30 जुलाई 2026
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सावन 2026: शिव मंदिरों में उमड़े लाखों भक्त, श्रावण मास की पूजा-अर्चना शुरू

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सावन 2026: शिव मंदिरों में उमड़े लाखों भक्त, श्रावण मास की पूजा-अर्चना शुरू

सारांश

सावन 2026 के पहले दिन देशभर के शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ा। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा यह महीना भक्तों के लिए व्रत, अभिषेक और कांवड़ यात्रा का समय है — हिंदू धर्म के सबसे शुभ कालखंडों में से एक।

मुख्य बातें

30 जुलाई 2026 को सावन के पवित्र महीने का आगाज़, देशभर के शिव मंदिरों में हजारों भक्त उमड़े।
श्रावण मास हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना है, जो पूर्णतः भगवान शिव की आराधना को समर्पित है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी महीने समुद्र मंथन हुआ था और शिव ने विष पीकर 'नीलकंठ' नाम पाया।
भक्त हर सावन सोमवार को व्रत रखते हैं; दूध, शहद, बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
वार्षिक कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।

देशभर के शिव मंदिरों में गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को सावन के पवित्र महीने के पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भोर से ही भक्त भगवान शिव का अभिषेक करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरों में कतारबद्ध होने लगे, जो इस माह की आस्था और धार्मिक उत्साह का प्रमाण है।

श्रावण मास का धार्मिक महत्व

सावन को श्रावण मास भी कहा जाता है — यह हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना है, जो मानसून के मौसम में जुलाई-अगस्त के दौरान पड़ता है। यह पूरा महीना भगवान शिव की आराधना को समर्पित माना जाता है और हिंदू धर्म में सबसे शुभ कालखंडों में से एक है। देशभर में लाखों भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं, विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और तीर्थयात्रा पर निकलते हैं।

पौराणिक आधार: नीलकंठ और समुद्र मंथन

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था। मंथन के दौरान निकले विष से समस्त सृष्टि के अस्तित्व पर संकट आ गया था। मान्यता है कि भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए वह विष स्वयं पी लिया और उसे अपने कंठ में ही रोक लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और उन्हें 'नीलकंठ' नाम से जाना जाने लगा। यही कारण है कि इस माह में शिव-पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भी भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी। इसलिए यह माह समृद्धि, वैवाहिक सुख और आध्यात्मिक कल्याण की कामना करने वाले भक्तों के लिए विशेष रूप से पूजनीय है।

मुख्य अनुष्ठान और परंपराएँ

इस महीने भक्त हर सोमवार को व्रत रखते हैं — इस विश्वास के साथ कि सावन में की गई सच्ची प्रार्थनाएँ शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं। मंदिरों में शिवलिंग का पारंपरिक अभिषेक किया जाता है, जिसमें दूध, शहद, दही, घी, जल और बेलपत्र का उपयोग होता है — ये सभी शिव-पूजा में विशेष महत्व रखते हैं। कई भक्त इस पवित्र महीने में शाकाहारी आहार अपनाते हैं और मांसाहार से दूरी बनाते हैं।

कांवड़ यात्रा: आस्था की पैदल परिक्रमा

सावन के दौरान वार्षिक कांवड़ यात्रा भी आयोजित होती है, जिसमें कांवड़िये गंगा से पवित्र जल लेकर लंबी पैदल यात्रा करते हैं और उसे शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। यह यात्रा आस्था, तप और सामूहिक भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। प्रमुख मंदिरों के बाहर भक्तों की लंबी कतारें और भजन-कीर्तन का माहौल इस माह की विशेषता है।

आगे का कार्यक्रम

सावन का यह पवित्र सिलसिला पूरे महीने जारी रहेगा। प्रत्येक सावन सोमवार पर मंदिरों में विशेष पूजा और भंडारे आयोजित किए जाएँगे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई राज्यों में मंदिर प्रशासन ने अतिरिक्त व्यवस्था की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की सामाजिक एकजुटता का वार्षिक प्रमाण है — जब करोड़ों लोग एक साथ एक ही आस्था में बँध जाते हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब शहरीकरण और डिजिटल जीवनशैली के बावजूद मंदिरों में भीड़ हर साल बढ़ रही है। कांवड़ यात्रा जैसे आयोजन अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और यातायात चुनौती भी बन चुके हैं — जिस पर राज्य सरकारों की तैयारी की असली परीक्षा होती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन का महीना 2026 में कब से कब तक है?
सावन 2026 का आरंभ 30 जुलाई को हुआ है और यह अगस्त तक चलेगा। यह हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना है जो मानसून के दौरान पड़ता है।
सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा क्यों की जाती है?
पौराणिक मान्यता है कि सावन में ही समुद्र मंथन हुआ था और भगवान शिव ने विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। देवी पार्वती ने भी इसी महीने शिव को पाने के लिए तपस्या की थी, इसलिए यह माह शिव-भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
सावन सोमवार व्रत का क्या महत्व है?
सावन के हर सोमवार को भक्त व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस दौरान की गई सच्ची प्रार्थनाएँ शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं।
कांवड़ यात्रा क्या होती है और यह कब होती है?
कांवड़ यात्रा सावन के महीने में होती है, जिसमें श्रद्धालु गंगा नदी से पवित्र जल लाकर पैदल यात्रा करते हैं और शिव मंदिरों में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। यह आस्था और तप का प्रतीक मानी जाती है।
शिवलिंग अभिषेक में किन चीज़ों का उपयोग होता है?
शिवलिंग के अभिषेक में दूध, शहद, दही, घी, जल और बेलपत्र का उपयोग किया जाता है। ये सभी वस्तुएँ शिव-पूजा में विशेष धार्मिक महत्व रखती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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