28 जुलाई 2026
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तेजस्वी यादव युवाओं को गुमराह करना बंद करें: संतोष कुमार सुमन का नीट पेंशन वादे पर पलटवार

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तेजस्वी यादव युवाओं को गुमराह करना बंद करें: संतोष कुमार सुमन का नीट पेंशन वादे पर पलटवार

सारांश

नीट आंदोलन के छात्रों को पेंशन देने के तेजस्वी यादव के वादे पर HAM अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने पलटवार किया — सवाल उठाया कि संकट के वक्त तेजस्वी कहाँ थे? जेपी पेंशन की विरासत नीतीश सरकार की है, लालू राज की नहीं — यह याद दिलाना बिहार की चुनावी राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है।

मुख्य बातें

संतोष कुमार सुमन ने 28 जुलाई को तेजस्वी यादव के नीट छात्रों को पेंशन देने के वादे को 'चुनावी राजनीति' करार दिया।
सुमन ने सवाल किया कि नीट आंदोलन के दौरान तेजस्वी छात्रों के साथ सड़क पर क्यों नहीं उतरे।
बिहार सरकार नीट आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज केस पहले ही वापस ले चुकी है।
जेपी सेनानी सम्मान पेंशन की व्यवस्था मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने लागू की थी, लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में नहीं।
तेजस्वी यादव ने कहा था कि सत्ता में आने पर नीट आंदोलन के गिरफ्तार छात्रों के लिए पेंशन पर विचार होगा।

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने 28 जुलाई को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नीट आंदोलन से जुड़े छात्रों को सरकारी नौकरी और पेंशन देने का तेजस्वी का वादा महज चुनावी राजनीति है, न कि युवाओं के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता।

मुख्य आरोप: संकट में साथ न देना

डॉ. सुमन ने सवाल उठाया कि जब छात्र अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे, उस कठिन दौर में तेजस्वी यादव उनके साथ क्यों नहीं खड़े हुए। उन्होंने कहा कि असली नेतृत्व की पहचान मुश्किल घड़ी में साथ देने से होती है, न कि चुनाव की आहट सुनते ही बड़े-बड़े वादों की झड़ी लगाने से।

बिहार सरकार की कार्रवाई वापसी का संदर्भ

बिहार सरकार ने नीट आंदोलन से जुड़े मामलों में दर्ज केसों को वापस लेने का निर्णय पहले ही ले लिया है। डॉ. सुमन के अनुसार, ऐसे में विपक्ष का यह कदम केवल राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की भावनाओं को वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल करना अनुचित है।

जेपी आंदोलन की विरासत पर विवाद

डॉ. सुमन ने तेजस्वी यादव को याद दिलाया कि जेपी सेनानी सम्मान पेंशन की जिस परंपरा का हवाला देकर नई घोषणाएं की जा रही हैं, वह व्यवस्था मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने लागू की थी — लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में नहीं। उन्होंने कहा कि इतिहास के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना राजनीतिक बेईमानी है।

तेजस्वी का वादा क्या था

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने कहा था कि यदि भविष्य में उनकी सरकार बनती है, तो नीट आंदोलन के दौरान गिरफ्तार छात्रों के लिए जेपी आंदोलन के प्रतिभागियों की तर्ज पर पेंशन देने पर विचार किया जाएगा। इसी वादे को डॉ. सुमन ने 'खोखली घोषणा' करार दिया।

बिहार के युवा और राजनीतिक जागरूकता

डॉ. सुमन ने कहा कि लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की जोड़ी वर्षों से युवाओं को झूठे सपने दिखाकर राजनीति करती रही है। उनके अनुसार, अब बिहार का युवा जागरूक हो चुका है और वह केवल घोषणाओं के आधार पर नहीं, बल्कि काम, विश्वसनीयता और जनहित में लिए गए निर्णयों के आधार पर नेतृत्व का मूल्यांकन करेगा। आने वाले समय में यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बिहार की चुनावी रणनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी व्यावहारिकता संदिग्ध है — क्योंकि जेपी पेंशन एक संवैधानिक आंदोलन की मान्यता थी, जबकि नीट विरोध का कानूनी और नैतिक दर्जा अभी विवादास्पद है। डॉ. सुमन का यह पलटवार केवल बचाव नहीं, बल्कि NDA गठबंधन की उस रणनीति का हिस्सा है जो बिहार में युवा मतदाताओं को RJD के प्रभाव से दूर रखना चाहती है। असली सवाल यह है कि नीट आंदोलन के बाद बिहार में छात्र राजनीति किस दिशा में जाएगी — और क्या कोई दल उनकी माँगों को ठोस नीति में बदलने की इच्छाशक्ति दिखाएगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. संतोष कुमार सुमन ने तेजस्वी यादव पर क्या आरोप लगाए?
डॉ. सुमन ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव नीट आंदोलन के छात्रों को पेंशन देने का वादा केवल चुनावी राजनीति के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब छात्र सड़कों पर थे, तब तेजस्वी उनके साथ नहीं खड़े हुए।
तेजस्वी यादव ने नीट छात्रों के लिए क्या वादा किया था?
तेजस्वी यादव ने कहा था कि यदि भविष्य में उनकी सरकार बनती है, तो नीट आंदोलन के दौरान गिरफ्तार छात्रों के लिए जेपी आंदोलन के प्रतिभागियों की तर्ज पर पेंशन देने पर विचार किया जाएगा।
जेपी सेनानी पेंशन किसने शुरू की थी?
डॉ. सुमन के अनुसार, जेपी सेनानी सम्मान पेंशन की व्यवस्था मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने लागू की थी, न कि लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में। उन्होंने कहा कि इस विरासत का श्रेय गलत तरीके से लेना इतिहास के साथ छेड़छाड़ है।
बिहार सरकार ने नीट आंदोलन के मामलों में क्या कदम उठाया?
बिहार सरकार ने नीट आंदोलन से जुड़े दर्ज मामलों में कार्रवाई वापस लेने का निर्णय ले लिया है। डॉ. सुमन ने इसे सरकार की सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इसके बाद विपक्ष का छात्र मुद्दा भुनाना केवल राजनीतिक अवसरवाद है।
इस विवाद का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह आरोप-प्रत्यारोप बिहार में युवा मतदाताओं को साधने की होड़ को दर्शाता है। NDA और RJD दोनों नीट आंदोलन के बाद सक्रिय हुए छात्र वर्ग को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं, जो आगामी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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