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NLSIU दीक्षांत समारोह में CM शिवकुमार की चेतावनी: लोकतंत्र की परीक्षा, संस्थाएं दबाव में

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NLSIU दीक्षांत समारोह में CM शिवकुमार की चेतावनी: लोकतंत्र की परीक्षा, संस्थाएं दबाव में

सारांश

NLSIU के दीक्षांत मंच से CM शिवकुमार ने जो कहा वह महज़ बधाई भाषण नहीं था — यह एक राजनीतिक चेतावनी थी। 'लोकतंत्र की परीक्षा हो रही है' — इन शब्दों के साथ उन्होंने नवस्नातक वकीलों को संविधान का अंतिम प्रहरी बताया और न्यायिक कोचिंग संस्थान की घोषणा कर एक नीतिगत दांव भी खेला।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 17 अक्टूबर 2026 को NLSIU बेंगलुरु के 34वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित किया।
शिवकुमार ने कहा — 'लोकतंत्र की परीक्षा हो रही है और संस्थाएं भारी दबाव में हैं।' कर्नाटक सरकार न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए विशेष लॉ कॉलेज एवं कोचिंग संस्थान स्थापित करेगी।
शिवकुमार ने 46 47 वर्ष की उम्र में मैसूर विश्वविद्यालय से स्नातक करने का व्यक्तिगत प्रसंग साझा किया।
उन्होंने कहा — 'कानून की जानकारी आपको पेशेवर बनाती है, न्याय की समझ आपको नेता बनाती है।' संविधान निर्माता डॉ.
अंबेडकर के न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को उन्होंने लोकतंत्र की नींव बताया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 17 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस समय लोकतंत्र की परीक्षा हो रही है और देश की संस्थाएं भारी दबाव में हैं। उन्होंने नवस्नातक वकीलों से संविधान के संरक्षक की भूमिका निभाने का आह्वान किया और घोषणा की कि कर्नाटक न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए एक विशेष लॉ कॉलेज स्थापित करेगा।

लोकतंत्र और संस्थाओं पर शिवकुमार का संदेश

मुख्यमंत्री ने स्नातक हो रहे विद्यार्थियों को सीधे संबोधित करते हुए कहा, "लोकतंत्र की परीक्षा हो रही है। संस्थाएं भारी दबाव में हैं। हमें ऐसे युवाओं की जरूरत है जो सवाल पूछें, बहस करें, विचारों को चुनौती दें और समाधान सुझाएं।" उन्होंने जोर दिया कि सवाल पूछना जितना ज़रूरी है, उतना ही जवाब खोजने की जिम्मेदारी उठाना भी। शिवकुमार ने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र वह नहीं है जहां सभी सरकार से सहमत हों, बल्कि वह है जहां हर नागरिक सरकार से सवाल पूछने के लिए स्वतंत्र हो।

संविधान और अंबेडकर की विरासत

शिवकुमार ने संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर को स्मरण करते हुए कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्य केवल किसी दस्तावेज़ में लिखे शब्द नहीं, बल्कि लोकतंत्र की असली नींव हैं। उन्होंने कहा, "संविधान ही आपकी बाइबल, भगवद गीता, कुरान — जो भी आप इसे कहें — वही है।" उनका यह कथन इस बात का संकेत था कि कानून की प्रैक्टिस को केवल पेशे के रूप में नहीं, बल्कि एक नागरिक दायित्व के रूप में देखा जाना चाहिए।

युवाओं और कानून के भविष्य पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपने इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां आधी से अधिक आबादी 30 साल से कम उम्र की है। उन्होंने चेताया कि केवल युवाओं की बड़ी संख्या किसी राष्ट्र को महान नहीं बनाती — उनके विचार, मूल्य और साहस ही देश की दिशा तय करते हैं। शिवकुमार ने विद्यार्थियों से कहा, "आप सिर्फ कानून की पढ़ाई नहीं कर रहे। आप उन लाखों लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की तैयारी कर रहे हैं जिन्हें कभी पढ़ने का मौका ही नहीं मिला।" उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून की जानकारी एक पेशेवर बनाती है, लेकिन न्याय की समझ एक नेता।

