'संसद चलो' मार्च हिंसा: दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस व पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों में एफआईआर दर्ज, 118 पुलिसकर्मी घायल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 21 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान भड़की हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पथराव, पुलिसकर्मियों पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है, जबकि अब तक करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है।
हिंसा का घटनाक्रम
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सोमवार को कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल स्थित रीगल सिनेमा के निकट प्रदर्शन हिंसक रूप ले गया। उपद्रवियों ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। इसके अलावा जनपथ इलाके में कई दुकानों को भी नुकसान पहुँचा, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल बन गया।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को बार-बार चेतावनी दी गई और कानूनी निर्देशों का पालन करने को कहा गया, लेकिन उन्होंने स्थान खाली करने से इनकार कर दिया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने लागू निषेधाज्ञा का जानबूझकर उल्लंघन किया और हिंसक रवैया अपनाया।
पुलिसकर्मियों पर हमले और नुकसान
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस हिंसा में 118 से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए हैं। घायलों में स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस और असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। कई महिला पुलिसकर्मी भी इस हिंसा में घायल हुई हैं।
पुलिस का कहना है कि उपद्रवियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया। इस हिंसा से कानून-व्यवस्था और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।
जाँच की दिशा: वीडियो फुटेज और डिजिटल सुराग
दिल्ली पुलिस की जाँच अब मुख्य रूप से 250 से अधिक वीडियो फुटेज पर केंद्रित है, जिनमें मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो, सीसीटीवी, ड्रोन कैमरों और पुलिस के बॉडी कैमरों की रिकॉर्डिंग शामिल हैं। इनके आधार पर हिंसा में शामिल उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।
पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि उपद्रवियों में किसी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है या नहीं। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि हिंसा में शामिल लोग पूर्व नियोजित तरीके से जंतर-मंतर पहुँचे थे या नहीं। जाँच एजेंसियाँ इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या व्हाट्सऐप या टेलीग्राम समूहों के ज़रिए लोगों को उकसाने या संगठित करने की कोशिश की गई थी।
हिरासत और एफआईआर की स्थिति
दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। कनॉट प्लेस थाने में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में भी अलग एफआईआर दर्ज है। हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में बड़े राजनीतिक मार्चों के दौरान हिंसा की घटनाएँ सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। आने वाले दिनों में वीडियो फुटेज के विश्लेषण के आधार पर और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना है।