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'संसद चलो' मार्च हिंसा: दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस व पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों में एफआईआर दर्ज, 118 पुलिसकर्मी घायल

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'संसद चलो' मार्च हिंसा: दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस व पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों में एफआईआर दर्ज, 118 पुलिसकर्मी घायल

सारांश

'संसद चलो' मार्च के दौरान नई दिल्ली में भड़की हिंसा में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए और 70 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए। दिल्ली पुलिस ने 250 से अधिक वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान शुरू की है और व्हाट्सऐप-टेलीग्राम के ज़रिए पूर्व नियोजित षड्यंत्र की भी जाँच हो रही है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 21 जुलाई को कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों में सीजेपी के 'संसद चलो' मार्च से जुड़ी हिंसा में एफआईआर दर्ज की।
हिंसा में 118 से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी और महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
अब तक करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है; उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस के पास 250 से अधिक वीडियो फुटेज — सीसीटीवी, ड्रोन और बॉडी कैमरे — उपलब्ध हैं, जिनसे उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।
जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगा रही हैं कि व्हाट्सऐप या टेलीग्राम समूहों के ज़रिए हिंसा की पूर्व योजना बनाई गई थी या नहीं।

नई दिल्ली में 21 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान भड़की हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पथराव, पुलिसकर्मियों पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है, जबकि अब तक करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है।

हिंसा का घटनाक्रम

दिल्ली पुलिस के अनुसार, सोमवार को कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल स्थित रीगल सिनेमा के निकट प्रदर्शन हिंसक रूप ले गया। उपद्रवियों ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। इसके अलावा जनपथ इलाके में कई दुकानों को भी नुकसान पहुँचा, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल बन गया।

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को बार-बार चेतावनी दी गई और कानूनी निर्देशों का पालन करने को कहा गया, लेकिन उन्होंने स्थान खाली करने से इनकार कर दिया। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने लागू निषेधाज्ञा का जानबूझकर उल्लंघन किया और हिंसक रवैया अपनाया।

पुलिसकर्मियों पर हमले और नुकसान

दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस हिंसा में 118 से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए हैं। घायलों में स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस और असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। कई महिला पुलिसकर्मी भी इस हिंसा में घायल हुई हैं।

पुलिस का कहना है कि उपद्रवियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया। इस हिंसा से कानून-व्यवस्था और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।

जाँच की दिशा: वीडियो फुटेज और डिजिटल सुराग

दिल्ली पुलिस की जाँच अब मुख्य रूप से 250 से अधिक वीडियो फुटेज पर केंद्रित है, जिनमें मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो, सीसीटीवी, ड्रोन कैमरों और पुलिस के बॉडी कैमरों की रिकॉर्डिंग शामिल हैं। इनके आधार पर हिंसा में शामिल उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि उपद्रवियों में किसी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है या नहीं। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि हिंसा में शामिल लोग पूर्व नियोजित तरीके से जंतर-मंतर पहुँचे थे या नहीं। जाँच एजेंसियाँ इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या व्हाट्सऐप या टेलीग्राम समूहों के ज़रिए लोगों को उकसाने या संगठित करने की कोशिश की गई थी।

हिरासत और एफआईआर की स्थिति

दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। कनॉट प्लेस थाने में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में भी अलग एफआईआर दर्ज है। हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में बड़े राजनीतिक मार्चों के दौरान हिंसा की घटनाएँ सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। आने वाले दिनों में वीडियो फुटेज के विश्लेषण के आधार पर और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर इसे राजनीतिक असहमति को दबाने के औज़ार के रूप में इस्तेमाल न किया जाए — यह सुनिश्चित करना भी उतना ही ज़रूरी है। 250 वीडियो फुटेज की पारदर्शी जाँच और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया ही इस मामले में जवाबदेही तय कर सकती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'संसद चलो' मार्च में हिंसा कहाँ और कैसे हुई?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 21 जुलाई को कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल स्थित रीगल सिनेमा के पास प्रदर्शन हिंसक हो गया। उपद्रवियों ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की, पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और जनपथ इलाके में दुकानों को नुकसान पहुँचाया।
हिंसा में कितने पुलिसकर्मी घायल हुए?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 118 से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए हैं। घायलों में स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस ने अब तक कितने लोगों को हिरासत में लिया है?
दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस जाँच में किन सुरागों का उपयोग किया जा रहा है?
जाँच मुख्य रूप से 250 से अधिक वीडियो फुटेज पर आधारित है, जिनमें सीसीटीवी, ड्रोन कैमरे, पुलिस बॉडी कैमरे और मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग शामिल हैं। इसके अलावा व्हाट्सऐप और टेलीग्राम समूहों के ज़रिए पूर्व नियोजित षड्यंत्र की भी जाँच की जा रही है।
कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों में किन आरोपों में एफआईआर दर्ज हुई है?
दोनों थानों में पथराव, पुलिसकर्मियों पर हमले, पुलिस बैरिकेड तोड़ने के प्रयास और सरकारी व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। कनॉट प्लेस थाने में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ मामला दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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