4 अगस्त 2026
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दिल्ली में ₹3 करोड़ का प्रॉपर्टी लोन फर्जीवाड़ा: मुख्य आरोपी मनीष कुमार लक्ष्मी नगर से गिरफ्तार

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दिल्ली में ₹3 करोड़ का प्रॉपर्टी लोन फर्जीवाड़ा: मुख्य आरोपी मनीष कुमार लक्ष्मी नगर से गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली ईओडब्ल्यू ने ₹3 करोड़ के प्रॉपर्टी लोन फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया — जाली सेल डीड, मृत महिला की फर्जी पहचान और फर्जी कंपनियों के जरिए लोन हड़पा गया। मुख्य आरोपी मनीष कुमार लक्ष्मी नगर से गिरफ्तार।

मुख्य बातें

दिल्ली ईओडब्ल्यू ने 4 अगस्त 2026 को ₹3 करोड़ के प्रॉपर्टी लोन धोखाधड़ी में मुख्य आरोपी मनीष कुमार (59 वर्ष) को गिरफ्तार किया।
आरोपी ने एम/एस प्रोटियम फाइनेंस लिमिटेड से जाली दस्तावेजों के जरिए आनंद विहार की संपत्ति पर लोन हासिल किया।
9 नवंबर 2022 को तैयार सेल डीड फर्जी थी; एक मृत महिला की पहचान का इस्तेमाल कर 25 दिनों में दो फर्जी बिक्री विलेख बनाई गईं।
आरोपी ने एम/एस ग्लोबल फाइनेंस लिमिटेड और एम/एस बांके बिहारी एंटरप्राइजेज जैसी फर्जी कंपनियाँ बनाकर रकम ठिकाने लगाई।
गिरफ्तारी में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट , चेकबुक और पीओएस मशीनें बरामद।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 4 अगस्त 2026 को ₹3 करोड़ के प्रॉपर्टी लोन धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी मनीष कुमार (59 वर्ष) को गिरफ्तार किया। आरोपी को पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित उसके कार्यालय से पकड़ा गया। ईओडब्ल्यू थाने में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।

मामले की पृष्ठभूमि

पुलिस के अनुसार, यह मामला एम/एस प्रोटियम फाइनेंस लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि लवलीन मनचंदा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आनंद विहार के डी-ब्लॉक स्थित एक संपत्ति की खरीद के लिए फर्जी दस्तावेजों के जरिए ₹3 करोड़ का हाउसिंग लोन हासिल किया गया।

जांच में खुलासा हुआ कि 9 नवंबर 2022 को संपत्ति की बिक्री विलेख (सेल डीड) जाली दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई थी। एक महिला — जो अब मृत है — ने खुद को संपत्ति की वास्तविक मालिक बताकर यह सौदा किया। आरोप है कि उसी संपत्ति की 25 दिनों के भीतर दो फर्जी बिक्री विलेख तैयार की गईं, जिनके आधार पर वित्तीय संस्थानों से लोन लिया गया।

मुख्य आरोपी की भूमिका

ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि मनीष कुमार — जो एम/एस ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी का संचालक है — इस पूरे फर्जीवाड़े का सक्रिय साजिशकर्ता था। उसने एम/एस ग्लोबल फाइनेंस लिमिटेड और एम/एस बांके बिहारी एंटरप्राइजेज जैसी फर्जी कंपनियाँ बनाकर जाली दस्तावेजों के जरिए प्रोटियम फाइनेंस से लगभग ₹3 करोड़ का लोन हासिल किया।

जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ने लोन दस्तावेजों में एक अन्य मृत महिला को अपनी पत्नी और सह-आवेदक दिखाया था, जबकि उसकी वास्तविक पत्नी कोई और है। लोन की रकम को ठिकाने लगाने के लिए कई फर्जी कंपनियाँ और फर्म बनाई गईं।

बरामदगी और साक्ष्य

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट, विभिन्न बैंकों की चेकबुक, पीओएस मशीनें और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए। पुलिस के अनुसार, स्नातक मनीष कुमार पूर्वी दिल्ली में फाइनेंसर तथा लोन फैसिलिटेटर के तौर पर काम करता था।

ईओडब्ल्यू की सलाह

ईओडब्ल्यू ने आम जनता को सलाह दी है कि वे अपनी संपत्तियों को लंबे समय तक बिना निगरानी के न छोड़ें और समय-समय पर उनकी स्थिति की जांच करते रहें। बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कहा गया है कि विशेष रूप से लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों के एवज में लोन मंजूर करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। मामले में आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनमें मृत व्यक्तियों की पहचान और खाली संपत्तियों का दुरुपयोग एक आजमाया हुआ तरीका बन चुका है। असली सवाल यह है कि प्रोटियम फाइनेंस जैसे वित्तीय संस्थानों की केवाईसी और संपत्ति सत्यापन प्रक्रिया इतनी कमजोर कैसे रही कि 25 दिनों में दो फर्जी सेल डीड पर ₹3 करोड़ जारी हो गए। ईओडब्ल्यू की सलाह स्वागत योग्य है, लेकिन जब तक ऋणदाता संस्थाओं की जवाबदेही तय नहीं होती और संपत्ति रजिस्ट्री का डिजिटल सत्यापन अनिवार्य नहीं बनता, ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली का ₹3 करोड़ का प्रॉपर्टी लोन घोटाला क्या है?
यह मामला आनंद विहार की एक संपत्ति पर जाली दस्तावेजों के जरिए प्रोटियम फाइनेंस लिमिटेड से ₹3 करोड़ का हाउसिंग लोन हड़पने से जुड़ा है। मुख्य आरोपी मनीष कुमार ने एक मृत महिला की पहचान और फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर यह रकम हासिल की।
मनीष कुमार को कहाँ से और कब गिरफ्तार किया गया?
मनीष कुमार को 4 अगस्त 2026 को पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित उसके कार्यालय से दिल्ली ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया। वह एम/एस ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी का संचालक है और लोन फैसिलिटेटर के रूप में काम करता था।
इस घोटाले में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे हुआ?
9 नवंबर 2022 को जाली सेल डीड तैयार की गई, जिसमें एक मृत महिला को संपत्ति का वास्तविक मालिक दिखाया गया। 25 दिनों के भीतर उसी संपत्ति की दो फर्जी बिक्री विलेख बनाई गईं और लोन दस्तावेजों में एक अन्य मृत महिला को पत्नी व सह-आवेदक दिखाया गया।
गिरफ्तारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने आरोपी के पास से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट, विभिन्न बैंकों की चेकबुक, पीओएस मशीनें और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए।
ईओडब्ल्यू ने संपत्ति मालिकों और बैंकों को क्या सलाह दी है?
ईओडब्ल्यू ने संपत्ति मालिकों को सलाह दी है कि वे अपनी संपत्तियाँ लंबे समय तक बिना निगरानी के न छोड़ें। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों पर लोन मंजूर करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने को कहा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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