सेतुबंधासन: रीढ़ को मजबूत और मन को शांत करने वाला योगासन, जानें सही विधि और लाभ
सारांश
मुख्य बातें
सेतुबंधासन — जिसे अंग्रेज़ी में ब्रिज पोज़ कहते हैं — आधुनिक जीवन की भागदौड़ और बढ़ते मानसिक तनाव से राहत दिलाने वाला एक सरल, किंतु अत्यंत प्रभावशाली योगासन है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन का नियमित अभ्यास मानसिक तनाव और अवसाद को कम करने, रीढ़ की हड्डी को सुदृढ़ बनाने तथा शरीर को ऊर्जावान रखने में सहायक है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोज़ाना मात्र कुछ मिनट इस आसन को करने से शारीरिक और मानसिक, दोनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं।
सेतुबंधासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन तंत्र की कार्यक्षमता में सुधार लाता है। इसके साथ ही, यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में भी मददगार है, जिससे श्वास संबंधी समस्याओं में कमी आती है।
इस आसन का एक महत्त्वपूर्ण लाभ यह है कि यह थायराइड ग्रंथि को सक्रिय और संतुलित करता है, जिससे हार्मोन-जनित विकारों का जोखिम घटता है। गौरतलब है कि थायराइड असंतुलन आज भारत में करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है, ऐसे में यह आसन विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
मानसिक थकान या तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए सेतुबंधासन एक सुलभ उपाय है। यह आसन दिमाग को शांत करता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार लाता है। नियमित अभ्यास से दिनभर ताज़गी और हल्कापन बना रहता है।
यह ऐसे समय में आया है जब शहरी भारत में अनिद्रा और मानसिक तनाव की दर लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना किसी उपकरण या विशेष स्थान की ज़रूरत के किया जा सकने वाला यह आसन जन-सामान्य के लिए अत्यंत व्यावहारिक है।
महिलाओं के लिए विशेष लाभ
सेतुबंधासन महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है। यह मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में राहत देता है और शरीर में खिंचाव व आराम का अनुभव कराता है। मेनोपॉज के दौरान होने वाले तनाव, गर्मी लगने और मूड स्विंग को शांत करने में भी यह आसन सहायक बताया जाता है। हार्मोन संतुलन बनाए रखने में इसकी भूमिका को विशेषज्ञ महत्त्वपूर्ण मानते हैं।
सावधानियाँ और किसे नहीं करना चाहिए
हालाँकि यह आसन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, किंतु कुछ परिस्थितियों में सावधानी आवश्यक है। यदि किसी की गर्दन, कंधे या रीढ़ की हड्डी में ताज़ा या गंभीर चोट है, तो यह आसन दबाव बढ़ा सकता है। इसी प्रकार, रीढ़ में अत्यधिक जकड़न या गंभीर विकार होने पर बिना योग विशेषज्ञ की सलाह के इसे नहीं करना चाहिए।
आगे चलकर, जैसे-जैसे कार्यस्थल और स्कूल स्तर पर योग को बढ़ावा दिया जा रहा है, सेतुबंधासन जैसे सरल आसन देश की सामूहिक स्वास्थ्य नींव को और मजबूत बना सकते हैं।