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राहुल गांधी 'फेल प्रोडक्ट' विवाद: दिलीप घोष बोले — प्रियंका तैयार होने तक कांग्रेस की मजबूरी

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राहुल गांधी 'फेल प्रोडक्ट' विवाद: दिलीप घोष बोले — प्रियंका तैयार होने तक कांग्रेस की मजबूरी

सारांश

पीएम मोदी के 'फेल प्रोडक्ट' कटाक्ष के बाद BJP मंत्री दिलीप घोष ने दोधारी वार किया — कांग्रेस की पारिवारिक राजनीति को निशाना बनाया और कहा कि प्रियंका गांधी के तैयार होने तक राहुल ही पार्टी की मजबूरी हैं। यह बयान कांग्रेस नेतृत्व पर BJP के व्यापक हमले की नई कड़ी है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल मंत्री दिलीप घोष ने 23 अक्टूबर 2026 को पीएम मोदी के 'फेल प्रोडक्ट' बयान का समर्थन किया।
घोष के अनुसार, प्रियंका गांधी के पूरी तरह तैयार होने तक कांग्रेस को राहुल गांधी को ढोने की मजबूरी है।
घोष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस दूसरों के आंदोलनों का चुनावी लाभ उठाने की कोशिश करती है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी घोष के बयान में उल्लेख।
राहुल गांधी को 'पार्ट-टाइम नेता' करार देते हुए उनकी विदेश यात्राओं और संसद से अनुपस्थिति पर सवाल उठाए।

पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 23 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मोदी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को 'बार-बार लॉन्च होने वाला फेल प्रोडक्ट' करार दिया था। घोष ने कहा कि कांग्रेस को गंभीरता से सोचना चाहिए कि वह राहुल गांधी को आखिर कब तक ढोती रहेगी।

परिवार की पार्टी, परिवार की मजबूरी

दिलीप घोष ने कहा, 'कांग्रेस एक परिवार की पार्टी है और उसी परिवार से नेतृत्व तय होता है।' उनके अनुसार, जब तक प्रियंका गांधी पूरी तरह से राजनीतिक मोर्चे पर तैयार नहीं हो जातीं, तब तक राहुल गांधी को ही नेतृत्व थामे रखना पार्टी की विवशता है। उन्होंने पीएम मोदी के 'बार-बार हारने वाले नेता को लॉन्च करने' वाले कटाक्ष से सहमति जताते हुए कहा कि एक पारिवारिक पार्टी के पास वैकल्पिक नेतृत्व का अभाव ही इस स्थिति की जड़ है।

विपक्ष पर आंदोलन का श्रेय लेने का आरोप

प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर कि कांग्रेस ईमानदार विरोध प्रदर्शनों को नुकसान पहुँचाती है, घोष ने पूरी तरह सहमति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी पार्टियाँ और संगठन आंदोलन करते हैं, मेहनत करते हैं, और कांग्रेस चुनाव के समय उनका राजनीतिक फायदा उठाने पहुँच जाती है। उनके अनुसार, 'आंदोलनों में भी कांग्रेस की यही भूमिका रहती है।'

सोशल मीडिया के 'उभरते नेताओं' पर निशाना

घोष ने सोशल मीडिया पर रातोंरात प्रसिद्ध होने वाले चेहरों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट और कुछ अन्य दल, जिनके पास अपना कोई विश्वसनीय नेतृत्व नहीं है, ऐसे नामों को सामने खड़ा कर देते हैं। उन्होंने कहा, 'देश की जनता इतनी बेवकूफ नहीं है — भारत का इतिहास हजारों साल पुराना है और ऐसे कई आंदोलन आए और चले गए।' यह टिप्पणी उन्होंने एक विशिष्ट नाम का उल्लेख करते हुए की।

