ओडिशा EOW ने SBI लोन धोखाधड़ी में दबोचा बिचौलिया, ₹6.88 करोड़ के 282 फर्जी लोन का पर्दाफाश
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने ₹6.88 करोड़ के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) लोन धोखाधड़ी मामले में प्रदीप्त कुमार लेंका को 28 मई 2025 को भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया। कटक निवासी लेंका पर आरोप है कि उसने फर्जी रोजगार दस्तावेजों के जरिए 282 अयोग्य व्यक्तियों के नाम पर एक्सप्रेस क्रेडिट लोन मंजूर करवाए, जो बाद में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह गिरफ्तारी 5 मई को EOW पुलिस स्टेशन में दर्ज उस मामले के तहत हुई, जो SBI के आरबीओ भुवनेश्वर के क्षेत्रीय प्रबंधक शिबा सुंदर साहू की शिकायत पर आधारित है। शिकायत के अनुसार, मई 2022 से नवंबर 2023 के बीच SBI की चार शाखाओं — रेल विहार (150 लोन), फॉर्च्यून टावर (115 लोन), पटिया (8 लोन) और दमाना (9 लोन) — से कुल ₹6,88,29,323 रुपए के 282 एक्सप्रेस क्रेडिट लोन फर्जी तरीके से लिए गए।
धोखाधड़ी का तरीका
EOW के अनुसार, आरोपियों ने टाटा स्टील लिमिटेड, TPCODL, वेदांता लिमिटेड, धामरा पोर्ट और आरती स्टील्स लिमिटेड जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में कर्मचारी होने का झूठा दावा करते हुए फर्जी सैलरी सर्टिफिकेट, नौकरी का विवरण, बैंक स्टेटमेंट और KYC दस्तावेज जमा किए। EOW ने अपने बयान में कहा कि लेंका ने लोन लेने वालों के साथ मिलकर 282 अयोग्य व्यक्तियों के नाम पर कॉर्पोरेट/सरकारी क्षेत्र के लिए निर्धारित एक्सप्रेस क्रेडिट लोन मंजूर करवाए।
जांच में खुलासे
धोखाधड़ी से लोन लेने के बाद कथित तौर पर लोन लेने वालों ने EMI चुकाना बंद कर दिया, जिससे सभी खाते NPA घोषित हो गए। जांच में सामने आया कि लोन खातों से ₹3.23 लाख कथित तौर पर सीधे लेंका के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। EOW का मानना है कि लेंका इस पूरे रैकेट में बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था और आर्थिक लाभ के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करता था।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियाँ
इस मामले में लेंका से पहले चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें तीन बैंक अधिकारी शामिल हैं — स्मृति रंजन मोहंती, बैशाखी साहा, चारुबाला दंडसेना और सरिता पाइकरे। ये सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। EOW अधिकारियों ने लेंका के पास से एक मोबाइल फोन सहित कई आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की है, जिसमें धोखाधड़ी से जुड़े साक्ष्य होने की संभावना बताई जा रही है।
आगे की जांच
EOW इस मामले में अन्य संभावित आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी रखे हुए है। बैंकिंग प्रणाली में इस तरह के संगठित फर्जीवाड़े की रोकथाम के लिए यह मामला एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।