संजय राउत का BJP पर प्रहार: 'सत्ताधारी पार्टी ने खोया मानसिक संतुलन, 1942 के ब्रिटिश साम्राज्य जैसा हाल'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने 5 अक्टूबर 2026 को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने अपना मानसिक संतुलन पूरी तरह गँवा दिया है। राउत ने BJP की मौजूदा हालत की तुलना 1942 में ब्रिटिश साम्राज्य के पतन से ठीक पहले की घबराहट और हताशा से की — एक तीखा ऐतिहासिक रूपक जो सत्ता के संकट को रेखांकित करता है।
सुप्रीम कोर्ट और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल
राउत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है और यह स्पष्ट किया है कि लाखों नागरिकों का मतदान का अधिकार छीना जाना सर्वथा अनुचित है। उन्होंने दावा किया कि जनता के बढ़ते आक्रोश के सामने BJP का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।
राउत ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जनता में जो गुस्सा पनप रहा है, उससे केंद्रीय प्रतिष्ठान बुरी तरह सहमा हुआ है। उनके अनुसार, नई दिल्ली इन दिनों किसी सैन्य छावनी जैसी दिखती है, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आवासों के इर्द-गिर्द BSF और हथियारबंद जवान भारी तादाद में तैनात किए गए हैं।
फडणवीस के राजनीतिक भविष्य पर तंज
मुख्यमंत्री फडणवीस पर व्यंग्य कसते हुए राउत ने कहा कि विपक्ष उन्हें 'दिल्ली में भविष्य है' कहकर ऊर्जा देने की कोशिश करता है, लेकिन वे खुद को ही नुकसान पहुँचाते रहते हैं। राउत के अनुसार, जब फडणवीस यह समझेंगे कि लाखों लोगों का सड़कों पर उतरना महज शिकायत नहीं बल्कि एक क्रांति है, तभी वे वास्तविक राजनीतिक शीर्ष को छू पाएँगे।
मंत्री शेलार और 'गर्जना' बनाम 'हुआं-हुआं' विवाद
मंत्री आशीष शेलार की टिप्पणी का जवाब देते हुए राउत ने कहा — 'वे खुद सियार हैं, इसलिए उन्हें हर तरफ हुआं-हुआं ही सुनाई देता है। यह हुआं-हुआं नहीं थी, यह 'गर्जना' थी।' उन्होंने इसे चुनाव में हेरफेर के खिलाफ देश का अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बताया।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रव्यापी एकजुटता का दावा कर रहे हैं। राउत ने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता भी सड़कों पर उतर आए हैं, और देशभर की विपक्षी ताकतें संस्थागत ईमानदारी की कथित विफलता के विरुद्ध एकजुट हो रही हैं।
संसद मार्च और चुनाव आयोग को चुनौती
राउत ने घोषणा की कि देशभर के विपक्षी दल संसद के मकर द्वार पर एकत्र होंगे और ठोस साक्ष्य सौंपने के लिए सीधे चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। उन्होंने माँग की कि CEC ज्ञानेश कुमार जनता के सवालों का जवाब देने के लिए सामने आएँ, न कि छिपे रहें।
शिंदे और दल-बदल पर प्रहार
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की आलोचना करते हुए राउत ने कहा कि महाराष्ट्र सूखे और बढ़ते भ्रष्टाचार की चपेट में है, फिर भी उपमुख्यमंत्री दिल्ली में गृह मंत्री के आवास के लॉन में एक 'पेइंग गेस्ट' की तरह डेरा डाले हैं। उन्होंने इसे 'बेशर्मी की हद' करार दिया।
दल-बदल करने वाले विधायकों पर निशाना साधते हुए राउत ने कहा कि पैसे से सम्मान नहीं खरीदा जा सकता — '₹50 करोड़ या दो पुलिस एस्कॉर्ट गाड़ियाँ मिल सकती हैं, लेकिन जनता की भावनाएँ नहीं।' उन्होंने जोड़ा कि जब छात्र किसी को 'गद्दार' कहते हैं, तो वह लोगों की सच्ची आवाज़ होती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राउत के ये बयान महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक घमासान की पूर्व-सूचना हैं — जहाँ विपक्ष चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ गठबंधन दोनों को एक साथ घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।