मेसी इवेंट अव्यवस्था: पुलिस ने कलकत्ता हाई कोर्ट से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए माँगा अतिरिक्त समय
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने 4 अगस्त 2026 को कलकत्ता हाई कोर्ट से वह रिपोर्ट जमा करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा, जो 13 दिसंबर 2025 को कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी की यात्रा के दौरान कथित तौर पर हुई भीड़ अव्यवस्था और हंगामे से संबंधित है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल-जज पीठ ने अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
देरी का कारण
राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि बिधाननगर सिटी पुलिस में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के कारण रिपोर्ट तैयार करने में विलंब हुआ। चूँकि साल्ट लेक स्टेडियम बिधाननगर सिटी पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए यही रिपोर्ट दाखिल करने के लिए उत्तरदायी है।
मुख्य घटनाक्रम
13 दिसंबर 2025 को मेसी के साल्ट लेक स्टेडियम दौरे के दौरान भीड़ प्रबंधन में गंभीर खामियाँ सामने आईं। कई दर्शकों ने आरोप लगाया कि महँगे टिकट खरीदने के बावजूद वे फुटबॉल के इस दिग्गज की एक झलक भी नहीं देख पाए। मेसी के जाने के बाद, कुछ लोगों ने कथित तौर पर वेन्यू में तोड़-फोड़ और आगजनी की। घटना के बाद बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए।
आरोप और गिरफ्तारियाँ
इवेंट आयोजक सतद्रु दत्ता को शुरुआती जाँच के दौरान गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। दत्ता ने पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगाया — उनका कहना है कि बिस्वास पूरे कार्यक्रम के दौरान मेसी के बेहद करीब रहे और मैदान पर प्रभावशाली लोगों की उपस्थिति के कारण टिकट-धारक दर्शक मेसी को ठीक से नहीं देख पाए। दूसरे मामले में तोड़-फोड़ और आगजनी के आरोपों में भी कई गिरफ्तारियाँ हुईं।
अदालती कार्यवाही
राज्य में राजनीतिक बदलाव के बाद अरूप बिस्वास ने गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी समेत किसी भी सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। इसके साथ ही कोर्ट ने घटना की स्वतंत्र जाँच का आदेश देते हुए एक जाँच कमेटी गठित करने का निर्देश दिया।
आगे क्या
अब सभी की निगाहें 11 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जब बिधाननगर सिटी पुलिस को रिपोर्ट दाखिल करनी है। यह मामला न केवल बड़े खेल आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की जवाबदेही का सवाल उठाता है, बल्कि राज्य सरकार के उन अधिकारियों की भूमिका को भी जाँच के दायरे में लाता है जो ऐसे इवेंट्स में शामिल रहते हैं।