तेजस्वी यादव का बड़ा आरोप: बिहार का राजकोषीय घाटा GSDP का 5.8%, कर्ज में चार गुना वृद्धि
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 21 अगस्त को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर एनडीए सरकार पर राज्य को वित्तीय संकट की ओर धकेलने का गंभीर आरोप लगाया। उनके दावे के अनुसार, बिहार का कुल सार्वजनिक ऋण चार गुना से अधिक बढ़ चुका है और वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा GSDP का 5.8 प्रतिशत रहा, जो कथित तौर पर देश के प्रमुख राज्यों में सर्वाधिक है।
मुख्य आरोप: खजाना खाली, कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में रिकॉर्ड कर्ज लेने के बावजूद सरकारी खजाना खाली है। उन्होंने सवाल उठाया कि 'बिहार का पैसा आखिर कहाँ जा रहा है?' — और इसे भ्रष्टाचार तथा कथित संगठित लूट से जोड़ा।
उनके अनुसार, राज्य की अपनी राजस्व प्राप्तियों और खर्च के बीच संतुलन नहीं है, जिससे सरकारी कर्मचारियों, पेंशनधारकों, ठेकेदारों और सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों को समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा।
छात्रों पर असर: स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और छात्रवृत्ति पर चोट
तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि घटाई गई है और छात्रवृत्ति योजनाएँ समाप्त की जा रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में युवाओं की बड़ी आबादी उच्च शिक्षा के लिए सरकारी सहायता पर निर्भर है।
राजकोषीय प्रबंधन पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनडीए सरकार की आर्थिक नीतियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार के पास व्यय प्रबंधन, ऋण प्रबंधन और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की कोई स्पष्ट दीर्घकालिक योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्व सृजन और संग्रह बढ़ाने तथा बजटीय प्रबंधन सुधारने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं अपनाई जा रही।
सरकार की प्रतिक्रिया
तेजस्वी यादव के इन आरोपों पर एनडीए सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में लगाए गए हैं जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में तेज हो रही हैं।
आम जनता पर असर
तेजस्वी ने जोर देकर कहा कि बिहार का वित्तीय संकट राज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए सामूहिक चिंता का विषय है। यदि उनके दावे सही हैं, तो विकास कार्यों में देरी, सामाजिक पेंशन में रुकावट और शिक्षा सहायता में कटौती का सीधा असर करोड़ों बिहारवासियों पर पड़ सकता है।