दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का 48 घंटों में बड़ा एक्शन: 3 जाली 'नो एंट्री परमिट' और छेड़छाड़ वाले वाहन पकड़े, तीन FIR दर्ज

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दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का 48 घंटों में बड़ा एक्शन: 3 जाली 'नो एंट्री परमिट' और छेड़छाड़ वाले वाहन पकड़े, तीन FIR दर्ज

सारांश

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सिर्फ 48 घंटों में तीन बड़े मामले उजागर किए — जाली 'नो एंट्री परमिट' से लेकर छेड़छाड़ वाले ऑटो-रिक्शा तक। एक आरोपी ने ₹12,000 में जाली परमिट खरीदने की बात कबूल की, जो इस धंधे के संगठित स्वरूप की ओर इशारा करती है।

Key Takeaways

  • दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 26-27 अप्रैल 2026 के बीच 48 घंटों में तीन मामले पकड़े और तीन FIR दर्ज कीं।
  • तिलक मार्ग पर 21 वर्षीय वीर पाल (हमीरपुर, उत्तर प्रदेश) जाली NEP के साथ पकड़ा गया।
  • शंकर चौक पर राहुल शुक्ला ने स्वीकार किया कि उसने ₹12,000 में संजय नामक व्यक्ति से जाली परमिट खरीदा था।
  • कनॉट प्लेस में एक ऑटो-रिक्शा के चेसिस और इंजन नंबर रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए; नकली नंबर प्लेट बरामद।
  • पुलिस ने ई-चालान मशीन और रियल-टाइम जाँच को इन खुलासों का आधार बताया।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 26 से 27 अप्रैल 2026 के बीच महज 48 घंटों में तीन अलग-अलग मामलों में जाली 'नो एंट्री परमिट' (NEP) और वाहनों में छेड़छाड़ का भंडाफोड़ किया है। तिलक मार्ग, पार्लियामेंट ट्रैफिक सर्किल और कनॉट प्लेस में की गई इन कार्रवाइयों के बाद संबंधित थानों में तीन FIR दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मामला 1: तिलक मार्ग पर फर्जी NEP पकड़ा

27 अप्रैल 2026 की शाम लगभग शाम 5:15 बजे पटियाला हाउस कोर्ट के निकट तिलक मार्ग सर्किल पर ट्रैफिक पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन को रोका। ई-चालान मशीन से जाँच करने पर वाहन पर लगा 'नो एंट्री परमिट' फर्जी पाया गया। वाहन चालक वीर पाल, उम्र 21 वर्ष, जो उत्तर प्रदेश के हमीरपुर का रहने वाला है, इस जाली परमिट को असली बताकर इस्तेमाल कर रहा था। पुलिस ने वाहन जब्त कर तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन को सौंपा और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।

मामला 2: 12 हजार रुपये में खरीदा था जाली परमिट

27 अप्रैल 2026 की रात लगभग 10 बजे शंकर चौक पर पार्लियामेंट ट्रैफिक सर्किल के अंतर्गत चेकिंग के दौरान एक अन्य वाहन को रोका गया। जाँच में सामने आया कि उस वाहन पर लगा 'नो एंट्री परमिट' न केवल फर्जी था, बल्कि किसी दूसरे वाहन के लिए जारी किया गया था। वाहन चालक राहुल शुक्ला, जो शास्त्री पार्क इलाके का निवासी है, ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने यह जाली परमिट संजय नामक व्यक्ति से ₹12,000 में खरीदा था। इस मामले में मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर जाँच शुरू की गई है।

मामला 3: कनॉट प्लेस में ऑटो-रिक्शा के चेसिस-इंजन नंबर से हुई छेड़छाड़

26 अप्रैल 2026 को कनॉट प्लेस स्थित काके दा ढाबा के पास नियमित जाँच के दौरान एक ऑटो-रिक्शा को रोका गया। जाँच में पाया गया कि वाहन के चेसिस और इंजन नंबर रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। इससे स्पष्ट हुआ कि वाहन के साथ छेड़छाड़ की गई है और उस पर नकली नंबर प्लेट लगाई गई है। पुलिस ने वाहन जब्त कर कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन को सौंपा और संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की।

तकनीक से हो रही पहचान

पुलिस के अनुसार ई-चालान मशीनों और रियल-टाइम डेटाबेस जाँच के माध्यम से ऐसे मामलों की पहचान करना अब पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। गौरतलब है कि दिल्ली में जाली NEP का उपयोग लंबे समय से एक संगठित समस्या रही है, और ये कार्रवाइयाँ उसी के विरुद्ध चल रहे अभियान का हिस्सा हैं।

नागरिकों के लिए चेतावनी

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि जाली दस्तावेजों का उपयोग या वाहनों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने अपील की है कि 'नो एंट्री परमिट' केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्राप्त किया जाए, ताकि किसी भी कानूनी परेशानी से बचा जा सके। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

Point of View

000 में खुलेआम बिकना यह संकेत देता है कि यह महज व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है जो दिल्ली के ट्रैफिक तंत्र को व्यवस्थित रूप से चुनौती दे रहा है। ई-चालान मशीनों की तैनाती एक सकारात्मक कदम है, लेकिन असली सवाल यह है कि ये जाली परमिट बन कहाँ रहे हैं और इनकी आपूर्ति श्रृंखला तक जाँच कब पहुँचेगी। 'संजय' जैसे बिचौलियों के नेटवर्क को तोड़े बिना, केवल वाहन चालकों पर FIR दर्ज करना समस्या की जड़ को नहीं छूता।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 48 घंटों में क्या कार्रवाई की?
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 26-27 अप्रैल 2026 के बीच तिलक मार्ग, पार्लियामेंट ट्रैफिक सर्किल और कनॉट प्लेस में तीन अलग-अलग मामलों में जाली 'नो एंट्री परमिट' और वाहन छेड़छाड़ का भंडाफोड़ किया। सभी मामलों में संबंधित थानों में FIR दर्ज की गई है।
जाली 'नो एंट्री परमिट' कैसे पकड़ा जाता है?
पुलिस ई-चालान मशीनों और रियल-टाइम डेटाबेस जाँच के ज़रिए वाहन पर लगे परमिट की प्रामाणिकता तुरंत सत्यापित कर सकती है। यदि परमिट डेटाबेस से मेल नहीं खाता या किसी अन्य वाहन के लिए जारी हुआ होता है, तो उसे फर्जी माना जाता है।
राहुल शुक्ला ने जाली परमिट कितने में खरीदा था?
पूछताछ में राहुल शुक्ला ने बताया कि उसने जाली 'नो एंट्री परमिट' संजय नामक व्यक्ति से ₹12,000 में खरीदा था। पुलिस ने मंदिर मार्ग थाने में FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
कनॉट प्लेस में ऑटो-रिक्शा के साथ क्या गड़बड़ी पाई गई?
26 अप्रैल 2026 को कनॉट प्लेस में जाँच के दौरान एक ऑटो-रिक्शा के चेसिस और इंजन नंबर रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए और उस पर नकली नंबर प्लेट पाई गई। वाहन जब्त कर कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।
'नो एंट्री परमिट' कहाँ से प्राप्त करना चाहिए?
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 'नो एंट्री परमिट' केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्राप्त किया जाना चाहिए। जाली दस्तावेज़ों का उपयोग या वाहन में छेड़छाड़ करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Nation Press