दिल्ली पर्यावरण मंत्री सिरसा ने जिला मजिस्ट्रेटों को प्रदूषण हॉटस्पॉट चिह्नित करने के दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 26 जून 2025 को राजधानी के सभी जिला मजिस्ट्रेटों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें उन्होंने प्रदूषण के प्रमुख केंद्रों की पहचान करने और जिला स्तर पर समन्वित निवारण रणनीति तैयार करने का स्पष्ट निर्देश दिया। धूल प्रदूषण को नई दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता का प्रमुख कारण बताते हुए मंत्री ने कहा कि हर जिले में प्रदूषण स्रोतों की सक्रिय मैपिंग अनिवार्य है।
बैठक में क्या तय हुआ
बैठक में सात प्रमुख कार्यबिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया — प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान, यातायात प्रबंधन में सुधार, धूल नियंत्रण उपायों को मजबूत करना, अतिक्रमण हटाना, सार्वजनिक पार्कों का रखरखाव, प्रदूषणकारी उद्योगों की निगरानी और सभी संबंधित विभागों के बीच सुचारू समन्वय।
सिरसा ने स्पष्ट किया कि चाहे क्षतिग्रस्त सड़कें हों, सक्रिय निर्माण स्थल हों या उपेक्षित सार्वजनिक स्थान — धूल के प्रत्येक स्रोत का समाधान परिणामोन्मुखी और समयबद्ध कार्रवाई के ज़रिए किया जाना चाहिए।
अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर
मंत्री ने जिला मजिस्ट्रेटों को दिल्ली पुलिस, यातायात पुलिस, दिल्ली नगर निगम (MCD), लोक निर्माण विभाग (PWD) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के साथ मिलकर अपने-अपने क्षेत्र में प्रदूषण स्रोतों का गहन मानचित्रण करने का निर्देश दिया।
सिरसा ने कहा, 'प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई एक सामूहिक प्रयास है। प्रत्येक हॉटस्पॉट प्रदूषण का एक स्रोत है, और इन्हें कम करने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सीधा सुधार होगा।'
औद्योगिक प्रदूषण पर सख्ती के संकेत
औद्योगिक प्रदूषण की समीक्षा करते हुए सिरसा ने DPCC के समन्वय से प्रदूषणकारी इकाइयों की पहचान करने और जहाँ आवश्यक हो, वहाँ नियामक कार्रवाई की सिफारिश करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार अनुपालन तंत्र को मजबूत कर रही है ताकि औद्योगिक इकाइयाँ पर्यावरण मानकों का कड़ाई से पालन करें।
AQI निगरानी ढाँचे का विस्तार
सिरसा ने बैठक में यह भी बताया कि दिल्ली सरकार पूरे शहर में AQI सेंसर लगाने की पहल के तहत वायु गुणवत्ता निगरानी ढाँचे को उन्नत कर रही है। आधिकारिक बयान के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेटों से समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और समीक्षा बैठकों में भाग लेने की अपेक्षा की गई है। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त चारदीवारी या अपर्याप्त रखरखाव वाले पार्कों की व्यापक सूची तैयार करने का भी निर्देश दिया गया है ताकि जीर्णोद्धार कार्य समयबद्ध तरीके से हो सके।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली की वायु गुणवत्ता को लेकर सालाना गर्मी और मानसून-पूर्व धूल भरी आँधियों के बीच चिंताएँ बढ़ रही हैं। अब देखना यह होगा कि जिला स्तर पर यह रणनीति कितनी तेज़ी से ज़मीन पर उतरती है।