इरोड में दलित अंतिम संस्कार विवाद: दो पुरुषों को जबरन दंडवत कराया, SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के इरोड ज़िले के पेरमपल्ली गाँव में 5 अक्टूबर 2026 को एक 90 वर्षीय दलित बुजुर्ग के अंतिम संस्कार को लेकर जातीय विवाद उस वक्त गहरा गया जब कुछ उच्च जाति के ग्रामीणों ने शव को श्मशान ले जाने में बाधा डाली और आर्थिक बहिष्कार की धमकी देकर दलित समुदाय के दो पुरुषों को उनके पाँव छूने पर मजबूर किया। थिंगलूर पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
घटनाक्रम
5 अक्टूबर को अनुसूचित जाति के ग्रामीण बुजुर्ग के शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले जा रहे थे। पुलिस के अनुसार, मृतक की मौत वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों के कारण हुई थी। कुछ उच्च जाति के ग्रामीणों ने इस दौरान अंतिम संस्कार में व्यवधान डाला और दलित ग्रामीणों को कब्रिस्तान तक पहुँचने से रोकने की कोशिश की।
पुलिस ने बताया कि टकराव तब और तीव्र हो गया जब उच्च जाति के सदस्यों ने दलित ग्रामीणों को धमकी दी कि उन्हें उस इलाके में रोज़गार नहीं दिया जाएगा। इस आर्थिक दबाव के चलते दो दलित पुरुषों को कथित तौर पर उच्च जाति के व्यक्तियों के चरणों में दंडवत करने पर मजबूर किया गया।
वायरल वीडियो और मामला दर्ज होना
इस अपमानजनक घटना का एक वीडियो सामने आने के बाद मामला सार्वजनिक ध्यान में आया। वीडियो में दो पुरुषों को दूसरों के सामने दंडवत करते देखा जा सकता है। थिंगलूर पुलिस ने पेरुंदुरई के राजस्व निरीक्षक की शिकायत पर गुरुवार देर रात SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, अवरोध, धमकियों और जबरन दंडवत प्रणाम के मामले में जाँच जारी है।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका
अंततः अंतिम संस्कार पुलिस सुरक्षा में संपन्न हुआ। राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और उनकी निगरानी में समुदाय को अंतिम संस्कार करने का अवसर मिल सका। यह स्थिति इस बात की गवाही देती है कि बिना प्रशासनिक हस्तक्षेप के दलित समुदाय अपने स्वजन का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पाया।
जातीय भेदभाव की जड़ें
सूत्रों ने इस घटना का कारण इलाके में व्याप्त जातीय भेदभाव को बताया है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में श्मशान और कब्रिस्तान को लेकर दलित समुदाय से जुड़े विवाद नए नहीं हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य और केंद्र सरकार दोनों दलित अधिकारों के संरक्षण का दावा करती हैं। आलोचकों का कहना है कि कानून के बावजूद ज़मीनी स्तर पर जाति आधारित अत्याचार थमे नहीं हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दो नामज़द आरोपियों के अलावा अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भी पहचान की जा रही है। जाँच में यह देखा जाएगा कि अवरोध और धमकियों में कितने लोग शामिल थे। मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा और SC/ST एक्ट के तहत दोषसिद्धि पर कड़ी सज़ा का प्रावधान है।