पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती: PM मोदी 'भजन क्लबिंग' में शामिल, खंजरी भी बजाई
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2026 की शाम नई दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित 'भजन क्लबिंग' कार्यक्रम में भाग लिया, जो भारतीय जनसंघ के प्रमुख नेता और RSS विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के एक वीडियो में प्रधानमंत्री को दर्शकों की पहली पंक्ति में बैठे देखा गया, जबकि मंच पर गायक और संगीतकार भक्ति गीत प्रस्तुत कर रहे थे।
भजन क्लबिंग: एक नया आध्यात्मिक ट्रेंड
'भजन क्लबिंग' युवाओं — खासकर जेनरेशन Z — के बीच तेज़ी से उभरती एक आध्यात्मिक प्रवृत्ति है, जिसमें पारंपरिक भजनों और कीर्तनों को समसामयिक और आधुनिक शैली में प्रस्तुत किया जाता है। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी स्वयं खंजरी बजाते भी नज़र आए, जो इस आयोजन की विशेष झलकियों में से एक रही।
श्रद्धांजलि और अंत्योदय दर्शन पर संदेश
इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'राष्ट्र सेवा के सच्चे अनुयायी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी जयंती पर मेरी श्रद्धांजलि। उन्होंने समाज के सबसे निचले तबके के व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार माना और हमें अंत्योदय का दर्शन दिया, जो आज भी जन कल्याण के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।'
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया, 'आइए, इस विशेष अवसर पर उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने और अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने के अपने संकल्प को दोहराएं। प्रयास करने से ही फल मिलता है।'
संस्कृत सुभाषितम और विरासत का आह्वान
एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक संस्कृत सुभाषितम भी साझा किया, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि सफलता और नवाचार भाग्य से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और साहस से प्राप्त होते हैं। उन्होंने उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन को समकालीन नीतियों और जमीनी स्तर पर सशक्तीकरण के लिए आज भी प्रासंगिक बताया।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय: संक्षिप्त परिचय
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ था। वे भारतीय जनसंघ के प्रमुख नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख विचारक रहे। उन्होंने 1940 के दशक में 'राष्ट्र धर्म' नामक मासिक प्रकाशन की नींव रखी, जिसका उद्देश्य हिंदुत्व पुनरुत्थान के आदर्शों का प्रसार करना था। गौरतलब है कि 'अंत्योदय' का उनका विचार — यानी समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान — आज भी कई सरकारी योजनाओं की वैचारिक नींव माना जाता है।
आगे का कार्यक्रम
जयंती के उपलक्ष्य में देशभर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संबद्ध संगठनों द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रधानमंत्री की इस 'भजन क्लबिंग' में सहभागिता को आध्यात्मिक परंपराओं को युवा पीढ़ी से जोड़ने के एक सांस्कृतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।