22 अक्टूबर 2026
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विहिप ने 'सनातन एकता रथ यात्रा' को दिया समर्थन, श्रीराज नायर ने बाबा बागेश्वर को दी शुभकामनाएं

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विहिप ने 'सनातन एकता रथ यात्रा' को दिया समर्थन, श्रीराज नायर ने बाबा बागेश्वर को दी शुभकामनाएं

सारांश

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने बाबा बागेश्वर की पाँचवीं पदयात्रा 'सनातन एकता रथ यात्रा' को पूर्ण समर्थन दिया। साथ ही मदरसों में रविवार की जगह शुक्रवार को अवकाश देने के विरोध में मुख्यमंत्री धामी का साथ दिया और भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को अस्वीकार्य बताया।

मुख्य बातें

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 22 अक्टूबर 2026 को बाबा बागेश्वर की 'सनातन एकता रथ यात्रा' का समर्थन करते हुए शुभकामनाएं दीं।
यह यात्रा लखनऊ से अयोध्या तक प्रस्तावित है और बाबा बागेश्वर की पाँचवीं पदयात्रा है।
नायर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा दिल्ली के प्रदर्शनों को भारत का आंतरिक मामला बताने के रुख का स्वागत किया।
उत्तराखंड में मदरसों की शुक्रवार छुट्टी के विरोध में विहिप ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान से सहमति जताई।
नायर ने पूरे देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की माँग दोहराई।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई में बागेश्वर धाम की प्रस्तावित 'सनातन एकता रथ यात्रा' का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने यात्रा के उद्देश्यों को विहिप की विचारधारा के अनुरूप बताते हुए बाबा बागेश्वर को शुभकामनाएं दीं और साथ ही भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप तथा मदरसों की शुक्रवार छुट्टी पर भी अपनी स्पष्ट राय व्यक्त की।

सनातन एकता रथ यात्रा को पूर्ण समर्थन

नायर ने बताया कि लखनऊ से अयोध्या तक प्रस्तावित यह यात्रा बाबा बागेश्वर की पाँचवीं पदयात्रा है, जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू धर्म के अनुयायी और भक्त शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा बागेश्वर ने नशा मुक्ति, नक्सलवाद से मुक्ति, लव जिहाद और लैंड जिहाद के खिलाफ अभियान चलाने तथा हिंदू-विरोधी ताकतों का मुकाबला करने का संकल्प लिया है।

नायर के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद इन उद्देश्यों का पूर्ण समर्थन करती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई धार्मिक और सामाजिक संगठन हिंदू एकता के नाम पर जन-आंदोलन खड़े करने की कोशिश कर रहे हैं।

विदेशी हस्तक्षेप पर विहिप का रुख

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा नई दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों को भारत का आंतरिक मामला बताने और संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की टिप्पणियों को खारिज करने के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए नायर ने इसे 'स्वागत योग्य' कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र गणतंत्र और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जो अपने आंतरिक मामलों और घटनाक्रमों को स्वयं संभालने में पूरी तरह सक्षम है।

नायर ने स्पष्ट किया कि किसी भी बाहरी ताकत को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप या अनावश्यक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर चल रहे आंदोलन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाक्रमों पर संज्ञान लेना भारत सरकार का विषय है और इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री द्वारा टिप्पणी न करने के रुख का वे स्वागत करते हैं।

मदरसों की छुट्टी और समान मानदंड

उत्तराखंड में मदरसों की शुक्रवार छुट्टी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान से नायर ने पूरी तरह सहमति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सरकारी स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थान रविवार को बंद रहते हैं, तो मदरसों में भी रविवार को ही अवकाश होना चाहिए — न कि शुक्रवार को।

नायर ने कहा कि एक ही राज्य में अलग-अलग संस्थानों के लिए भिन्न मापदंड नहीं होने चाहिए। गौरतलब है कि उत्तराखंड पहले से ही समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल दोनों ही मुख्यमंत्री धामी के इस रुख का समर्थन करते हैं।

पूरे देश में UCC लागू करने की माँग

नायर ने यह भी कहा कि देश में विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग कानून नहीं होने चाहिए और संपूर्ण भारत में समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए। उनके अनुसार यह भारतीय संविधान में निहित समानता की मूल भावना से जुड़ा मसला है।

आने वाले दिनों में 'सनातन एकता रथ यात्रा' की प्रगति और उत्तराखंड में मदरसा अवकाश नीति पर सरकार का अंतिम निर्णय इस बहस को और आकार देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

विदेशी आलोचना के सामने 'संप्रभुता' की ढाल, और मदरसा-UCC बहस के ज़रिए बहुसंख्यक मतदाताओं को साधना। गौरतलब है कि उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद यही मॉडल अन्य BJP-शासित राज्यों में दोहराने की कवायद तेज़ हुई है। सवाल यह है कि क्या 'समान मापदंड' की यह माँग वाकई संवैधानिक समानता से प्रेरित है, या यह चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा है — इसका जवाब नीतिगत ब्यौरों में मिलेगा, बयानों में नहीं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सनातन एकता रथ यात्रा' क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
यह बागेश्वर धाम द्वारा प्रस्तावित पाँचवीं पदयात्रा है, जो लखनऊ से अयोध्या तक जाएगी। इसका उद्देश्य नशा मुक्ति, नक्सलवाद से मुक्ति, लव जिहाद व लैंड जिहाद के खिलाफ जागरूकता और हिंदू समाज की एकजुटता बताया गया है।
विहिप ने इस यात्रा का समर्थन क्यों किया?
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा कि यात्रा के उद्देश्य विहिप की विचारधारा और कार्यक्रमों से मेल खाते हैं। उन्होंने कहा कि परिषद इन सभी उद्देश्यों का पूर्ण समर्थन करती है।
मदरसों की शुक्रवार छुट्टी पर विहिप का क्या रुख है?
विहिप ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने कहा कि मदरसों को भी अन्य संस्थानों की तरह रविवार को अवकाश रखना चाहिए। नायर ने कहा कि एक राज्य में अलग-अलग संस्थानों के लिए भिन्न मापदंड नहीं होने चाहिए।
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो के बयान पर विहिप ने क्या कहा?
नायर ने रुबियो के उस रुख का स्वागत किया जिसमें उन्होंने दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों को भारत का आंतरिक मामला बताया। विहिप ने कहा कि भारत एक संप्रभु लोकतंत्र है और किसी भी बाहरी ताकत को उसके आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए।
विहिप समान नागरिक संहिता (UCC) पर क्या चाहती है?
विहिप की माँग है कि पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू हो। नायर ने उत्तराखंड में पहले से लागू UCC का हवाला देते हुए कहा कि यह संविधान की समानता की भावना से जुड़ा विषय है।
राष्ट्र प्रेस
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