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हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी: सिंधिया ने 'उदंत मार्तंड' पर डाक टिकट जारी किया, 200 साल की विरासत को सलाम

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हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी: सिंधिया ने 'उदंत मार्तंड' पर डाक टिकट जारी किया, 200 साल की विरासत को सलाम

सारांश

हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पूरे होने पर नई दिल्ली में भव्य समारोह — सिंधिया ने 'उदंत मार्तंड' पर डाक टिकट जारी किया और चेताया कि AI व डीपफेक के दौर में निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

मुख्य बातें

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नई दिल्ली के IGNCA में 'हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी महोत्सव' में भाग लिया।
डाक विभाग ने 'उदंत मार्तंड' पर स्मारक डाक टिकट, फर्स्ट डे कवर और 'हिंदी पत्रकारिता: 200 साल की महागाथा' ग्रंथ जारी किया।
1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित 'उदंत मार्तंड' हिंदी का पहला समाचार पत्र था।
सिंधिया ने AI, फेक न्यूज़ और डीपफेक को आधुनिक पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती बताया।
IGNCA अध्यक्ष राम बहादुर राय और माधवराव सप्रे संग्रहालय के विजयदत्त श्रीधर को आयोजन के लिए विशेष बधाई दी गई।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 31 मई 2025 को नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में आयोजित 'हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी महोत्सव' में भाग लेकर हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को राष्ट्रीय मंच पर रेखांकित किया। इस अवसर पर उन्होंने डाक विभाग द्वारा 'उदंत मार्तंड' पत्रिका पर जारी स्मारक डाक टिकट, फर्स्ट डे कवर तथा 'हिंदी पत्रकारिता: 200 साल की महागाथा' ग्रंथ का विमोचन किया।

उदंत मार्तंड: राष्ट्र चेतना की पहली मशाल

सिंधिया ने कहा कि वर्ष 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित 'उदंत मार्तंड' ने भारतीय समाज को अपनी भाषा में अपनी आवाज़ दी और राष्ट्र चेतना की ऐसी मशाल प्रज्वलित की, जिसकी रोशनी आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रही है। उन्होंने इस पत्रिका को भारतीय जनमानस की वैचारिक जागृति का पहला औपचारिक दस्तावेज़ बताया।

गौरतलब है कि 'उदंत मार्तंड' हिंदी का पहला समाचार पत्र माना जाता है, जिसने उस दौर में जब देश पर औपनिवेशिक शासन था, जनता की भाषा में जनता की बात कही। इसकी स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने पर यह महोत्सव आयोजित किया गया।

स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी पत्रकारिता की भूमिका

सिंधिया ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में हिंदी पत्रकारिता की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के 'केसरी', गणेश शंकर विद्यार्थी के 'प्रताप' तथा महामना मदन मोहन मालवीय के 'अभ्युदय' जैसे पत्रों ने राष्ट्रहित और जनचेतना को नई ऊर्जा प्रदान की। उनके अनुसार, पत्रकारिता भारत में केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आंदोलन रही है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका को अक्सर औपचारिक इतिहास-लेखन में उचित स्थान नहीं मिलता। इस महोत्सव ने उस रिक्तता को भरने का प्रयास किया।

AI और फेक न्यूज़: आज की पत्रकारिता की चुनौतियाँ

वर्तमान दौर की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सिंधिया ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), फेक न्यूज़, डीपफेक और भ्रामक सूचनाओं के इस युग में पत्रकारिता की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि खबरों के बीच सत्य को पहचानना आज की सबसे बड़ी चुनौती है, और ऐसे समय में विश्वसनीय, निष्पक्ष एवं तथ्यपरक पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

आयोजकों को बधाई, विरासत को समर्पण

सिंधिया ने IGNCA के अध्यक्ष राम बहादुर राय तथा माधवराव सप्रे संग्रहालय के संस्थापक-संचालक विजयदत्त श्रीधर को इस ऐतिहासिक आयोजन के सफल संचालन के लिए विशेष बधाई दी। उन्होंने जारी किए गए स्मारक डाक टिकट और फर्स्ट डे कवर को भारत की वैचारिक विरासत और जनजागरण की उस परंपरा को सम्मान देने का अवसर बताया, जिसने समाज को निरंतर दिशा प्रदान की है।

उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में भी इस भावना को दोहराते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यह गौरवगाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, विचार और राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस समारोह की असली परीक्षा यह है कि क्या यह विरासत-स्मरण ठोस नीतिगत प्रतिबद्धता में बदलता है। सिंधिया ने AI और फेक न्यूज़ की चुनौती का उल्लेख किया, परंतु सरकार की ओर से मीडिया स्वतंत्रता और प्रेस की आर्थिक स्थिरता पर कोई ठोस रोडमैप नहीं आया। 200 साल पहले 'उदंत मार्तंड' को ब्रिटिश सरकार की उदासीनता के कारण बंद होना पड़ा था — आज की हिंदी पत्रकारिता डिजिटल एकाधिकार और विज्ञापन-निर्भरता की एक अलग तरह की उदासीनता से जूझ रही है, जिस पर इस उत्सव में चर्चा नहीं हुई।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी महोत्सव क्या है?
यह हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय समारोह है, जो नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में आयोजित हुआ। इसमें 'उदंत मार्तंड' पर स्मारक डाक टिकट और एक विशेष ग्रंथ का विमोचन किया गया।
'उदंत मार्तंड' क्या था और इसका महत्व क्यों है?
'उदंत मार्तंड' हिंदी का पहला समाचार पत्र था, जिसे 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने प्रकाशित किया था। इसने औपनिवेशिक काल में भारतीय समाज को अपनी भाषा में आवाज़ दी और राष्ट्र चेतना की नींव रखी।
सिंधिया ने आधुनिक पत्रकारिता की किन चुनौतियों का उल्लेख किया?
सिंधिया ने कहा कि AI, फेक न्यूज़ और डीपफेक के दौर में पत्रकारिता की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। उनके अनुसार, खबरों के बीच सत्य की पहचान आज की सबसे बड़ी चुनौती है।
इस समारोह में और कौन-कौन से प्रमुख व्यक्ति शामिल थे?
समारोह में IGNCA के अध्यक्ष राम बहादुर राय और माधवराव सप्रे संग्रहालय के संस्थापक-संचालक विजयदत्त श्रीधर की विशेष भूमिका रही। सिंधिया ने दोनों को इस ऐतिहासिक आयोजन के सफल संचालन के लिए बधाई दी।
स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी पत्रकारिता की क्या भूमिका रही?
सिंधिया के अनुसार, लोकमान्य तिलक के 'केसरी', गणेश शंकर विद्यार्थी के 'प्रताप' और मदन मोहन मालवीय के 'अभ्युदय' जैसे पत्रों ने स्वतंत्रता आंदोलन में जनजागरण का सशक्त माध्यम बनकर कार्य किया। पत्रकारिता उस दौर में राष्ट्र निर्माण का आंदोलन थी।
राष्ट्र प्रेस
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