10 जुलाई 2026
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राजा भोज और रानी कमलापति के स्मारक डाक टिकट जारी, सिंधिया ने बताया सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

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राजा भोज और रानी कमलापति के स्मारक डाक टिकट जारी, सिंधिया ने बताया सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

सारांश

डाक विभाग ने राजा भोज और रानी कमलापति के सम्मान में स्मारक टिकट जारी किए — मध्य प्रदेश की दो ऐतिहासिक विभूतियाँ जो अब केंद्र की 'विकास भी, विरासत भी' नीति के प्रतीक बन रही हैं। सिंधिया ने इसे सभ्यतागत पहचान को संरक्षित करने की दिशा में सार्थक पहल बताया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 25 मई 2026 को राजा भोज और रानी कमलापति के स्मारक डाक टिकटों का स्वागत किया।
सिंधिया ने इन टिकटों को भारत की सांस्कृतिक विरासत और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर की महत्वपूर्ण मान्यता बताया।
इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' दृष्टिकोण से जोड़ा गया।
स्मारक टिकटों को सामूहिक स्मृति संरक्षण और युवा पीढ़ी को ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम बताया गया।
रानी कमलापति गोंड साम्राज्य की वीर रानी थीं, जिनके नाम पर भोपाल रेलवे स्टेशन का नामकरण किया जा चुका है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 25 मई 2026 को राजा भोज और रानी कमलापति के सम्मान में जारी स्मारक डाक टिकटों को भारत की सांस्कृतिक विरासत और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर की महत्वपूर्ण मान्यता करार दिया। सिंधिया के अनुसार, डाक विभाग की यह पहल देश की सभ्यतागत पहचान को संरक्षित करने और युवा पीढ़ी को भारत की ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

डाक टिकटों का महत्व

सिंधिया ने अपने बयान में कहा कि स्मारक डाक टिकट केवल प्रतीकात्मक वस्तुएँ नहीं हैं, बल्कि ये सामूहिक स्मृति को संरक्षित करने और पीढ़ी-दर-पीढ़ी नागरिकों में राष्ट्र की विरासत के प्रति जागरूकता फैलाने के शक्तिशाली माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि राजा भोज और रानी कमलापति को समर्पित इन टिकटों का विमोचन भारत के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के प्रति जन जागरूकता को और सुदृढ़ करेगा।

सांस्कृतिक चेतना के जीवंत प्रतीक

केंद्रीय मंत्री ने राजा भोज और रानी कमलापति को भारत की सांस्कृतिक चेतना के 'जीवंत प्रतीक' बताया। उन्होंने कहा कि ये दोनों ऐतिहासिक व्यक्तित्व केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं हैं — इतिहास, शासन और समाज में उनके योगदान से आज भी लोग प्रेरणा लेते हैं। गौरतलब है कि राजा भोज परमार वंश के महान शासक थे जिन्होंने धार और भोपाल क्षेत्र में विद्या, स्थापत्य और प्रशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया था, जबकि रानी कमलापति गोंड साम्राज्य की वीर रानी थीं जिनके नाम पर भोपाल के प्रमुख रेलवे स्टेशन का नामकरण किया जा चुका है।

'विकास भी, विरासत भी' का दृष्टिकोण

सिंधिया ने इस निर्णय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण से जोड़ा। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को पुनर्जीवित करने, संरक्षित करने और उनका जश्न मनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल महालोक और अन्य ऐतिहासिक स्थलों के पुनरुद्धार के माध्यम से विरासत-केंद्रित शासन को अपनी पहचान के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

आम जनता और युवा पीढ़ी पर असर

सिंधिया के अनुसार, इस पहल का सबसे बड़ा लाभ युवा पीढ़ी को मिलेगा, जो इन डाक टिकटों के माध्यम से भारत की समृद्ध परंपराओं और ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ सकेगी। डाक विभाग की ऐसी पहलें अतीत में भी महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों — जैसे सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल और विभिन्न राज्यों के लोक नायकों — को सम्मानित करने के लिए की जाती रही हैं। यह पहल मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करती है।

आगे की राह

इन स्मारक डाक टिकटों का विमोचन मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को केंद्र की नीतिगत प्राथमिकताओं में स्थान दिलाने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसी श्रृंखला में अन्य ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को भी इसी तरह सम्मानित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें विरासत-केंद्रित राजनीति को नीतिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। असली प्रश्न यह है कि क्या ये प्रतीकात्मक कदम ठोस संरक्षण बजट, शोध और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से भी जुड़ते हैं। मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक स्थलों की दशा और संग्रहालयों की फंडिंग की स्थिति इस प्रतिबद्धता की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा भोज और रानी कमलापति के स्मारक डाक टिकट क्यों जारी किए गए?
डाक विभाग ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को सम्मान देने के लिए ये टिकट जारी किए। केंद्रीय मंत्री सिंधिया के अनुसार, यह पहल युवा पीढ़ी को देश की ऐतिहासिक जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
राजा भोज कौन थे और उनका ऐतिहासिक महत्व क्या है?
राजा भोज परमार वंश के महान शासक थे जिन्होंने धार और भोपाल क्षेत्र में विद्या, स्थापत्य और प्रशासन में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे साहित्य और विज्ञान के संरक्षक के रूप में भी जाने जाते हैं और भारतीय सांस्कृतिक चेतना में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
रानी कमलापति कौन थीं?
रानी कमलापति गोंड साम्राज्य की वीर रानी थीं, जिन्होंने मध्य प्रदेश के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सम्मान में भोपाल के प्रमुख रेलवे स्टेशन का नाम 'रानी कमलापति रेलवे स्टेशन' रखा जा चुका है।
'विकास भी, विरासत भी' नीति क्या है?
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह दृष्टिकोण है जिसके तहत आर्थिक विकास के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित, पुनर्जीवित और सम्मानित किया जाता है। काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल महालोक जैसे पुनरुद्धार प्रकल्प इसी नीति के उदाहरण हैं।
स्मारक डाक टिकटों का आम नागरिकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
स्मारक डाक टिकट सामूहिक स्मृति को संरक्षित करने और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के प्रति जागरूकता फैलाने का माध्यम माने जाते हैं। ये विशेष रूप से युवा पीढ़ी को देश की समृद्ध परंपराओं और ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराने में सहायक होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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