हेमचंद्र विक्रमादित्य विजयोत्सव दिल्ली में सम्पन्न, 'मन की बात' में PM मोदी के उल्लेख पर रौनियार समाज ने जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
रौनियार वैश्य सभा, दिल्ली (पंजी.) के तत्वावधान में 7 अक्टूबर 2026 को हिमाचल भवन, नई दिल्ली में अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) को समर्पित 'विजयोत्सव' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करना था, जिन्होंने 30 अगस्त को प्रसारित 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में हेमू का विशेष उल्लेख किया था।
कार्यक्रम का आयोजन और मुख्य अतिथि
विजयोत्सव में असम और नागालैंड के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि प्रख्यात लेखक और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अतुल सिंघल विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में समाज के गणमान्य लोगों, इतिहास प्रेमियों और युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।
मुख्य अतिथि प्रो. जगदीश मुखी ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास के ऐसे विस्मृत नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने हेमू के योगदान को भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर बताया।
रौनियार समाज का आभार और प्रमुख मांगें
सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि 'मन की बात' में हेमू का उल्लेख होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले हज़ारों रौनियार वैश्य परिवार और देशभर में फैले लगभग एक करोड़ रौनियार समाज के लोग गहरे गौरव और सम्मान की अनुभूति कर रहे हैं। इसी भावना के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा गया है।
ज्ञापन में मुख्यतः दो माँगें रखी गई हैं — पहली, सम्राट हेमू की एक भव्य आदमकद प्रतिमा उनकी कर्मभूमि सासाराम (बिहार) में स्थापित की जाए और उसका अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जाए; और दूसरी, सम्राट हेमू के जीवन और ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
हेमू का ऐतिहासिक महत्व
वक्ताओं ने कहा कि हेमचंद्र विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के उन विशिष्ट योद्धाओं और कुशल प्रशासकों में से थे, जिन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से उठकर अपने पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और संगठन-कौशल के बल पर अपनी एक अमिट पहचान बनाई। उन्होंने विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध भारतीय स्वाभिमान की रक्षा की और राष्ट्रभक्ति तथा साहस का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। गौरतलब है कि हेमू को अक्सर 'अंतिम हिंदू सम्राट' के रूप में संदर्भित किया जाता है, हालाँकि यह अभिधान इतिहासकारों के बीच बहस का विषय रहा है।
शोध पुस्तक और ऐतिहासिक प्रमाण
इस अवसर पर समाज के पूर्व अध्यक्ष और शोधकर्ता सुबोध कुमार गुप्ता द्वारा लगभग 15 वर्षों के गहन शोध के बाद लिखी गई पुस्तक 'आखिर कौन था — हेमू अंतिम हिन्दू सम्राट अंतिम विक्रमादित्य' का विशेष उल्लेख किया गया। सभा के अनुसार, इस शोध में ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर हेमू को रौनियार वैश्य समाज से संबंधित बताया गया है, और इस कार्य को विभिन्न विश्वविद्यालयों और इतिहासकारों द्वारा सराहना भी मिल चुकी है।
समाज का संकल्प और आगे की राह
सभा के अध्यक्ष सुबोध प्रसाद पंकज और राष्ट्रीय संयोजक एवं मीडिया प्रभारी पंकज कुमार ने कहा कि रौनियार वैश्य समाज इस दिशा में हर संभव सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और उसे उम्मीद है कि सरकार उनकी माँगों पर सकारात्मक विचार करेगी। कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, इतिहास-संरक्षण और सम्राट हेमू के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। अब सभी की निगाहें प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।