कलकत्ता हाई कोर्ट का अहम फैसला: अवैध पार्किंग वाला वाहन दुर्घटना दायित्व से नहीं बचेगा
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई घातक सड़क दुर्घटना में मृत गृहिणी के परिवार का मुआवजा बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्थापित किया है — दुर्घटना के समय वाहन का खड़ा होना, मालिक या बीमाकर्ता को उत्तरदायित्व से स्वतः मुक्त नहीं करता, यदि वह वाहन अवैध रूप से पार्क किया गया हो और दुर्घटना का कारण बना हो।
मुख्य घटनाक्रम
16 अप्रैल 2022 को पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर स्थित एनएच-6 पर हरिणा बस स्टैंड के निकट एक भीषण दुर्घटना हुई। शमित सामंता, उनकी पत्नी बरनाली सामंता नंदी और बड़ी बेटी सिंजिनी की इस हादसे में मृत्यु हो गई, जबकि छोटी बेटी सान्वी गंभीर रूप से घायल हो गई। परिवार कोलकाता से मिदनापुर जा रहा था।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, एक तेज रफ्तार लॉरी ने सड़क के बाईं ओर से उनकी कार को ओवरटेक किया, जिससे धूल का गुबार उठा और दृश्यता अचानक शून्य हो गई। इसी दौरान उनकी कार बिना किसी चेतावनी संकेत के राजमार्ग के बीचोंबीच खड़े एक मिनी-ट्रक से टकरा गई।
बीमा कंपनी का तर्क और अदालत की अस्वीकृति
बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि दुर्घटना के समय मिनी-ट्रक खड़ा था, अतः उसके चालक को लापरवाही का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
न्यायमूर्ति बिश्वरूप चौधरी की एकल-न्यायाधीश पीठ ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई वाहन गलत स्थान पर खड़ा हो और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए खतरा उत्पन्न करे, तो उस पर दायित्व अवश्य बनता है।
न्यायालय की टिप्पणी
न्यायमूर्ति चौधरी ने अपने निर्णय में कहा कि केवल यह कहना कि वाहन खड़ा था, मालिक को दायित्व से मुक्त नहीं करता — विशेषकर तब जब वह वाहन गलत स्थान पर खड़ा हो और दुर्घटना का प्रत्यक्ष कारण बना हो।
न्यायाधीश ने यह भी रेखांकित किया कि न्यायाधिकरण ने साक्ष्य और पुलिस आरोप-पत्र के आधार पर निष्कर्ष निकाला था कि दुर्घटना मिनी-ट्रक के राजमार्ग पर अवैध पार्किंग के कारण हुई। अदालत ने कहा कि ट्रायल जज के इस निष्कर्ष में कोई त्रुटि नहीं है।
आम जनता और सड़क सुरक्षा पर असर
यह निर्णय उन लाखों सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए राहत की बात है जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध रूप से खड़े वाहनों के कारण दुर्घटना के शिकार होते हैं। गौरतलब है कि भारत में सड़क दुर्घटनाओं में अवैध पार्किंग एक बड़ा कारण रही है, और अदालतें अब तक इस विषय पर अलग-अलग मत रखती आई हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय राजमार्गों पर रात के अंधेरे में बिना रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत के खड़े वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई जा रही है।
क्या होगा आगे
इस फैसले के बाद बीमा कंपनियाँ अब 'वाहन खड़ा था' के आधार पर दावे नकारने की स्थिति में नहीं होंगी, यदि पार्किंग अवैध और दुर्घटना का कारण साबित हो। पीड़ित परिवार को बढ़ी हुई मुआवजा राशि मिलेगी, हालाँकि सटीक राशि का उल्लेख निर्णय में नहीं किया गया है।