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सीजेपी प्रदर्शन हिंसा: दिल्ली पुलिस ने 5 एफआईआर दर्ज कीं, वीडियो फुटेज से आरोपियों की शिनाख्त जारी

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सीजेपी प्रदर्शन हिंसा: दिल्ली पुलिस ने 5 एफआईआर दर्ज कीं, वीडियो फुटेज से आरोपियों की शिनाख्त जारी

सारांश

सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस ने 5 एफआईआर दर्ज कीं — ड्रोन उड़ाने से लेकर हिंसा की साजिश तक। बीएनएस, आर्म्स एक्ट और पीडीपीपी एक्ट की धाराएँ लगाई गईं। वीडियो फुटेज और सीसीटीवी से आरोपियों की पहचान जारी है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने सीजेपी प्रदर्शन हिंसा के सिलसिले में अब तक 5 एफआईआर दर्ज की हैं।
मामले कनॉट प्लेस , पार्लियामेंट स्ट्रीट सहित कई थानों में दर्ज किए गए हैं।
एक एफआईआर संसद सत्र के दौरान बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने के मामले में दर्ज।
एक अन्य एफआईआर कथित हिंसा की साजिश से संबंधित है।
धाराएँ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 , आर्म्स एक्ट 1959 और पीडीपीपी एक्ट के तहत लगाई गई हैं।
जांच के विस्तार के साथ और एफआईआर दर्ज होने की संभावना।

दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और सरकारी कार्य में बाधा के सिलसिले में अब तक 5 एफआईआर दर्ज कर ली हैं। 21 जुलाई को पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच आगे बढ़ने के साथ ज़रूरत पड़ने पर और मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं। फिलहाल वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान का काम जारी है।

कहाँ-कहाँ दर्ज हुईं एफआईआर

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट थानों सहित उन सभी इलाकों के संबंधित थानों में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं जहाँ प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाएँ हुईं। प्रत्येक एफआईआर उस क्षेत्र की घटनाओं से जुड़ी है जहाँ अपराध कथित तौर पर हुआ।

इनमें से एक एफआईआर संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने के मामले में दर्ज की गई है। एक अन्य एफआईआर उस कथित साजिश से संबंधित है जिसके तहत हिंसा की पूर्व-योजना बनाए जाने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान इस मामले से जुड़े कई अहम सबूत सामने आए हैं।

धाराएँ और कानूनी प्रावधान

पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में दर्ज एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, आर्म्स एक्ट, 1959 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम (पीडीपीपी एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है।

इन धाराओं में सरकारी आदेश की अवहेलना, सरकारी कार्य में बाधा, लोक सेवकों पर हमला, गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बनना, दंगा, सार्वजनिक व्यवस्था भंग करना, गंभीर नुकसान पहुँचाना, दूसरों के जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालना, साझा आपराधिक मंशा के तहत अपराध करना, आपराधिक साजिश, बिना वैध अनुमति हथियारों से जुड़े प्रावधान तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना शामिल हैं।

पुलिस की जांच रणनीति

दिल्ली पुलिस के अनुसार, घटनास्थल के वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर गैरकानूनी रूप से भीड़ इकट्ठा कर सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित किया, सरकारी कामकाज में रुकावट डाली, हिंसक गतिविधियों में हिस्सा लिया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।

आगे क्या होगा

पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच के विस्तार के साथ और एफआईआर दर्ज की जा सकती हैं। साक्ष्य संकलन पूरा होने के बाद गिरफ्तारियों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है। यह मामला संसद के निकट हुई हिंसा से जुड़ा होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुरक्षा-प्रोटोकॉल की गंभीर चूक की ओर इशारा करती हैं। पाँच अलग-अलग एफआईआर और 'साजिश' की धारा का समावेश बताता है कि पुलिस इसे सुनियोजित घटना मान रही है — जो अदालत में साबित करना जटिल होगा। वीडियो-आधारित पहचान तकनीकी रूप से मजबूत साक्ष्य है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता और आरोपियों के अधिकारों का संतुलन भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी प्रदर्शन हिंसा में दिल्ली पुलिस ने कितनी एफआईआर दर्ज की हैं?
दिल्ली पुलिस ने अब तक कुल 5 एफआईआर दर्ज की हैं। ये मामले कनॉट प्लेस, पार्लियामेंट स्ट्रीट और अन्य संबंधित थानों में दर्ज किए गए हैं। जांच आगे बढ़ने पर और एफआईआर दर्ज की जा सकती हैं।
इन एफआईआर में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, आर्म्स एक्ट 1959 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम (पीडीपीपी एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई हैं। इनमें दंगा, आपराधिक साजिश, लोक सेवकों पर हमला और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान जैसी धाराएँ शामिल हैं।
ड्रोन उड़ाने से जुड़ी एफआईआर किस मामले में दर्ज हुई?
संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली में बिना वैध अनुमति ड्रोन उड़ाने के मामले में एक अलग एफआईआर दर्ज की गई है। यह सुरक्षा उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला है।
पुलिस आरोपियों की पहचान कैसे कर रही है?
दिल्ली पुलिस घटनास्थल के वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की शिनाख्त कर रही है। पहचान पूरी होने के बाद कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हिंसा की साजिश वाली एफआईआर में क्या आरोप हैं?
पुलिस ने एक एफआईआर उस कथित साजिश को लेकर दर्ज की है जिसके तहत प्रदर्शन के दौरान हिंसा की पूर्व-योजना बनाए जाने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत सामने आए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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