8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हेमचंद्र विक्रमादित्य विजयोत्सव दिल्ली में सम्पन्न, 'मन की बात' में PM मोदी के उल्लेख पर रौनियार समाज ने जताया आभार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हेमचंद्र विक्रमादित्य विजयोत्सव दिल्ली में सम्पन्न, 'मन की बात' में PM मोदी के उल्लेख पर रौनियार समाज ने जताया आभार

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी के 'मन की बात' में हेमचंद्र विक्रमादित्य का उल्लेख होने के बाद रौनियार वैश्य समाज ने नई दिल्ली में विजयोत्सव मनाया और PMO को ज्ञापन भेजकर सासाराम में हेमू की भव्य प्रतिमा स्थापना व राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में उनके योगदान को शामिल करने की माँग रखी।

मुख्य बातें

रौनियार वैश्य सभा, दिल्ली ने 7 अक्टूबर 2026 को हिमाचल भवन, नई दिल्ली में हेमचंद्र विक्रमादित्य को समर्पित 'विजयोत्सव' आयोजित किया।
PM नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को प्रसारित 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में हेमू का उल्लेख किया था, जिसके बाद समाज ने आभार व्यक्त किया।
देशभर में लगभग एक करोड़ रौनियार वैश्य समाज के लोगों की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय को विस्तृत ज्ञापन भेजा गया।
ज्ञापन में सासाराम (बिहार) में भव्य प्रतिमा स्थापना और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में हेमू के योगदान को शामिल करने की माँग की गई।
शोधकर्ता सुबोध कुमार गुप्ता की 15 वर्षों के शोध पर आधारित पुस्तक का कार्यक्रम में विशेष उल्लेख किया गया।
असम और नागालैंड के पूर्व राज्यपाल प्रो.
जगदीश मुखी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

रौनियार वैश्य सभा, दिल्ली (पंजी.) के तत्वावधान में 7 अक्टूबर 2026 को हिमाचल भवन, नई दिल्ली में अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) को समर्पित 'विजयोत्सव' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करना था, जिन्होंने 30 अगस्त को प्रसारित 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में हेमू का विशेष उल्लेख किया था।

कार्यक्रम का आयोजन और मुख्य अतिथि

विजयोत्सव में असम और नागालैंड के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि प्रख्यात लेखक और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अतुल सिंघल विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में समाज के गणमान्य लोगों, इतिहास प्रेमियों और युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।

मुख्य अतिथि प्रो. जगदीश मुखी ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास के ऐसे विस्मृत नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने हेमू के योगदान को भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर बताया।

रौनियार समाज का आभार और प्रमुख मांगें

सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि 'मन की बात' में हेमू का उल्लेख होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले हज़ारों रौनियार वैश्य परिवार और देशभर में फैले लगभग एक करोड़ रौनियार समाज के लोग गहरे गौरव और सम्मान की अनुभूति कर रहे हैं। इसी भावना के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा गया है।

ज्ञापन में मुख्यतः दो माँगें रखी गई हैं — पहली, सम्राट हेमू की एक भव्य आदमकद प्रतिमा उनकी कर्मभूमि सासाराम (बिहार) में स्थापित की जाए और उसका अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जाए; और दूसरी, सम्राट हेमू के जीवन और ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

हेमू का ऐतिहासिक महत्व

वक्ताओं ने कहा कि हेमचंद्र विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के उन विशिष्ट योद्धाओं और कुशल प्रशासकों में से थे, जिन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से उठकर अपने पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और संगठन-कौशल के बल पर अपनी एक अमिट पहचान बनाई। उन्होंने विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध भारतीय स्वाभिमान की रक्षा की और राष्ट्रभक्ति तथा साहस का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। गौरतलब है कि हेमू को अक्सर 'अंतिम हिंदू सम्राट' के रूप में संदर्भित किया जाता है, हालाँकि यह अभिधान इतिहासकारों के बीच बहस का विषय रहा है।

