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सेतुबंधासन: रोज़ाना 5 मिनट का यह आसन दूर करेगा कब्ज़, मज़बूत करेगा रीढ़ की हड्डी

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सेतुबंधासन: रोज़ाना 5 मिनट का यह आसन दूर करेगा कब्ज़, मज़बूत करेगा रीढ़ की हड्डी

सारांश

घंटों बैठकर काम करने वालों के लिए सेतुबंधासन एक सरल लेकिन शक्तिशाली समाधान है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, रोज़ाना मात्र 5 मिनट का यह अभ्यास रीढ़ को लचीला बनाता है, कब्ज़ दूर करता है और महिलाओं में हार्मोन संतुलन भी सुधारता है।

मुख्य बातें

सेतुबंधासन को आयुष मंत्रालय पीठ के बल लेटकर की जाने वाली प्रमुख योग मुद्राओं में मानता है।
रोज़ाना 5 मिनट के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली और मज़बूत बनती है।
पाचन क्रिया सक्रिय होती है और कब्ज़ की समस्या में राहत मिलती है।
महिलाओं में हार्मोन संतुलन , थायरॉयड और पेल्विक रक्त संचार बेहतर होता है।
कमर दर्द, पीठ दर्द और गर्दन की अकड़न में उल्लेखनीय राहत मिलती है।
यह आसन तनाव कम करने और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना गया है।

सेतुबंधासन (ब्रिज पोज़) एक ऐसा योगाभ्यास है जिसे आयुष मंत्रालय पीठ के बल लेटकर की जाने वाली प्रमुख मुद्राओं में गिनता है। व्यस्त दिनचर्या और घंटों डेस्क पर बैठे रहने से उत्पन्न कमर दर्द, तनाव और पाचन संबंधी परेशानियों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। मंत्रालय के अनुसार, केवल 5 मिनट के दैनिक अभ्यास से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है और पूरे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है।

सेतुबंधासन क्या है और इसका अर्थ क्या है

सेतुबंधासन संस्कृत के दो शब्दों से बना है — 'सेतु' अर्थात् पुल और 'बंध' अर्थात् बाँधना। जब यह आसन किया जाता है, तो शरीर की आकृति ठीक एक पुल जैसी बन जाती है, इसलिए इसे अंग्रेज़ी में ब्रिज पोज़ भी कहते हैं। देखने में सरल लगने वाला यह आसन शारीरिक मज़बूती और मानसिक शांति दोनों दृष्टियों से प्रभावशाली है।

रीढ़ की हड्डी और कमर दर्द पर असर

इस आसन के दौरान जब पीठ को ज़मीन से ऊपर उठाया जाता है, तो रीढ़ की हड्डी में क्रमिक खिंचाव आता है। नियमित अभ्यास से रीढ़ लचीली और मज़बूत बनती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह कमर दर्द, पीठ दर्द और गर्दन की अकड़न में उल्लेखनीय राहत देता है। जो लोग दिनभर बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह अभ्यास विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है।

पाचन सुधार और कब्ज़ से राहत

सेतुबंधासन पेट के अंगों पर हल्का दबाव और खिंचाव डालता है, जिससे पाचन क्रिया सक्रिय होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से कब्ज़ की समस्या में राहत मिल सकती है। यह आँतों की गतिविधि को बेहतर बनाने में सहायक माना गया है।

महिलाओं के लिए विशेष लाभ

सेतुबंधासन महिलाओं में हार्मोन संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। यह थायरॉयड ग्रंथि और पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार को बेहतर करता है। इसके फलस्वरूप पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं, मूड स्विंग्स और मेनोपॉज़ के दौरान होने वाली परेशानियों में कमी आ सकती है।

मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति

शारीरिक लाभों के साथ-साथ यह आसन तनाव को कम करने और मन को शांत रखने में भी प्रभावी पाया गया है। गौरतलब है कि यह आसन हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे सीने में खिंचाव आता है और हृदय क्षेत्र में रक्त प्रवाह बेहतर होता है। योग विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि शुरुआत करने वाले लोग इसे किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में सीखें, विशेषकर यदि उन्हें पहले से कोई चोट या स्वास्थ्य समस्या हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

पाचन विकार, तनाव — अब महामारी का रूप ले रही हैं। आयुष मंत्रालय की बढ़ती सक्रियता स्वागतयोग्य है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं बताती कि इन दावों के पीछे क्लिनिकल साक्ष्य कितने ठोस हैं। पाठकों को यह भी समझना चाहिए कि पुरानी चोट या गंभीर स्पाइनल समस्या वाले व्यक्तियों के लिए बिना चिकित्सीय परामर्श के कोई भी योगाभ्यास जोखिम भरा हो सकता है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेतुबंधासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
सेतुबंधासन एक योगासन है जिसमें पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ा जाता है और कमर को ज़मीन से ऊपर उठाया जाता है, जिससे शरीर पुल की आकृति बनाता है। आयुष मंत्रालय इसे पीठ के बल की जाने वाली प्रमुख योग मुद्राओं में शामिल करता है।
सेतुबंधासन रीढ़ की हड्डी के लिए कैसे फायदेमंद है?
इस आसन में पीठ को ऊपर उठाने पर रीढ़ में क्रमिक खिंचाव आता है, जिससे वह लचीली और मज़बूत बनती है। नियमित अभ्यास से कमर दर्द, पीठ दर्द और गर्दन की अकड़न में राहत मिलती है।
क्या सेतुबंधासन कब्ज़ दूर करने में मदद करता है?
हाँ, यह आसन पेट के अंगों पर खिंचाव और दबाव डालकर पाचन क्रिया को सक्रिय करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित अभ्यास से कब्ज़ की समस्या में राहत मिल सकती है।
महिलाओं के लिए सेतुबंधासन के क्या विशेष लाभ हैं?
सेतुबंधासन थायरॉयड ग्रंथि और पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर करता है, जिससे हार्मोन संतुलन बना रहता है। इससे पीरियड्स की समस्याओं, मूड स्विंग्स और मेनोपॉज़ के दौरान होने वाली परेशानियों में कमी आ सकती है।
सेतुबंधासन कितने समय तक करना चाहिए?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, रोज़ाना 5 मिनट का अभ्यास पर्याप्त लाभकारी हो सकता है। शुरुआती लोगों को सलाह दी जाती है कि वे किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में इस आसन को सीखें।
राष्ट्र प्रेस
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