एम.के. स्टालिन की अचानक तबीयत बिगड़ी, डीएमके ने 'मुप्पेरुम विझा' समारोह स्थगित किया
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के अचानक बीमार पड़ने के बाद पार्टी ने अपना सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण वार्षिक समारोह 'मुप्पेरुम विझा' स्थगित कर दिया है। यह भव्य आयोजन मंगलवार, 15 सितंबर 2026 की शाम चेन्नई स्थित अन्ना अरिवलयम के कलैगनार अरंगम में होने वाला था।
कार्यक्रम स्थगन की घोषणा
DMK के महासचिव दुरईमुरुगन ने आधिकारिक तौर पर समारोह स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नई तारीख की जानकारी बाद में दी जाएगी। मंगलवार की शाम के उत्सव से जुड़े तमाम कार्यक्रम भी अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं।
पार्टी ने तत्काल यह स्पष्ट नहीं किया कि स्टालिन को किस प्रकार की बीमारी हुई है अथवा उन्हें चिकित्सकीय आराम की सलाह दी गई है या नहीं। इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया।
पार्टी पदाधिकारियों में बढ़ी चिंता
दिन में ही चेन्नई में DMK के संस्थापक एवं तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई की जयंती के उत्सव में स्टालिन के शामिल न होने से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों में चिंता की लहर दौड़ गई थी। गौरतलब है कि 'मुप्पेरुम विझा' में स्टालिन की उपस्थिति परंपरागत रूप से अनिवार्य मानी जाती है।
समारोह के लिए पूरे तमिलनाडु से आए पार्टी कार्यकर्ताओं और पुरस्कार विजेताओं को कार्यक्रम के स्थगन की सूचना दी गई। इस वर्ष के आयोजन में पेरियार पुरस्कार, अन्ना पुरस्कार, कलैगनार पुरस्कार, पावेंधर पुरस्कार एवं एम.के. स्टालिन पुरस्कार दिए जाने थे।
'मुप्पेरुम विझा' का ऐतिहासिक महत्त्व
'मुप्पेरुम विझा' अर्थात 'त्रि-उत्सव' DMK के राजनीतिक कैलेंडर का सबसे अहम वार्षिक आयोजन है। यह समारोह तीन ऐतिहासिक अवसरों को एक साथ मनाता है — समाज-सुधारक ई.वी. रामासामी 'पेरियार' की जयंती (17 सितंबर, 1879, इरोड), DMK के संस्थापक सी.एन. अन्नादुरई 'अन्ना' की जयंती (15 सितंबर, 1909, कांचीपुरम) तथा डीएमके की स्थापना (17 सितंबर, 1949)।
इस आयोजन में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, सांस्कृतिक हस्तियों और द्रविड़ आंदोलन में योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी में व्यस्त थी।
द्रविड़ आंदोलन की विरासत
पेरियार ने आत्म-सम्मान आंदोलन का नेतृत्व करते हुए जाति-भेद, सामाजिक असमानता, अंधविश्वास और महिला अधिकारों की अनदेखी के विरुद्ध अभियान चलाया। उनके तर्कवादी एवं सामाजिक न्याय के सिद्धांतों ने द्रविड़ आंदोलन की वैचारिक नींव रखी।
अन्नादुरई ने 1949 में पेरियार की द्रविड़ कड़गम से अलग होकर DMK की स्थापना की। 1967 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने मद्रास राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। फरवरी 1969 में उनका निधन हो गया।
आगे की स्थिति
पार्टी नेतृत्व से उम्मीद है कि स्टालिन की सेहत और उपलब्धता का आकलन होने के बाद नई तारीख की घोषणा की जाएगी। इस बीच, तमिलनाडु में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में स्टालिन के स्वास्थ्य को लेकर अटकलें तेज़ हैं। पार्टी की ओर से स्वास्थ्य संबंधी विस्तृत जानकारी का इंतज़ार किया जा रहा है।