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सेतु बंध सर्वांगासन: पीठ दर्द, तनाव और हार्मोनल असंतुलन से राहत दिलाए यह योगासन

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सेतु बंध सर्वांगासन: पीठ दर्द, तनाव और हार्मोनल असंतुलन से राहत दिलाए यह योगासन

सारांश

आधुनिक जीवनशैली में पीठ दर्द और तनाव आम समस्याएँ बन चुकी हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, सेतु बंध सर्वांगासन — जिसे ब्रिज पोज भी कहते हैं — इन दोनों समस्याओं का एक सरल और प्रभावी समाधान है। रोज़ाना मात्र 30 से 60 सेकंड के अभ्यास से पीठ, थायरॉइड और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार संभव है।

मुख्य बातें

सेतु बंध सर्वांगासन (ब्रिज पोज) को आयुष मंत्रालय एक शक्तिशाली योगासन मानता है जो छाती, पीठ और मन तीनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
नियमित अभ्यास से कमर दर्द , पीठ की जकड़न और हार्मोनल असंतुलन में राहत मिलती है।
यह आसन थायरॉइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है और तनाव व अवसाद के लक्षणों को कम करने में सहायक है।
इस स्थिति में 30 से 60 सेकंड तक रुकें; समस्त भार कंधों, भुजाओं और पैरों पर रखें।
गर्दन या पीठ में गंभीर चोट होने पर इस आसन से बचें और विशेषज्ञ से परामर्श लें।

सेतु बंध सर्वांगासन (ब्रिज पोज) उन लोगों के लिए एक प्रभावी योगाभ्यास है जो पीठ की जकड़न, कमर दर्द और आधुनिक जीवनशैली से उपजे तनाव से जूझ रहे हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन छाती को खोलता है, पीठ को मज़बूत बनाता है और मन को शांत करता है। गलत बैठने की मुद्रा और लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने की आदत ने इस आसन की प्रासंगिकता आज के दौर में और बढ़ा दी है।

सेतु बंध सर्वांगासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा

संस्कृत में 'सेतु' का अर्थ है पुल, 'बंध' का अर्थ है बंधन या निर्माण, और 'सर्वांगासन' का तात्पर्य पूरे शरीर से संबंधित आसन से है। जब इस आसन में शरीर को ऊपर उठाया जाता है तो वह एक पुल की आकृति धारण करता है — इसीलिए इसे यह नाम मिला। आयुष मंत्रालय इसे एक शक्तिशाली योगासन की श्रेणी में रखता है।

स्वास्थ्य पर प्रमुख लाभ

नियमित अभ्यास से कमर दर्द और पीठ के निचले हिस्से की जकड़न में उल्लेखनीय कमी आती है। यह थायरॉइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है, जिससे हार्मोनल संतुलन बेहतर होता है। तनाव और अवसाद के लक्षणों को कम करने में भी यह सहायक माना जाता है। इसके अतिरिक्त, पाचन तंत्र को सुचारु रखने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में भी इसकी भूमिका बताई जाती है। महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम करने में भी यह आसन प्रभावी माना जाता है।

सही विधि: कदम-दर-कदम अभ्यास

सबसे पहले पीठ के बल सीधे लेट जाएँ और दोनों हाथ शरीर के बगल में, हथेलियाँ ज़मीन की ओर रखें। अब दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें और एड़ियाँ कूल्हों के निकट ले आएँ ताकि पाँव ज़मीन पर सपाट टिके रहें।

सांस अंदर लेते हुए कूल्हों, कमर और पीठ के निचले हिस्से को धीरे-धीरे ऊपर उठाएँ। चाहें तो दोनों हाथों की उँगलियों को ज़मीन पर आपस में इंटरलॉक करें और कंधों को थोड़ा अंदर की ओर खिसकाएँ — अथवा हाथों से टखनों को पकड़ें। ठुड्डी को सीने से छूने का प्रयास करें। समस्त भार कंधों, भुजाओं और पैरों पर केंद्रित रहे।

इस स्थिति में सामान्य रूप से साँस लेते हुए 30 से 60 सेकंड तक रुकें। तत्पश्चात साँस छोड़ते हुए पीठ और कमर को धीरे-धीरे वापस ज़मीन पर टिकाएँ।

सावधानियाँ और किसे बचना चाहिए

यदि गर्दन या पीठ में कोई गंभीर चोट अथवा पुरानी समस्या है, तो इस आसन का अभ्यास करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। बिना मार्गदर्शन के अत्यधिक ऊँचाई तक कूल्हे उठाने से गर्दन पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।

आगे का मार्ग

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस आसन को सुबह खाली पेट करना सबसे लाभकारी रहता है। शुरुआती अभ्यासकर्ता पहले 2 से 3 दोहराव से आरंभ कर सकते हैं और धीरे-धीरे अवधि बढ़ा सकते हैं। नियमित योगाभ्यास को समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन का हिस्सा बनाना दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि अधिकांश दावे नैदानिक परीक्षणों के बजाय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हैं। भारत में पीठ दर्द की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है — विशेषकर वर्क-फ्रॉम-होम संस्कृति के बाद — और योग इसका एक सुलभ व सस्ता विकल्प है। किंतु मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं बताती कि थायरॉइड या हार्मोनल दावों के लिए पर्याप्त peer-reviewed साक्ष्य अभी सीमित हैं। पाठकों को योग को पूरक उपाय के रूप में अपनाना चाहिए, न कि चिकित्सकीय उपचार के विकल्प के रूप में।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेतु बंध सर्वांगासन क्या है और इसे ब्रिज पोज क्यों कहते हैं?
सेतु बंध सर्वांगासन एक योगासन है जिसमें शरीर पुल की आकृति धारण करता है — इसीलिए इसे ब्रिज पोज कहते हैं। 'सेतु' का अर्थ पुल, 'बंध' का अर्थ निर्माण और 'सर्वांगासन' का अर्थ पूरे शरीर से संबंधित आसन है। आयुष मंत्रालय इसे छाती, पीठ और मन तीनों के लिए लाभकारी मानता है।
सेतु बंध सर्वांगासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
इस आसन के नियमित अभ्यास से कमर दर्द और पीठ के निचले हिस्से की जकड़न कम होती है। यह थायरॉइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है, तनाव और अवसाद घटाता है, पाचन और रक्त संचार बेहतर करता है, और महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में भी राहत देता है।
सेतु बंध सर्वांगासन सही तरीके से कैसे करें?
पीठ के बल लेटकर घुटने मोड़ें और एड़ियाँ कूल्हों के पास रखें। साँस अंदर लेते हुए कूल्हों और पीठ को धीरे-धीरे ऊपर उठाएँ, हाथों को इंटरलॉक करें या टखने पकड़ें। ठुड्डी सीने से छूने का प्रयास करें और 30 से 60 सेकंड तक रुककर साँस छोड़ते हुए वापस आएँ।
किन लोगों को सेतु बंध सर्वांगासन नहीं करना चाहिए?
जिन लोगों की गर्दन या पीठ में कोई गंभीर चोट या पुरानी समस्या हो, उन्हें यह आसन करने से बचना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों को पहले किसी योग्य चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
सेतु बंध सर्वांगासन कब और कितनी बार करना चाहिए?
विशेषज्ञ इसे सुबह खाली पेट करने की सलाह देते हैं। शुरुआती अभ्यासकर्ता 2 से 3 दोहराव से शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे अवधि व दोहराव बढ़ा सकते हैं। प्रत्येक बार 30 से 60 सेकंड तक इस स्थिति में रहना पर्याप्त माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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