शोध पुस्तक और ऐतिहासिक प्रमाण

इस अवसर पर समाज के पूर्व अध्यक्ष और शोधकर्ता सुबोध कुमार गुप्ता द्वारा लगभग 15 वर्षों के गहन शोध के बाद लिखी गई पुस्तक 'आखिर कौन था — हेमू अंतिम हिन्दू सम्राट अंतिम विक्रमादित्य' का विशेष उल्लेख किया गया। सभा के अनुसार, इस शोध में ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर हेमू को रौनियार वैश्य समाज से संबंधित बताया गया है, और इस कार्य को विभिन्न विश्वविद्यालयों और इतिहासकारों द्वारा सराहना भी मिल चुकी है।

समाज का संकल्प और आगे की राह

सभा के अध्यक्ष सुबोध प्रसाद पंकज और राष्ट्रीय संयोजक एवं मीडिया प्रभारी पंकज कुमार ने कहा कि रौनियार वैश्य समाज इस दिशा में हर संभव सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और उसे उम्मीद है कि सरकार उनकी माँगों पर सकारात्मक विचार करेगी। कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, इतिहास-संरक्षण और सम्राट हेमू के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। अब सभी की निगाहें प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उपेक्षित ऐतिहासिक नायकों के पुनर्मूल्यांकन की व्यापक प्रवृत्ति से जुड़ती है। रौनियार वैश्य समाज की माँगें — प्रतिमा और पाठ्यक्रम में समावेश — वैध सांस्कृतिक दावे हैं, लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि 'अंतिम हिंदू सम्राट' जैसी उपाधियाँ अकादमिक रूप से विवादित हैं और इतिहास-लेखन में सावधानी की माँग करती हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या यह सामाजिक-सांस्कृतिक ऊर्जा नीतिगत बदलाव में तब्दील होती है, या केवल एक भावनात्मक क्षण बनकर रह जाती है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) कौन थे?
हेमचंद्र विक्रमादित्य, जिन्हें 'हेमू' के नाम से जाना जाता है, 16वीं शताब्दी के भारतीय योद्धा और प्रशासक थे, जिन्हें 'अंतिम हिंदू सम्राट' के रूप में संदर्भित किया जाता है। रौनियार वैश्य सभा के अनुसार वे रौनियार वैश्य समाज से संबंधित थे, हालाँकि यह दावा शोध-आधारित है।
'मन की बात' के 137वें एपिसोड में हेमू का उल्लेख क्यों महत्वपूर्ण है?
30 अगस्त को प्रसारित 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने हेमू को भारतीय इतिहास के उपेक्षित नायक के रूप में उल्लेखित किया, जिससे देशभर के लगभग एक करोड़ रौनियार वैश्य समाज के लोगों ने गहरे गौरव की अनुभूति की। यह उल्लेख ऐतिहासिक पुनर्मूल्यांकन की माँगों को नई ऊर्जा देने वाला बताया जा रहा है।
रौनियार वैश्य सभा ने PMO को क्या माँगें भेजी हैं?
सभा ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे ज्ञापन में दो प्रमुख माँगें रखी हैं — सासाराम (बिहार) में हेमू की भव्य आदमकद प्रतिमा स्थापित करना जिसका अनावरण PM मोदी के हाथों हो, तथा हेमू के जीवन और योगदान को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल करना।
विजयोत्सव कार्यक्रम में कौन-कौन से प्रमुख व्यक्ति शामिल हुए?
7 अक्टूबर 2026 को हिमाचल भवन, नई दिल्ली में आयोजित विजयोत्सव में असम और नागालैंड के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी मुख्य अतिथि तथा वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अतुल सिंघल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
हेमू पर शोध पुस्तक के लेखक कौन हैं और इसकी क्या विशेषता है?
यह पुस्तक 'आखिर कौन था — हेमू अंतिम हिन्दू सम्राट अंतिम विक्रमादित्य' रौनियार वैश्य सभा के पूर्व अध्यक्ष और शोधकर्ता सुबोध कुमार गुप्ता ने लगभग 15 वर्षों के गहन शोध के बाद लिखी है। सभा के अनुसार इसमें ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर हेमू को रौनियार वैश्य समाज से जोड़ा गया है और इसे विभिन्न विश्वविद्यालयों व इतिहासकारों द्वारा सराहना मिल चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 10 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले