धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर दिलीप घोष बोले — 'सरकार सभी को साथ लेकर विकास की राह पर चलेगी'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 26 जुलाई को कोलकाता में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है और बातचीत के ज़रिए समस्याओं का समाधान करना उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने इस अवसर पर विपक्षी दलों पर भी तीखे प्रहार किए।
इस्तीफे पर सरकार का रुख
मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'सरकार ने आंदोलनकारियों के साथ बातचीत करके समाधान के लिए भरकस प्रयास किए, लेकिन उनके मंसूबे दूसरे थे। कुछ चीजों पर विचार करने के बाद ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है। सरकार सभी लोगों को साथ लेकर विकास की तरफ जाना चाहती है। बातचीत के ही माध्यम से समस्याओं का समाधान करने की सरकार की कोशिश है और उसी दिशा में काम हो रहा है।'
विपक्ष के श्रेय-दावों पर पलटवार
इस्तीफे के बाद विभिन्न दलों द्वारा श्रेय लेने की होड़ पर घोष ने तंज कसा। उन्होंने कहा, 'कोई कहता है कि यह राहुल गांधी की जीत है, लेकिन किस-किस की यह जीत है, वो अपना हिसाब करें।'
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा की 'छात्रों की जीत' वाली टिप्पणी पर घोष ने कहा, 'छात्र कहां थे? वे खुद छात्र नहीं हैं। न तो राहुल गांधी और न ही बयान देने वाले अन्य नेता छात्र हैं। छात्रों के नाम पर कुछ लोग आते हैं और अशांति फैलाते हैं। वे किसानों और महिलाओं के नाम पर भी ऐसा ही करते हैं। इसके पीछे के लोग वही रहते हैं, बस सामने का बैनर बदल जाता है। इससे देश को किसी भी तरह से फायदा नहीं होगा और जनता उनका समर्थन नहीं करने वाली है।'
मीडियाकर्मियों पर हमले और पुलिस कार्रवाई
विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों पर हुए हमले के संदर्भ में मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'छात्र विरोध के नाम पर पत्थरबाजी हुई, मीडियाकर्मियों पर हमला, कैमरों को नुकसान और आम नागरिकों पर हमले — ये सभी कानून का उल्लंघन माने जाते हैं। तुरंत कार्रवाई की गई। कानून के तहत दोषियों को सजा दी जाएगी। कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है और जांच व कानूनी प्रक्रिया जारी है।'
ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शनिवार को किए गए विरोध प्रदर्शन पर घोष ने कहा, 'हमेशा ऐसा ही होता है। ममता बनर्जी के आने से पहले ही मामला खत्म हो जाता है। उन्हें किसी ने बुलाया नहीं था, तो फिर बिना बुलाए मेहमान क्यों बनना? हिम्मत है तो वे यहां कोलकाता में आंदोलन करके दिखाएं। जनता ने आप लोगों को नकार दिया है।'
आगे क्या
मंत्री घोष ने स्पष्ट किया कि जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और विभिन्न दल अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। सरकार का रुख यह है कि संवाद और कानून-व्यवस्था दोनों मोर्चों पर साथ-साथ काम होता रहेगा।