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भगत सिंह जयंती पर दिल्ली सरकार की 'चलो भगत सिंह के साथ' पदयात्रा, संसद स्ट्रीट से कर्तव्य पथ तक मार्च

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भगत सिंह जयंती पर दिल्ली सरकार की 'चलो भगत सिंह के साथ' पदयात्रा, संसद स्ट्रीट से कर्तव्य पथ तक मार्च

सारांश

भगत सिंह की जयंती पर दिल्ली सरकार ने 'चलो भगत सिंह के साथ' पदयात्रा आयोजित की। CM रेखा गुप्ता ने तीन शहीदों की प्रतिमाओं का अनावरण किया और संसद स्ट्रीट परिसर को अब 'शहीद-ए-आजम भगत सिंह संघर्ष स्थल' का दर्जा मिला।

मुख्य बातें

दिल्ली सरकार ने 27 सितंबर 2026 को भगत सिंह जयंती पर 'चलो भगत सिंह के साथ' पदयात्रा आयोजित की।
पदयात्रा संसद स्ट्रीट से शुरू होकर कर्तव्य पथ पर समाप्त हुई।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भगत सिंह , राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाओं का अनावरण किया।
संसद स्ट्रीट परिसर को अब 'शहीद-ए-आजम भगत सिंह संघर्ष स्थल' के रूप में आधिकारिक मान्यता मिली।
मंत्री रविंदर इंद्रराज सिंह ने CM गुप्ता और गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष इस स्थल के संरक्षण का मुद्दा उठाया था।
कर्तव्य पथ पर देशभक्ति सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

दिल्ली सरकार ने 27 सितंबर 2026 को 'शहीद-ए-आजम' भगत सिंह की जयंती के अवसर पर 'चलो भगत सिंह के साथ' पदयात्रा का आयोजन किया, जिसमें युवाओं, स्वयंसेवकों, सरकारी कर्मचारियों और देशभक्त नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। संसद स्ट्रीट से शुरू होकर कर्तव्य पथ पर समाप्त हुई यह यात्रा 'वंदे मातरम' और 'भारत माता की जय' के नारों के बीच संपन्न हुई।

पदयात्रा का मार्ग और आयोजन

आधिकारिक बयान के अनुसार, पदयात्रा संसद स्ट्रीट से आरंभ होकर विट्ठल भाई पटेल हाउस, मावलंकर सभागार, श्रम शक्ति भवन, रफी मार्ग और कृषि भवन से होते हुए कर्तव्य पथ पर संपन्न हुई। कर्तव्य पथ पर देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद भगत सिंह के जीवन, संघर्ष और बलिदान को दर्शाने वाला एक विशेष प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की प्रतिमाओं की अनावरण

इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह, अमर शहीद राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाओं का अनावरण किया। गुप्ता ने पदयात्रा में भाग लेने वाले युवाओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भगत सिंह को समर्पित इस यात्रा में युवाओं का उत्साह और स्नेह सराहनीय है।

ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सहकारिता एवं सामाजिक कल्याण मंत्री रविंदर इंद्रराज सिंह ने बताया कि संसद स्ट्रीट स्थित परिसर केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि भगत सिंह के जीवन और संघर्ष से जुड़ा एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर स्थल है। उन्होंने घोषणा की कि इस स्थल को अब 'शहीद-ए-आजम भगत सिंह संघर्ष स्थल' के रूप में आधिकारिक मान्यता दी गई है।

रविंदर इंद्रराज सिंह ने बताया कि विधानसभा बम विस्फोट के बाद गिरफ्तारी के पश्चात भगत सिंह को तत्कालीन संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन से इसी परिसर में स्थित न्यायालय में लाया गया था, जहाँ उनके मामले की कार्यवाही हुई थी। गौरतलब है कि सहकारिता विभाग का प्रभार मिलने के बाद उन्होंने इस स्थल से संबंधित ऐतिहासिक दस्तावेज और अभिलेख एकत्र किए तथा ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि की।

संरक्षण का मुद्दा और राजनीतिक पहल

मंत्री रविंदर इंद्रराज सिंह ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण का मुद्दा उठाया था, जिसके परिणामस्वरूप अब इसे 'शहीद-ए-आजम भगत सिंह संघर्ष स्थल' के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने इसे दिल्ली सरकार द्वारा देश के महान क्रांतिकारियों को दी गई सच्ची श्रद्धांजलि बताया।

युवाओं से देशभक्ति का आह्वान

रविंदर इंद्रराज सिंह ने कहा कि आज युवाओं के हृदय में जो देशभक्ति की लौ प्रज्वलित हुई है, उसे कभी बुझने नहीं देना चाहिए। उन्होंने युवाओं से शहीदों द्वारा प्रदर्शित आदर्शों, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। यह आयोजन भगत सिंह की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के दिल्ली सरकार के प्रयासों की कड़ी में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस पुनर्नामकरण के साथ ठोस संरक्षण और सार्वजनिक शिक्षा की ठोस योजना भी है। दिल्ली में BJP सरकार के लिए यह कार्यक्रम राष्ट्रवादी छवि को मजबूत करने का अवसर भी है, जो पहले AAP के पाले में मानी जाती थी। भगत सिंह की विरासत को लेकर राजनीतिक दावेदारी नई नहीं है — विभिन्न दलों ने समय-समय पर उनके नाम का उपयोग किया है। जब तक इस स्थल पर एक स्थायी संग्रहालय या शैक्षिक केंद्र नहीं बनता, यह पहल प्रतीकात्मक ही रहेगी।
RashtraPress
28 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'चलो भगत सिंह के साथ' कार्यक्रम क्या है?
यह दिल्ली सरकार द्वारा 27 सितंबर 2026 को भगत सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पदयात्रा कार्यक्रम है, जो संसद स्ट्रीट से शुरू होकर कर्तव्य पथ पर समाप्त हुई। इसमें युवाओं, स्वयंसेवकों और सरकारी कर्मचारियों ने भाग लिया।
'शहीद-ए-आजम भगत सिंह संघर्ष स्थल' क्या है?
संसद स्ट्रीट स्थित वह परिसर जिसे पहले RCS कार्यालय के नाम से जाना जाता था, अब 'शहीद-ए-आजम भगत सिंह संघर्ष स्थल' के रूप में आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई है। विधानसभा बम विस्फोट के बाद गिरफ्तारी के बाद भगत सिंह को इसी परिसर के न्यायालय में लाया गया था।
इस कार्यक्रम में किन नेताओं ने भाग लिया?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाओं का अनावरण किया। सहकारिता एवं सामाजिक कल्याण मंत्री रविंदर इंद्रराज सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण की पहल किसने की?
मंत्री रविंदर इंद्रराज सिंह ने सहकारिता विभाग का प्रभार मिलने के बाद ऐतिहासिक दस्तावेज एकत्र कर तथ्यों की पुष्टि की। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष इस स्थल के संरक्षण का मुद्दा उठाया।
कर्तव्य पथ पर कौन से कार्यक्रम हुए?
कर्तव्य पथ पर देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद भगत सिंह के जीवन, संघर्ष और बलिदान को दर्शाने वाला एक विशेष प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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