बागेश्वर धाम रथ यात्रा 3.0: धीरेंद्र शास्त्री के 'नशा मुक्त भारत' आह्वान से बुंदेलखंड में युवा आंदोलन तेज़
सारांश
मुख्य बातें
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में 11 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच निकली 'सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा 3.0' ने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में नशे के खिलाफ युवाओं की एक उल्लेखनीय लहर को जन्म दिया है। छतरपुर से शुरू होकर पाँच ज़िलों में लगभग 500 किलोमीटर की यात्रा तय करने वाले इस अभियान में हज़ारों श्रद्धालु — जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की थी — शामिल हुए और सार्वजनिक रूप से शराब व नशीले पदार्थों को त्यागने का संकल्प लिया।
यात्रा का मार्ग और विस्तार
पाँच दिवसीय रथ यात्रा 11 अक्टूबर 2026 को छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम से प्रारंभ हुई और छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर तथा टीकमगढ़ — बुंदेलखंड के पाँच ज़िलों — से होते हुए 15 अक्टूबर को संपन्न हुई। यह यात्रा अपने पूर्ववर्ती संस्करणों से अलग थी — इस बार नशा मुक्ति को एक केंद्रीय एजेंडे के रूप में स्थापित किया गया, न कि मात्र धार्मिक आयोजन के रूप में।
हर प्रमुख पड़ाव पर धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं को शराब और अन्य नशीले पदार्थों को छोड़ने, जातिगत भेदभाव समाप्त करने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की सामूहिक शपथ दिलाई। आयोजकों के अनुसार, इन शपथ समारोहों में युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।
बुंदेलखंड में नशे की गंभीर समस्या
इस यात्रा की पृष्ठभूमि में बुंदेलखंड क्षेत्र में नशे की व्यापक समस्या है। धीरेंद्र शास्त्री ने स्वयं कहा, 'बुंदेलखंड नशे से जूझ रहा है। विशेष कदम उठाए गए और लोगों ने शपथ ली। हमें विश्वास है कि यह यात्रा बड़ा बदलाव लाएगी।' गौरतलब है कि बांदा जैसे क्षेत्रों में उन्होंने जहरीली शराब से प्रियजनों को खोने वाले परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और इस खतरे के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई की अपील की।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में जहरीली शराब त्रासदियों की खबरें सामने आती रही हैं। इस संदर्भ में जमीनी स्तर पर चलाया गया यह जागरूकता अभियान सामाजिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
युवाओं के लिए संदेश और सनातन मूल्यों की वापसी
युवाओं को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, 'जब युवा जागेगा, तब भारत जागेगा; नशा मुक्त भारत का सपना साकार होगा।' उन्होंने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि नशा न केवल व्यक्ति को, बल्कि राष्ट्र को भी कमज़ोर करता है। उन्होंने युवाओं से सनातन सिद्धांतों पर आधारित अनुशासन, पारंपरिक मूल्यों और उद्देश्यपूर्ण जीवन शैली अपनाने का आग्रह किया।
रथ यात्रा के कथा सत्रों में शामिल अनेक युवाओं ने सार्वजनिक मंचों पर शराब और नशीले पदार्थों से दूर रहने का संकल्प लिया। स्थानीय समर्थकों और आयोजकों ने इसे एक स्वस्थ, मूल्य-आधारित समाज की नींव रखने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
सरकार से प्रतिबंध की माँग
धीरेंद्र शास्त्री ने मध्य प्रदेश सरकार से बिहार और गुजरात के सफल उदाहरणों का हवाला देते हुए राज्य में शराब की दुकानों पर पूर्ण प्रतिबंध पर विचार करने का आह्वान किया। हालाँकि, राज्य सरकार की ओर से इस माँग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे की योजना
धीरेंद्र शास्त्री ने घोषणा की है कि उनकी अगली यात्रा विशेष रूप से नशा मुक्ति और नशे के विरुद्ध जागरूकता पर केंद्रित होगी। 'नशा मुक्त, महान भारत' के इस आह्वान के माध्यम से वे नई पीढ़ी को हानिकारक आदतों से दूर कर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से पुनः जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। यह अभियान अब महज धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।