राजा भोज और रानी कमलापति के स्मारक डाक टिकट जारी, सिंधिया ने बताया सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 25 मई 2026 को राजा भोज और रानी कमलापति के सम्मान में जारी स्मारक डाक टिकटों को भारत की सांस्कृतिक विरासत और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर की महत्वपूर्ण मान्यता करार दिया। सिंधिया के अनुसार, डाक विभाग की यह पहल देश की सभ्यतागत पहचान को संरक्षित करने और युवा पीढ़ी को भारत की ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक कदम है।
डाक टिकटों का महत्व
सिंधिया ने अपने बयान में कहा कि स्मारक डाक टिकट केवल प्रतीकात्मक वस्तुएँ नहीं हैं, बल्कि ये सामूहिक स्मृति को संरक्षित करने और पीढ़ी-दर-पीढ़ी नागरिकों में राष्ट्र की विरासत के प्रति जागरूकता फैलाने के शक्तिशाली माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि राजा भोज और रानी कमलापति को समर्पित इन टिकटों का विमोचन भारत के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के प्रति जन जागरूकता को और सुदृढ़ करेगा।
सांस्कृतिक चेतना के जीवंत प्रतीक
केंद्रीय मंत्री ने राजा भोज और रानी कमलापति को भारत की सांस्कृतिक चेतना के 'जीवंत प्रतीक' बताया। उन्होंने कहा कि ये दोनों ऐतिहासिक व्यक्तित्व केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं हैं — इतिहास, शासन और समाज में उनके योगदान से आज भी लोग प्रेरणा लेते हैं। गौरतलब है कि राजा भोज परमार वंश के महान शासक थे जिन्होंने धार और भोपाल क्षेत्र में विद्या, स्थापत्य और प्रशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया था, जबकि रानी कमलापति गोंड साम्राज्य की वीर रानी थीं जिनके नाम पर भोपाल के प्रमुख रेलवे स्टेशन का नामकरण किया जा चुका है।
'विकास भी, विरासत भी' का दृष्टिकोण
सिंधिया ने इस निर्णय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण से जोड़ा। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को पुनर्जीवित करने, संरक्षित करने और उनका जश्न मनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल महालोक और अन्य ऐतिहासिक स्थलों के पुनरुद्धार के माध्यम से विरासत-केंद्रित शासन को अपनी पहचान के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
आम जनता और युवा पीढ़ी पर असर
सिंधिया के अनुसार, इस पहल का सबसे बड़ा लाभ युवा पीढ़ी को मिलेगा, जो इन डाक टिकटों के माध्यम से भारत की समृद्ध परंपराओं और ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ सकेगी। डाक विभाग की ऐसी पहलें अतीत में भी महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों — जैसे सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल और विभिन्न राज्यों के लोक नायकों — को सम्मानित करने के लिए की जाती रही हैं। यह पहल मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करती है।
आगे की राह
इन स्मारक डाक टिकटों का विमोचन मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को केंद्र की नीतिगत प्राथमिकताओं में स्थान दिलाने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसी श्रृंखला में अन्य ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को भी इसी तरह सम्मानित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।