26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तेजस्वी यादव का बिहार सरकार पर बड़ा आरोप: पेंशन के लिए आकस्मिक निधि से ₹3,662 करोड़ की निकासी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तेजस्वी यादव का बिहार सरकार पर बड़ा आरोप: पेंशन के लिए आकस्मिक निधि से ₹3,662 करोड़ की निकासी

सारांश

बिहार में पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिक निधि से ₹3,662 करोड़ की निकासी पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार को घेरा। वेतन, ठेकेदार भुगतान और विकास योजनाओं के ठप होने के आरोपों के साथ यह राजनीतिक हमला चुनावी वर्ष में बिहार की आर्थिक नीतियों को केंद्र में ला रहा है।

मुख्य बातें

बिहार मंत्रिमंडल ने मई, जून और जुलाई की सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए बिहार आकस्मिक निधि से ₹3,662 करोड़ निकालने की मंजूरी दी।
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इसे राज्य के गंभीर वित्तीय संकट का प्रमाण बताया और एनडीए सरकार पर 'जनविरोधी' नीतियों का आरोप लगाया।
राजद के अनुसार, कर्मचारियों के वेतन-पेंशन का भुगतान कई महीनों से और ठेकेदारों का भुगतान एक साल से अधिक समय से लंबित है।
वित्त वर्ष 2023-24 में स्वीकृत विकास परियोजनाएँ अभी तक शुरू नहीं हुई हैं; बिहार राज्य फसल सहायता योजना बंद होने का आरोप।
बिजली कटौती, छात्रवृत्ति में देरी और छात्र क्रेडिट कार्ड योजना के ठप होने के भी आरोप लगाए गए।

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार, 10 जून को आरोप लगाया कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में बिहार गंभीर वित्तीय संकट की ओर धकेला जा रहा है। यह आरोप उस समय आया जब बिहार मंत्रिमंडल ने मई, जून और जुलाई महीनों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान हेतु बिहार आकस्मिक निधि से ₹3,662 करोड़ निकालने की मंजूरी दी।

आकस्मिक निधि का उपयोग और विवाद

आकस्मिक निधि का उपयोग सामान्यतः प्राकृतिक आपदाओं, आपात स्थितियों या अप्रत्याशित वित्तीय संकटों से निपटने के लिए किया जाता है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने इस फैसले को राज्य की बिगड़ती वित्तीय सेहत का प्रमाण बताते हुए कहा, 'बिहार का वित्तीय संकट इतना गंभीर हो गया है कि राज्य सरकार को पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिक निधि से ₹3,662 करोड़ निकालने पड़े हैं — आप कल्पना कर सकते हैं कि स्थिति कितनी चिंताजनक और खतरनाक हो गई है।'

गौरतलब है कि पेंशन जैसे नियमित सामाजिक व्यय के लिए आकस्मिक निधि पर निर्भरता असामान्य मानी जाती है, क्योंकि यह मद सामान्य बजटीय प्रावधान के अंतर्गत आती है।

वेतन, पेंशन और ठेकेदारों के भुगतान पर आरोप

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सरकारी खजाने में कमी के कारण राज्य में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन संबंधी भुगतान कई महीनों से लंबित हैं। उनके अनुसार, ठेकेदारों को एक साल से अधिक समय से भुगतान नहीं किया गया है। राजद नेता ने कहा कि वे पिछले छह महीनों से लगातार यह मुद्दा उठाते रहे हैं, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

विकास योजनाएँ और कल्याणकारी पहलें ठप

तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि वित्त वर्ष 2023-24 में स्वीकृत विकास परियोजनाएँ अब तक शुरू नहीं हुई हैं, जबकि हाल में घोषित कई योजनाएँ केवल कागज़ों तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में बार-बार बिजली कटौती हो रही है, छात्रवृत्ति वितरण में देरी हो रही है और छात्र क्रेडिट कार्ड योजना ठप पड़ी है।

विपक्षी नेता ने यह भी दावा किया कि राज्य मंत्रिमंडल ने निधि की कमी के कारण बिहार राज्य फसल सहायता योजना बंद कर दी है, जिससे किसान सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

'डबल इंजन' सरकार पर निशाना

राजद नेता ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट के माध्यम से 'डबल इंजन' सरकार की आलोचना करते हुए उस पर 'जनविरोधी' और 'कॉर्पोरेट समर्थक' नीतियाँ लागू करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इन नीतियों ने राज्य को आर्थिक संकट में धकेल दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के अंत तक विधानसभा चुनाव अपेक्षित हैं और विपक्ष सरकार की आर्थिक कार्यप्रणाली को केंद्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश में है।

आगे क्या

एनडीए सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बिहार की वित्तीय स्थिति और आकस्मिक निधि के उपयोग पर विधानसभा में और तीखी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹3,662 करोड़ की यह निकासी एक सार्वजनिक दस्तावेज़ी तथ्य है जिसे सरकार को स्पष्ट करना होगा। बिहार जैसे राज्य में, जहाँ केंद्रीय हस्तांतरण पर निर्भरता पहले से अधिक है, आकस्मिक निधि का नियमित खर्चों में इस्तेमाल राजकोषीय अनुशासन की दृष्टि से चिंताजनक संकेत है। एनडीए सरकार का मौन इस विवाद को और गहरा करता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार आकस्मिक निधि से ₹3,662 करोड़ क्यों निकाले गए?
बिहार मंत्रिमंडल ने मई, जून और जुलाई महीनों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान करने के लिए बिहार आकस्मिक निधि से ₹3,662 करोड़ निकालने की मंजूरी दी। आकस्मिक निधि सामान्यतः अप्रत्याशित आपात खर्चों के लिए होती है, न कि नियमित पेंशन भुगतान के लिए।
तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर क्या-क्या आरोप लगाए?
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का भुगतान कई महीनों से लंबित है, ठेकेदारों को एक साल से अधिक समय से भुगतान नहीं हुआ, वित्त वर्ष 2023-24 की विकास परियोजनाएँ शुरू नहीं हुईं, और बिहार राज्य फसल सहायता योजना बंद कर दी गई। उन्होंने 'डबल इंजन' सरकार पर 'जनविरोधी' नीतियों का भी आरोप लगाया।
बिहार राज्य फसल सहायता योजना क्यों बंद हुई?
तेजस्वी यादव के अनुसार, राज्य मंत्रिमंडल ने निधि की कमी के कारण बिहार राज्य फसल सहायता योजना बंद कर दी है। हालाँकि, बिहार सरकार की ओर से इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
क्या बिहार सरकार ने इन आरोपों का जवाब दिया है?
रिपोर्टों के अनुसार, 10 जून तक एनडीए सरकार की ओर से तेजस्वी यादव के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मुद्दा विधानसभा में और तीखी बहस का रूप ले सकता है।
आकस्मिक निधि क्या होती है और इसका सामान्य उपयोग क्या है?
आकस्मिक निधि एक आरक्षित सरकारी कोष होता है जिसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं, आपात स्थितियों या अप्रत्याशित परिस्थितियों से उत्पन्न तत्काल खर्चों के लिए किया जाता है। पेंशन जैसे नियमित दायित्वों के लिए इसका उपयोग असामान्य माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 12 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले