बारुईपुर एनकाउंटर: कलकत्ता हाई कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया, तीन हफ्ते में जांच पूरी करने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल पुलिस को आदेश दिया कि वह बारुईपुर एनकाउंटर से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज को तत्काल सुरक्षित रखे। यह एनकाउंटर उस मामले से जुड़ा है जिसमें मुख्य आरोपी प्रवाश मंडल को पुलिस ने मार गिराया था — मंडल पर दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार और हत्या का आरोप था।
न्यायालय का आदेश
जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस रीतोब्रतो कुमार मित्रा की डिवीजन बेंच ने यह निर्देश जारी किया। बेंच ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में जारी जांच प्रक्रिया को तीन हफ्तों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए, क्योंकि अगली सुनवाई उसी समयसीमा के बाद निर्धारित है। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीसीटीवी फुटेज एनकाउंटर की वैधता को लेकर उठ रहे सवालों का प्रमुख साक्ष्य हो सकता है।
मूल घटनाक्रम: नाबालिग की हत्या से शुरू हुआ विवाद
इस साल जुलाई 2026 में, दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले सूर्यपुर इलाके से एक नाबालिग लड़की लापता हुई थी। बाद में उसका शव एक बैग में बंद करके एक तालाब से बरामद किया गया। इस दिल दहलाने वाली घटना के बाद स्थानीय लोगों ने हिंसक विरोध-प्रदर्शन किया, जिसके दौरान एक निर्दोष युवक की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी — जिससे इलाके में लंबे समय तक तनाव बना रहा।
पुलिस ने इस मामले में चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया — प्रवाश मंडल, दिवाकर सरदार, आनंद सरदार और कबीर मोल्ला। गौरतलब है कि प्रवाश मंडल को इस मामले का मुख्य आरोपी माना जा रहा था।
एनकाउंटर पर उठे सवाल
7 जुलाई की रात पुलिस अपराध स्थल का पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन) करने के लिए प्रवाश मंडल को घटनास्थल पर ले गई। पुलिस के दावे के अनुसार, उसी दौरान मंडल ने एक पुलिस अधिकारी से हथियार छीनने की कोशिश की और फरार होने का प्रयास करते हुए पुलिस दल पर गोली भी चलाई। जांच अधिकारी अर्घ्य मंडल ने जवाबी कार्रवाई में अपनी सर्विस गन से गोली चलाई, जिससे प्रवाश मंडल की मौत हो गई — ऐसा बारुईपुर पुलिस जिले के अधिकारियों ने दावा किया।
हालाँकि, इस एनकाउंटर की परिस्थितियों पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस घटना की जांच क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) को सौंप दी। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में पुलिस एनकाउंटर की जवाबदेही को लेकर पहले से ही सार्वजनिक बहस चल रही थी।
केंद्रीय एजेंसी जांच की मांग
इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें इस पूरे प्रकरण की जांच किसी केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि राज्य की CID द्वारा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है, क्योंकि एनकाउंटर स्वयं राज्य पुलिस द्वारा अंजाम दिया गया था। न्यायालय इस याचिका पर अगली सुनवाई में विचार करेगा।
आगे क्या होगा
अदालत के निर्देशानुसार, CID को तीन हफ्तों के भीतर जांच पूरी करनी होगी और अगली सुनवाई में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश यह संकेत देता है कि न्यायालय इस मामले में साक्ष्यों की अखंडता को लेकर सतर्क है। मामले का अगला मोड़ इस बात पर निर्भर करेगा कि CID अपनी जांच में क्या निष्कर्ष प्रस्तुत करती है और क्या केंद्रीय एजेंसी जांच की माँग स्वीकार होती है।