सीजेपी प्रदर्शन हिंसा: दिल्ली पुलिस ने 5 एफआईआर दर्ज कीं, वीडियो फुटेज से आरोपियों की शिनाख्त जारी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और सरकारी कार्य में बाधा के सिलसिले में अब तक 5 एफआईआर दर्ज कर ली हैं। 21 जुलाई को पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच आगे बढ़ने के साथ ज़रूरत पड़ने पर और मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं। फिलहाल वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान का काम जारी है।
कहाँ-कहाँ दर्ज हुईं एफआईआर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों सहित उन सभी इलाकों के संबंधित थानों में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं जहाँ प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाएँ हुईं। प्रत्येक एफआईआर उस क्षेत्र की घटनाओं से जुड़ी है जहाँ अपराध कथित तौर पर हुआ।
इनमें से एक एफआईआर संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने के मामले में दर्ज की गई है। एक अन्य एफआईआर उस कथित साजिश से संबंधित है जिसके तहत हिंसा की पूर्व-योजना बनाए जाने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान इस मामले से जुड़े कई अहम सबूत सामने आए हैं।
धाराएँ और कानूनी प्रावधान
पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में दर्ज एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, आर्म्स एक्ट, 1959 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम (पीडीपीपी एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
इन धाराओं में सरकारी आदेश की अवहेलना, सरकारी कार्य में बाधा, लोक सेवकों पर हमला, गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बनना, दंगा, सार्वजनिक व्यवस्था भंग करना, गंभीर नुकसान पहुँचाना, दूसरों के जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालना, साझा आपराधिक मंशा के तहत अपराध करना, आपराधिक साजिश, बिना वैध अनुमति हथियारों से जुड़े प्रावधान तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना शामिल हैं।
पुलिस की जांच रणनीति
दिल्ली पुलिस के अनुसार, घटनास्थल के वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर गैरकानूनी रूप से भीड़ इकट्ठा कर सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित किया, सरकारी कामकाज में रुकावट डाली, हिंसक गतिविधियों में हिस्सा लिया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।
आगे क्या होगा
पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच के विस्तार के साथ और एफआईआर दर्ज की जा सकती हैं। साक्ष्य संकलन पूरा होने के बाद गिरफ्तारियों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है। यह मामला संसद के निकट हुई हिंसा से जुड़ा होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी में है।