8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन में दिल्ली पुलिसकर्मियों पर हमला, कॉन्स्टेबलों ने सुनाई आपबीती

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन में दिल्ली पुलिसकर्मियों पर हमला, कॉन्स्टेबलों ने सुनाई आपबीती

सारांश

कांग्रेस के SIR-विरोधी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस कर्मियों पर कथित हमले की आपबीती सामने आई है। कॉन्स्टेबल दीपेंद्र संधू, हेड कांस्टेबल भूपेंद्र अहलावत और महिला कॉन्स्टेबल सीमा ने लात-मुक्के और सुनियोजित हमले के आरोप लगाए। दिल्ली पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज की हैं।

मुख्य बातें

7 अक्टूबर 2026 को इंडिया ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कर्मियों पर कथित हमले हुए।
कॉन्स्टेबल दीपेंद्र संधू ने बताया कि धारा 163 के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान उन्हें पीछे से खींचकर जमीन पर पटका गया।
हेड कांस्टेबल भूपेंद्र अहलावत ने इसे सुनियोजित हमला बताया और कहा कि हमलावर को भागने में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मदद की।
महिला कॉन्स्टेबल सीमा के साथ आकाशवाणी भवन के पास मारपीट हुई, जहाँ प्रियंका गांधी के साथ बैठे विधायकों को हिरासत में लिया जा रहा था।
दिल्ली पुलिस ने दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट के मामले में कई एफआईआर दर्ज की हैं।

नई दिल्ली में 7 अक्टूबर 2026 को इंडिया ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कई कर्मियों पर कथित तौर पर हमला किया गया। प्रभावित पुलिसकर्मियों — जिनमें महिला कॉन्स्टेबल भी शामिल हैं — ने बताया कि चुनाव आयोग के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के विरुद्ध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने उन्हें लात मारी, मुक्के बरसाए और जमीन पर गिरा दिया। दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में कई एफआईआर दर्ज की हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कांस्टेबल दीपेंद्र संधू ने बताया कि जब वे प्रदर्शनकारियों को सूचित कर रहे थे कि क्षेत्र में धारा 163 लागू है और वहाँ प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है, तभी भीड़ ने उन्हें पीछे से खींचकर जमीन पर पटक दिया। उन्होंने कहा, 'अचानक, वे हमारे पीछे आए और हमें पीछे से खींच लिया। फिर उन्होंने हमें जमीन पर गिरा दिया और लात-घूंसे मारने लगे। किसी तरह हम खुद को बचाकर वहाँ से भागने में कामयाब रहे।'

संधू ने यह भी बताया कि उन पर हमला करने वाला व्यक्ति सफेद कपड़ों में था और हमले के तुरंत बाद प्रदर्शन स्थल से भाग निकला।

हेड कांस्टेबल अहलावत का बयान

हेड कांस्टेबल भूपेंद्र अहलावत ने इस घटना को एक सुनियोजित हमला करार दिया। उन्होंने बताया कि पुलिस वर्दी में होने के बावजूद उन्हें पीछे से पकड़कर जमीन पर गिरा दिया गया। उन्होंने कहा, 'जब मैंने मुड़कर देखा कि वह कौन है, तो जैसे ही मेरी नजर उससे मिली, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उसे छिपा लिया। वे उसे गोलचक्कर के बीच बने हरे-भरे इलाके में ले गए और उसे वहाँ से जानबूझकर भेज दिया।'

अहलावत के अनुसार, हमलावर को 'बचाव और भागने का रास्ता' प्रदर्शनकारियों ने ही मुहैया कराया, जो इस घटना को संगठित प्रकृति का दर्शाता है।

महिला कॉन्स्टेबल सीमा की आपबीती

महिला कॉन्स्टेबल सीमा ने बताया कि आकाशवाणी भवन के पास विधायकों को हिरासत में लेने की कार्रवाई के दौरान उनके साथ मारपीट हुई। उन्होंने कहा, 'अपने अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना हमारा कर्तव्य है। उस समय हम इस बात पर ध्यान नहीं देते कि हमें चोट लग रही है या नहीं। मुझे बाद में पता चला कि मुझे चोट लगी है।'

सीमा ने यह भी बताया कि जिन विधायकों को हिरासत में लिया जा रहा था, वे प्रियंका गांधी के साथ बैठे थे।

पुलिस की कार्रवाई

रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने विपक्षी कार्यकर्ताओं द्वारा अपने कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट के मामले में कई एफआईआर दर्ज की हैं। यह ऐसे समय में हुआ जब पुलिसकर्मी कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास कर रहे थे।

गौरतलब है कि इंडिया ब्लॉक का यह विरोध-प्रदर्शन चुनाव आयोग के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' अभियान के खिलाफ आयोजित किया गया था, जिसे विपक्ष मतदाता सूचियों में हेरफेर का जरिया बता रहा है।

आगे क्या होगा

दर्ज एफआईआर के आधार पर जाँच जारी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या हमलावरों की पहचान सीसीटीवी फुटेज और गवाह बयानों के आधार पर हो पाती है। राजनीतिक दृष्टि से यह घटना सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव को और गहरा कर सकती है, जो आने वाले दिनों में संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर उभर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल उठता है कि क्या प्रदर्शन में 'सड़क-स्तर की हिंसा' को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि इस विरोध-प्रदर्शन का केंद्र SIR जैसा संवैधानिक महत्व का मुद्दा है — ऐसे में हिंसा की आड़ में मूल मुद्दे से ध्यान हटाना दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है। एफआईआर की जाँच निष्पक्ष और त्वरित हो — यही एकमात्र रास्ता है जो इस घटना को राजनीतिक प्रदर्शनी बनने से रोक सकता है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिसकर्मियों पर हमला कब और कहाँ हुआ?
यह हमला 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुआ। आकाशवाणी भवन के पास और अन्य स्थानों पर पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर लात-मुक्के मारे गए।
इंडिया ब्लॉक किस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहा था?
इंडिया ब्लॉक का यह विरोध-प्रदर्शन चुनाव आयोग के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान के खिलाफ था, जिसे विपक्ष मतदाता सूचियों में हेरफेर का जरिया बता रहा है। क्षेत्र में धारा 163 लागू होने के बावजूद प्रदर्शन हुआ।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
दिल्ली पुलिस ने विपक्षी कार्यकर्ताओं द्वारा अपने कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट के मामले में कई एफआईआर दर्ज की हैं। जाँच जारी है।
महिला कॉन्स्टेबल सीमा के साथ क्या हुआ?
महिला कॉन्स्टेबल सीमा ने बताया कि आकाशवाणी भवन के पास विधायकों को हिरासत में लेते समय उनके साथ मारपीट हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें बाद में पता चला कि वे घायल हुई हैं।
हेड कांस्टेबल अहलावत ने हमले को 'सुनियोजित' क्यों बताया?
हेड कांस्टेबल भूपेंद्र अहलावत के अनुसार, हमलावर को भीड़ ने जानबूझकर छिपाया और गोलचक्कर के बीच वाले हरे-भरे इलाके में ले जाकर भागने का रास्ता दिया। इस व्यवस्थित तरीके के कारण उन्होंने इसे पूर्व-नियोजित करार दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले