी दबाव या राजनीतिक प्रभाव के कारण नहीं, बल्कि कानूनी प्रावधानों और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया था। इस हादसे में 26 वर्षीय भारती मुखी की जान गई थी, जो 16 अगस्त 2026 को सड़क पार करते समय एक लग्जरी कार की चपेट में आ गई थीं।

हादसे का घटनाक्रम

भारती मुखी, जो हैदराबाद के माधापुर स्थित आईटी कॉरिडोर में इनऑर्बिट मॉल के लाइफस्टाइल स्टोर में सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत थीं, 16 अगस्त 2026 को सड़क पार करने के दौरान एक तेज रफ्तार लग्जरी कार की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। आरोप है कि कार लिंगमानेनी संजुश चला रहे थे। माधापुर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस का पक्ष: कानूनी आधार

पुलिस उपायुक्त ऋतिराज ने बताया कि मामला दर्ज होते ही चालक को हिरासत में लेकर शराब और नशीले पदार्थों की जांच के लिए प्रारंभिक परीक्षण किए गए, जिनकी रिपोर्ट नकारात्मक आई। इसके बाद रक्त के नमूने फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) को भेजे गए और हादसे में शामिल कार को जब्त कर मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) की जांच के लिए भेजा गया।

डीसीपी ऋतिराज ने स्पष्ट किया, "बीएनएस की धारा 106(1) में अधिकतम पाँच साल की सजा का प्रावधान है। चूँकि यह अपराध सात साल से कम सजा की श्रेणी में आता है, इसलिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35 और सर्वोच्च न्यायालय के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार गिरफ्तारी की आवश्यकता पर विचार करना था।"

गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई

डीसीपी के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों के निष्पक्ष मूल्यांकन के बाद ऐसी कोई परिस्थिति नहीं मिली जिससे आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी अनिवार्य हो। इसके बजाय आरोपी को जांच में सहयोग करने के लिए बीएनएसएस की धारा 35 के तहत नोटिस जारी किया गया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि बाहरी दबाव या प्रभाव के आरोप "गलत और निराधार" हैं।

आगे की जांच

एमवीआई की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, जिसे जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। पुलिस ने कहा कि यदि आगे की जांच में गिरफ्तारी की आवश्यकता महसूस होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में वीआईपी आरोपियों के प्रति पुलिस के रवैये पर बहस तेज है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो प्रक्रियागत शुद्धता और जनधारणा के बीच की खाई और गहरी हो जाती है। यह पहला मामला नहीं है जब वीआईपी परिजनों से जुड़े हादसों में 'कानूनी विवेक' पर सवाल उठे हों। एमवीआई और एफएसएल रिपोर्टें आने के बाद पुलिस की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि यह सफाई पर्याप्त थी या नहीं।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद कार हादसे में क्या हुआ था?
16 अगस्त 2026 को हैदराबाद के माधापुर में इनऑर्बिट मॉल के पास सड़क पार करते समय 26 वर्षीय भारती मुखी को एक तेज रफ्तार लग्जरी कार ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। आरोप है कि कार जनसेना सांसद लिंगमानेनी रमेश के बेटे लिंगमानेनी संजुश चला रहे थे।
जनसेना सांसद के बेटे को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
साइबराबाद पुलिस के अनुसार, बीएनएस धारा 106(1) में अधिकतम पाँच साल की सजा का प्रावधान है, जो सात साल से कम की श्रेणी में आता है। इसलिए बीएनएसएस धारा 35 और सर्वोच्च न्यायालय के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य दिशा-निर्देशों के तहत तत्काल गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं थी। पुलिस ने आरोपी को जांच में सहयोग के लिए नोटिस जारी किया है।
क्या आरोपी के खिलाफ भविष्य में गिरफ्तारी हो सकती है?
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एमवीआई और एफएसएल रिपोर्टें आने के बाद यदि गिरफ्तारी की आवश्यकता महसूस होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच अभी जारी है।
अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य दिशा-निर्देश क्या हैं?
यह सर्वोच्च न्यायालय का एक महत्वपूर्ण निर्णय है जिसमें कहा गया है कि सात साल से कम सजा वाले मामलों में पुलिस को गिरफ्तारी से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि यह वास्तव में आवश्यक है। इसका उद्देश्य अनावश्यक गिरफ्तारियों पर रोक लगाना है।
राष्ट्र प्रेस
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