विपक्ष पर हंगामे का आरोप, लोकसभा अध्यक्ष का हवाला

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की माँगों पर घोष ने कहा कि यदि किसी को शिकायत है तो न्यायालय जाने या संसद में प्रस्ताव लाने का रास्ता खुला है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रस्ताव आने पर चर्चा होगी। घोष के अनुसार विपक्ष के पास 'न कोई तर्क है, न कोई प्रमाण — सिर्फ हंगामा करके अशांति फैलाना मकसद है।'

राहुल की विदेश यात्राओं और 'पार्ट-टाइम' नेतृत्व पर प्रहार

राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर घोष ने कहा कि उन्हें 'छुट्टियों पर जाने की आदत' है। उनके अनुसार राहुल गांधी कभी संसद में सक्रिय रूप से मौजूद नहीं रहते और न ही चुनाव प्रचार में पूरी भागीदारी निभाते हैं। घोष ने कहा, 'देश ने कभी भी ऐसे पार्ट-टाइम नेता को स्वीकार नहीं किया है।'

दिल्ली में प्रस्तावित लोकतंत्र बहाली मार्च पर उन्होंने कहा कि मार्च होना ही इस बात का प्रमाण है कि देश में लोकतंत्र जीवित है। उन्होंने सुझाया कि लोकतंत्र बहाली की असली लड़ाई बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में लड़ी जानी चाहिए। आने वाले दिनों में इन बयानों पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया और राजनीतिक घमासान और तेज होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कांग्रेस को एक पारिवारिक पार्टी के रूप में स्थापित करने में जुटी है। लेकिन विडंबना यह है कि 'फेल प्रोडक्ट' की भाषा को जितना प्रचारित किया जाए, विपक्ष के लिए सहानुभूति का आधार उतना ही मज़बूत हो सकता है। घोष ने प्रियंका गांधी को 'अगले विकल्प' के रूप में स्वीकार करके अनजाने में कांग्रेस की उत्तराधिकार राजनीति को वैधता भी दी है। मुख्यधारा की कवरेज बयानबाज़ी पर टिकी है, जबकि असली सवाल यह है कि विपक्षविहीन सत्ता-संरचना में ऐसी आलोचना लोकतांत्रिक जवाबदेही को मज़बूत करती है या कमज़ोर।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने राहुल गांधी को लेकर क्या कहा?
दिलीप घोष ने कहा कि कांग्रेस एक पारिवारिक पार्टी है, इसलिए जब तक प्रियंका गांधी पूरी तरह तैयार नहीं होतीं, तब तक राहुल गांधी को ही पार्टी का नेतृत्व सँभालना पड़ेगा। उन्होंने राहुल को 'पार्ट-टाइम नेता' भी कहा।
पीएम मोदी का 'फेल प्रोडक्ट' बयान क्या था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा था कि कांग्रेस आखिर कब तक एक 'फेल हो चुके प्रोडक्ट' को बार-बार लॉन्च करती रहेगी — यह टिप्पणी राहुल गांधी की ओर इशारा करते हुए की गई थी।
दिलीप घोष ने विपक्ष के आंदोलनों पर क्या आरोप लगाए?
घोष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का कोई ठोस योगदान नहीं है — दूसरी पार्टियाँ आंदोलन करती हैं और कांग्रेस चुनाव के वक्त उनका राजनीतिक लाभ उठाने पहुँच जाती है। उन्होंने कहा कि आंदोलनों में भी यही कांग्रेस की भूमिका रहती है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का घोष के बयान में क्या संदर्भ था?
घोष ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वयं कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर यदि विपक्ष संसद में प्रस्ताव लाता है तो उस पर चर्चा होगी। घोष ने कहा कि विपक्ष के पास न तर्क है न प्रमाण, वह केवल हंगामा करना चाहता है।
दिल्ली लोकतंत्र मार्च पर दिलीप घोष का क्या रुख है?
घोष ने कहा कि मार्च हो पाना ही इस बात का प्रमाण है कि भारत में लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि यदि लोकतंत्र बहाली की बात करनी है तो बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में जाकर करनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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