दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की पर्सनैलिटी राइट्स याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा, डीपफेक हटाने की माँग

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दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की पर्सनैलिटी राइट्स याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा, डीपफेक हटाने की माँग

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की पर्सनैलिटी राइट्स याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। अदालत ने प्रथम दृष्टया कहा कि राजनीतिक आलोचना व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं, लेकिन सिद्ध डीपफेक और मानहानिकारक सामग्री पर कार्रवाई संभव। फैसला जल्द आने की उम्मीद।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 मई 2026 को राघव चड्ढा की पर्सनैलिटी राइट्स याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
याचिका में सोशल मीडिया से डीपफेक वीडियो , एआई-जनरेटेड सामग्री और फर्जी भाषण हटाने की माँग की गई है।
अदालत ने प्रथम दृष्टया कहा — राजनीतिक आलोचना को व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
अदालत ने माना कि पूरी तरह फर्जी या मानहानिकारक सामग्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है।
अंतिम फैसले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर महत्त्वपूर्ण दिशा-निर्देश आ सकते हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 मई 2026 को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके खिलाफ फैलाई जा रही डीपफेक, एआई-जनरेटेड और अपमानजनक सामग्री को हटाने की माँग की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) के व्यावसायिक दोहन और राजनीतिक आलोचना के बीच स्पष्ट विभाजन-रेखा खींचना ज़रूरी है।

याचिका में क्या माँगा गया

चड्ढा की याचिका में मुख्य रूप से एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो, छेड़छाड़ किए गए क्लिप, फर्जी भाषण और भ्रामक सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से तत्काल हटाने की अपील की गई है। याचिका में तर्क दिया गया कि इन सामग्रियों से उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है और उनकी सार्वजनिक छवि को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

चड्ढा के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ सोशल मीडिया पर लगातार गलत और अपमानजनक सामग्री वायरल की जा रही है, जो न केवल उनकी प्रतिष्ठा को आघात पहुँचाती है, बल्कि सार्वजनिक भ्रम भी उत्पन्न करती है।

अदालत की टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह टिप्पणी की कि राघव चड्ढा के व्यक्तित्व अधिकारों का कोई स्पष्ट उल्लंघन दिखाई नहीं देता। अदालत ने कहा, 'राजनीतिक क्षेत्र में आपके द्वारा लिए गए निर्णय आलोचना का विषय हो सकते हैं। आजकल सोशल मीडिया की पहुँच बहुत ज़्यादा हो गई है।'

हालाँकि, अदालत ने यह भी माना कि यदि कोई सामग्री पूरी तरह फर्जी, डीपफेक या मानहानिकारक है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।

मामले का व्यापक संदर्भ

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल के वर्षों में सांसदों और सार्वजनिक व्यक्तियों के खिलाफ डीपफेक तथा एआई टूल्स के ज़रिए फर्जी सामग्री बनाने की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ी हैं। गौरतलब है कि कई राजनेताओं ने ऐसी सामग्री के खिलाफ अदालतों का दरवाज़ा खटखटाया है। यह याचिका इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और पर्सनैलिटी राइट्स के दायरे पर न्यायिक स्पष्टता की माँग की गई है।

उल्लेखनीय है कि राघव चड्ढा पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता थे और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। उनके राजनीतिक दल-परिवर्तन के बाद से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ सामग्री की बाढ़ आने का उनकी याचिका में उल्लेख है।

आगे क्या होगा

दिल्ली उच्च न्यायालय अब इस याचिका पर अपना अंतिम फैसला कुछ दिनों में सुनाएगा। इस फैसले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की ज़िम्मेदारी और व्यक्तित्व अधिकारों के दायरे को लेकर महत्त्वपूर्ण दिशा-निर्देश तय हो सकते हैं, जो भविष्य में इसी तरह के मामलों के लिए एक मिसाल बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वैसे तो सही है — लेकिन असली प्रश्न यह है कि फर्जी और असली सामग्री के बीच की रेखा कौन खींचेगा और कितनी तेज़ी से। जब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्पष्ट 'टेकडाउन' समयसीमा तय नहीं होती, तब तक ऐसी याचिकाएँ राहत से ज़्यादा लंबी कानूनी लड़ाई बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा की पर्सनैलिटी राइट्स याचिका क्या है?
यह दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर वह याचिका है जिसमें राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से डीपफेक वीडियो, एआई-जनरेटेड सामग्री, फर्जी भाषण और अपमानजनक कंटेंट हटाने की माँग की है। उनका तर्क है कि यह सामग्री उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन करती है और उनकी छवि को जानबूझकर नुकसान पहुँचाती है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
अदालत ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि राघव चड्ढा के व्यक्तित्व अधिकारों का कोई स्पष्ट उल्लंघन दिखाई नहीं देता और राजनीतिक आलोचना को पर्सनैलिटी राइट्स का हनन नहीं माना जा सकता। हालाँकि, अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि सिद्ध डीपफेक या मानहानिकारक सामग्री के खिलाफ कार्रवाई संभव है।
इस याचिका पर अंतिम फैसला कब आएगा?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 मई 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया है और अंतिम आदेश कुछ दिनों में आने की उम्मीद है। यह फैसला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और व्यक्तित्व अधिकारों के दायरे पर महत्त्वपूर्ण दिशा-निर्देश तय कर सकता है।
यह मामला भारत में डीपफेक कानून के लिए क्यों अहम है?
भारत में अभी तक डीपफेक और एआई-जनरेटेड सामग्री को नियंत्रित करने वाला कोई स्पष्ट कानून नहीं है। यह मामला इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और सार्वजनिक हस्तियों के अधिकारों की सीमा पर न्यायिक स्पष्टता माँगी गई है, जो भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बन सकती है।
राघव चड्ढा कौन हैं और वे किस पार्टी से हैं?
राघव चड्ढा राज्यसभा सांसद हैं, जो पहले आम आदमी पार्टी (AAP) में थे और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। उनके दल-परिवर्तन के बाद से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ विवादास्पद सामग्री बढ़ने का उनकी याचिका में उल्लेख है।
राष्ट्र प्रेस
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