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धीरेंद्र शास्त्री की 'हिंदू राष्ट्र' रथ यात्रा 11 अक्टूबर से, मध्य प्रदेश के 5 जिलों में 500 किमी का सफर

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धीरेंद्र शास्त्री की 'हिंदू राष्ट्र' रथ यात्रा 11 अक्टूबर से, मध्य प्रदेश के 5 जिलों में 500 किमी का सफर

सारांश

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का 'हिंदू राष्ट्र' संकल्प इस बार रथ पर सवार होगा — 11 अक्टूबर से मध्य प्रदेश के 5 जिलों में 500 किमी की यात्रा, हर 20 किमी पर सभा और शपथ। पदयात्रा से रथ यात्रा तक — अभियान बड़ा हो रहा है।

मुख्य बातें

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 23 सितंबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में रथ यात्रा की घोषणा की।
यात्रा 11 अक्टूबर से शुरू होगी और मध्य प्रदेश के सागर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह और छतरपुर जिलों में 500 किमी का सफर तय करेगी।
पाँच दिवसीय यात्रा में 4 स्थानों पर रात्रि विश्राम; हर 20 किमी पर जनसभा की योजना।
अभियान का संदेश 'जात-पात मुक्त, राष्ट्रवाद युक्त' ; लोगों को 'हिंदू राष्ट्र' की शपथ दिलाई जाएगी।
विपक्ष के कई नेताओं ने यात्रा को 'हिंदू राष्ट्र' एजेंडे से जोड़ने पर कथित तौर पर आपत्ति जताई है।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 23 सितंबर 2026 को ग्रेटर नोएडा में एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि वे 11 अक्टूबर से नवरात्रि में रथ यात्रा निकालेंगे, जो भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने के उनके संकल्प से जुड़ी होगी। यह यात्रा मध्य प्रदेश के पाँच जिलों में करीब 500 किलोमीटर का मार्ग तय करेगी।

यात्रा का मार्ग और कार्यक्रम

शास्त्री के अनुसार रथ यात्रा सागर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह और छतरपुर जिलों से होकर गुजरेगी। पाँच दिवसीय इस यात्रा में चार स्थानों पर रात्रि विश्राम की योजना है। इन विश्राम स्थलों पर हनुमान चालीसा का पाठ, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।

अभियान की पहली रथ यात्रा बागेश्वर धाम क्षेत्र से शुरू होगी। यात्रा के दौरान करीब हर 20 किलोमीटर पर जनसभाएँ आयोजित करने की योजना बताई गई है, जिनके माध्यम से लोगों को यात्रा के उद्देश्य से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा लोगों को 'हिंदू राष्ट्र' के लिए शपथ भी दिलाई जाएगी।

अभियान का संदेश

शास्त्री ने इस अभियान का संदेश 'जात-पात मुक्त, राष्ट्रवाद युक्त' बताया। उन्होंने कहा कि यात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संतों के शामिल होने की भी संभावना है। गौरतलब है कि इस बार यात्रा पैदल नहीं, बल्कि रथ से होगी — यह पिछली यात्राओं से एक महत्त्वपूर्ण बदलाव है।

पिछली यात्राओं का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब शास्त्री पहले भी इसी तरह की धार्मिक-सामाजिक पदयात्राएँ निकाल चुके हैं। इससे पहले वे दिल्ली से वृंदावन तक पदयात्रा कर चुके हैं और बागेश्वर धाम से ओरछा तक भी उनकी पदयात्रा आयोजित हो चुकी है। रथ यात्रा का यह नया स्वरूप उनके अभियान को एक बड़े पैमाने पर ले जाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

शास्त्री की इस घोषणा के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष के कई नेताओं ने कथित तौर पर इस यात्रा को 'हिंदू राष्ट्र' के एजेंडे से जोड़ने पर आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक-राजनीतिक अभियान सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं, हालाँकि शास्त्री के समर्थकों का तर्क है कि यह यात्रा सांस्कृतिक एकता का संदेश देती है। आगामी हफ्तों में यात्रा के विरुद्ध या समर्थन में राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'हिंदू राष्ट्र' की शपथ का राजनीतिकरण एक साथ दो विपरीत संदेश देता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि इस तरह की यात्राओं का असली प्रभाव यात्रा-मार्ग पर नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों में मतदाता-एकजुटता पर पड़ता है — और मध्य प्रदेश के ये पाँचों जिले राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बेल्ट में आते हैं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धीरेंद्र शास्त्री की रथ यात्रा कब और कहाँ से शुरू होगी?
रथ यात्रा 11 अक्टूबर 2026 से बागेश्वर धाम क्षेत्र से शुरू होगी और मध्य प्रदेश के सागर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह और छतरपुर जिलों से होकर गुजरेगी। पाँच दिनों में करीब 500 किलोमीटर की यह यात्रा नवरात्रि के दौरान आयोजित की जाएगी।
इस रथ यात्रा का उद्देश्य क्या है?
धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने के संकल्प को जन-जन तक पहुँचाना है। अभियान का संदेश 'जात-पात मुक्त, राष्ट्रवाद युक्त' रखा गया है और यात्रा के दौरान लोगों को शपथ भी दिलाई जाएगी।
यात्रा के दौरान कौन-से धार्मिक कार्यक्रम होंगे?
यात्रा के चार रात्रि विश्राम स्थलों पर हनुमान चालीसा का पाठ, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा हर 20 किलोमीटर पर जनसभाएँ होंगी और देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संतों के भी शामिल होने की संभावना है।
पिछली यात्राओं से यह रथ यात्रा कैसे अलग है?
इससे पहले शास्त्री दिल्ली से वृंदावन और बागेश्वर धाम से ओरछा तक पदयात्राएँ कर चुके हैं। इस बार यात्रा पैदल नहीं, बल्कि रथ से होगी, जिससे अधिक दूरी और अधिक जिलों को कवर करना संभव होगा।
विपक्ष की इस यात्रा पर क्या प्रतिक्रिया है?
कथित तौर पर विपक्ष के कई नेताओं ने इस यात्रा को 'हिंदू राष्ट्र' एजेंडे से जोड़ने पर आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के अभियान सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं, हालाँकि शास्त्री के समर्थक इसे सांस्कृतिक एकता का प्रयास बताते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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