महिला पत्रकार उत्पीड़न मामला: दिल्ली सरकार ने ACP विवेक भगत को प्रभार से हटाया, 11 अधिकारियों को नया आदेश
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए, महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न मामले में घिरे सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत को अतिरिक्त प्रभार सौंपने वाले आदेश से हटा दिया। यह संशोधन स्वयं भगत के अनुरोध पर किया गया, जिन्होंने जाँच पूरी होने तक पद का प्रभार न लेने की इच्छा जताई थी।
मुख्य घटनाक्रम
5 अक्टूबर 2026 को दिल्ली सरकार ने दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (DANIPS) के 12 अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (DCP) के पद का वर्तमान कार्यभार सौंपने का आदेश जारी किया था। इनमें ACP विवेक भगत भी शामिल थे। इसके बाद भगत ने स्वेच्छा से अनुरोध किया कि महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न की जाँच संतोषजनक ढंग से पूरी होने तक वे यह अतिरिक्त प्रभार स्वीकार नहीं करेंगे। उनके इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सरकार ने आदेश में संशोधन किया और अब यह आदेश केवल शेष 11 अधिकारियों के लिए पुनः जारी किया जाएगा।
प्रशासनिक पृष्ठभूमि
दिल्ली सरकार ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी स्पष्टीकरण में बताया कि इन अधिकारियों को अतिरिक्त ड्यूटी सौंपने का प्रस्ताव 25 अगस्त 2026 को ही शुरू किया गया था — यानी उन घटनाओं से काफी पहले जिनकी वजह से यह मामला सुर्खियों में आया। आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद 5 अक्टूबर को ही आदेश जारी हुए।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्यभार पूरी तरह अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। इससे संबंधित अधिकारियों को न कोई आर्थिक लाभ मिलता है और न ही उस पद पर नियमित रूप से कार्यरत अधिकारियों की तरह कोई कानूनी जिम्मेदारी निभाने का अधिकार प्राप्त होता है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम दिल्ली पुलिस पर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच सामने आया है। महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की खबरें सामने आने के बाद से ACP भगत सुर्खियों में हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।
आलोचकों का कहना है कि इस मामले में पारदर्शिता बरतना ज़रूरी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रशासनिक फेरबदल जाँच को प्रभावित न करे। वहीं सरकार का तर्क है कि अतिरिक्त प्रभार देने की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार और पूर्व-नियोजित थी।
सरकार का पक्ष
सरकारी अधिकारियों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि मूल प्रस्ताव इस विवाद से पूरी तरह असंबंधित और पहले का है। उन्होंने कहा कि अस्थायी प्रभार व्यवस्था का दायरा सीमित है और इसमें कोई वित्तीय या कानूनी विशेषाधिकार शामिल नहीं है।
संशोधित आदेश — जिसमें केवल 11 अधिकारी शामिल होंगे और भगत का नाम हटाया जाएगा — जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। जाँच की प्रगति या उसके बाद की संभावित प्रशासनिक कार्रवाई के बारे में सरकार ने फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी है।
आगे क्या होगा
ACP भगत के विरुद्ध कथित उत्पीड़न मामले की जाँच जारी है। जाँच पूरी होने और उसका नतीजा आने तक वे अतिरिक्त प्रभार से बाहर रहेंगे। यह देखना होगा कि जाँच रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जाती है, और क्या महिला पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कोई व्यापक नीतिगत कदम उठाया जाता है।