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सेतुबंधासन: रीढ़ को मजबूत और मन को शांत करने वाला योगासन, जानें सही विधि और लाभ

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सेतुबंधासन: रीढ़ को मजबूत और मन को शांत करने वाला योगासन, जानें सही विधि और लाभ

सारांश

भागदौड़ भरी ज़िंदगी में तनाव और थकान से बचना है? सेतुबंधासन एक ऐसा योगासन है जो रीढ़ को सुदृढ़ करता है, थायराइड को संतुलित रखता है और मन को शांति देता है — आयुष मंत्रालय भी इसकी सिफारिश करता है।

मुख्य बातें

सेतुबंधासन को ब्रिज पोज़ भी कहते हैं; यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने और मानसिक तनाव कम करने में सहायक है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन अवसाद, मानसिक थकान और अनिद्रा में राहत देता है।
पेट की मांसपेशियाँ, फेफड़े और थायराइड ग्रंथि — तीनों इस आसन से लाभान्वित होते हैं।
महिलाओं को मासिक धर्म और मेनोपॉज के दौरान विशेष राहत मिलती है।
गर्दन, कंधे या रीढ़ में ताज़ा चोट होने पर योग विशेषज्ञ की सलाह के बिना यह आसन न करें।

सेतुबंधासन — जिसे अंग्रेज़ी में ब्रिज पोज़ कहते हैं — आधुनिक जीवन की भागदौड़ और बढ़ते मानसिक तनाव से राहत दिलाने वाला एक सरल, किंतु अत्यंत प्रभावशाली योगासन है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन का नियमित अभ्यास मानसिक तनाव और अवसाद को कम करने, रीढ़ की हड्डी को सुदृढ़ बनाने तथा शरीर को ऊर्जावान रखने में सहायक है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोज़ाना मात्र कुछ मिनट इस आसन को करने से शारीरिक और मानसिक, दोनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं।

सेतुबंधासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन तंत्र की कार्यक्षमता में सुधार लाता है। इसके साथ ही, यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में भी मददगार है, जिससे श्वास संबंधी समस्याओं में कमी आती है।

इस आसन का एक महत्त्वपूर्ण लाभ यह है कि यह थायराइड ग्रंथि को सक्रिय और संतुलित करता है, जिससे हार्मोन-जनित विकारों का जोखिम घटता है। गौरतलब है कि थायराइड असंतुलन आज भारत में करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है, ऐसे में यह आसन विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

मानसिक थकान या तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए सेतुबंधासन एक सुलभ उपाय है। यह आसन दिमाग को शांत करता है और नींद की गुणवत्ता में सुधार लाता है। नियमित अभ्यास से दिनभर ताज़गी और हल्कापन बना रहता है।

यह ऐसे समय में आया है जब शहरी भारत में अनिद्रा और मानसिक तनाव की दर लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना किसी उपकरण या विशेष स्थान की ज़रूरत के किया जा सकने वाला यह आसन जन-सामान्य के लिए अत्यंत व्यावहारिक है।

महिलाओं के लिए विशेष लाभ

सेतुबंधासन महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है। यह मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में राहत देता है और शरीर में खिंचाव व आराम का अनुभव कराता है। मेनोपॉज के दौरान होने वाले तनाव, गर्मी लगने और मूड स्विंग को शांत करने में भी यह आसन सहायक बताया जाता है। हार्मोन संतुलन बनाए रखने में इसकी भूमिका को विशेषज्ञ महत्त्वपूर्ण मानते हैं।

सावधानियाँ और किसे नहीं करना चाहिए

हालाँकि यह आसन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, किंतु कुछ परिस्थितियों में सावधानी आवश्यक है। यदि किसी की गर्दन, कंधे या रीढ़ की हड्डी में ताज़ा या गंभीर चोट है, तो यह आसन दबाव बढ़ा सकता है। इसी प्रकार, रीढ़ में अत्यधिक जकड़न या गंभीर विकार होने पर बिना योग विशेषज्ञ की सलाह के इसे नहीं करना चाहिए।

आगे चलकर, जैसे-जैसे कार्यस्थल और स्कूल स्तर पर योग को बढ़ावा दिया जा रहा है, सेतुबंधासन जैसे सरल आसन देश की सामूहिक स्वास्थ्य नींव को और मजबूत बना सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि अधिकांश दावे अभी भी मुख्यतः परंपरागत ज्ञान पर आधारित हैं — बड़े पैमाने पर नैदानिक शोध सीमित है। थायराइड संतुलन और हार्मोन नियंत्रण जैसे दावों को स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययनों से और पुष्टि की ज़रूरत है। भारत में योग का प्रचार-प्रसार सराहनीय है, पर जब तक साक्ष्य-आधारित दिशानिर्देश नहीं बनते, तब तक इसे चिकित्सा विकल्प नहीं, पूरक अभ्यास के रूप में देखना उचित होगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेतुबंधासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
सेतुबंधासन एक योगासन है जिसमें पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ते हुए कमर और कूल्हों को ज़मीन से ऊपर उठाया जाता है, जिससे शरीर सेतु (पुल) जैसा आकार लेता है। इसे ब्रिज पोज़ भी कहा जाता है और यह रीढ़, पेट व फेफड़ों को एक साथ सक्रिय करता है।
सेतुबंधासन के मुख्य फायदे क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन मानसिक तनाव और अवसाद को कम करता है, रीढ़ को मजबूत बनाता है, पाचन में सुधार लाता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और थायराइड ग्रंथि को संतुलित रखता है। नियमित अभ्यास से नींद भी बेहतर होती है।
महिलाओं के लिए सेतुबंधासन कितना उपयोगी है?
यह आसन महिलाओं को मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में राहत देता है और मेनोपॉज के दौरान होने वाले तनाव, गर्मी लगने तथा मूड स्विंग को शांत करने में सहायक बताया गया है। हार्मोन संतुलन बनाए रखने में भी इसकी भूमिका मानी जाती है।
सेतुबंधासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
जिन लोगों की गर्दन, कंधे या रीढ़ की हड्डी में ताज़ा या गंभीर चोट हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे दबाव बढ़ सकता है। रीढ़ में अत्यधिक जकड़न या गंभीर विकार की स्थिति में भी योग विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य है।
सेतुबंधासन से मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
यह आसन दिमाग को शांत करता है और मानसिक थकान में राहत देता है। नियमित अभ्यास से नींद की गुणवत्ता सुधरती है और दिनभर ताज़गी बनी रहती है, जिससे यह तनावग्रस्त जीवनशैली में एक व्यावहारिक पूरक उपाय बनता है।
राष्ट्र प्रेस
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