शिवकुमार का व्यक्तिगत प्रसंग

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के सामने एक व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में चुनाव लड़ने के कारण वे स्नातक नहीं हो पाए थे और उन्होंने 46 47 वर्ष की आयु में मैसूर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की — तब जब वे विधायक के रूप में अपना चौथा कार्यकाल लगभग पूरा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 29 वर्ष की उम्र में कैबिनेट मंत्री बनने से भी अधिक खुशी उन्हें उस दिन हुई थी जब उन्होंने स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने यह भी बताया कि उनके बेटे ने वकालत की पढ़ाई पूरी की, जो उनकी अधूरी रह गई इच्छा को पूरा करती है।

न्यायिक कोचिंग संस्थान की घोषणा

शिवकुमार ने दीक्षांत समारोह में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि कर्नाटक सरकार न्यायिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक विशेष लॉ कॉलेज स्थापित करेगी, जिसमें युवा उम्मीदवारों के लिए कोचिंग संस्थान भी होगा। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे UPSC, IPS और अन्य पुलिस सेवाओं के लिए कोचिंग संस्थान उपलब्ध हैं, उसी तरह न्यायपालिका के लिए भी ऐसी सुविधा होनी चाहिए। गौरतलब है कि यह कदम राज्य में युवा वकीलों की न्यायिक सेवाओं तक पहुँच को व्यापक बनाने की दिशा में एक ठोस नीतिगत पहल है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में न्यायपालिका में रिक्त पदों की संख्या को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो केंद्र राज्य तनाव और न्यायिक स्वायत्तता पर चल रही राष्ट्रीय बहस के संदर्भ में पढ़े जाने चाहिए। विपक्ष शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा संस्थागत दबाव की बात करना एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति है, और NLSIU जैसे प्रतिष्ठित मंच का चुनाव इस संदेश को अधिक विश्वसनीयता देता है। न्यायिक कोचिंग संस्थान की घोषणा नीतिगत रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज इस पर ध्यान नहीं दे रही — यह राज्य स्तर पर न्यायपालिका की पहुँच बढ़ाने की दिशा में एक दुर्लभ ठोस कदम है जिसे राष्ट्रीय नीतिनिर्माताओं को भी आत्मसात करना चाहिए।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NLSIU दीक्षांत समारोह में CM शिवकुमार ने क्या कहा?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 17 अक्टूबर 2026 को NLSIU के 34वें दीक्षांत समारोह में कहा कि इस समय लोकतंत्र की परीक्षा हो रही है और देश की संस्थाएं भारी दबाव में हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से संविधान के संरक्षक की भूमिका निभाने और साहसपूर्वक सवाल पूछने का आह्वान किया।
कर्नाटक में न्यायिक कोचिंग संस्थान की घोषणा क्या है?
CM शिवकुमार ने घोषणा की कि कर्नाटक सरकार न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए एक विशेष लॉ कॉलेज और कोचिंग संस्थान स्थापित करेगी। यह कदम युवा वकीलों को न्यायपालिका में प्रवेश के लिए तैयार करने हेतु उठाया जा रहा है, जिस तरह UPSC और पुलिस सेवाओं के लिए कोचिंग संस्थान उपलब्ध हैं।
एनएलएसआईयू (NLSIU) क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
NLSIU अर्थात नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी बेंगलुरु में स्थित देश का पहला राष्ट्रीय लॉ विश्वविद्यालय है। इसे भारतीय कानूनी शिक्षा का सबसे प्रतिष्ठित संस्थान माना जाता है और इसके स्नातक देश की न्यायपालिका, नीति निर्माण तथा कानूनी पेशे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिवकुमार ने 'लोकतंत्र की परीक्षा' वाली बात किस संदर्भ में कही?
शिवकुमार ने यह बात नवस्नातक वकीलों को उनकी जिम्मेदारी का बोध कराते हुए कही। उन्होंने कहा कि जब कोई संस्था डगमगाने लगे, तो ऐसी आवाज उठनी चाहिए जिसे सुना और मजबूत किया जाए। यह वक्तव्य राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत स्वायत्तता पर जारी बहस के बीच आया है।
शिवकुमार ने अपनी शिक्षा के बारे में क्या साझा किया?
शिवकुमार ने बताया कि वे छात्र जीवन में चुनाव लड़ने के कारण समय पर स्नातक नहीं हो पाए थे और 46 47 वर्ष की आयु में, विधायक के रूप में चौथे कार्यकाल के दौरान, मैसूर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे खुशी का दिन बताया।
राष्ट्र प्रेस
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