डोडा के 19 वर्षीय यावर सलीम ने विकसित किया खीरे का हाइब्रिड पौधा, प्रति पौधा 100 किलो उत्पादन का दावा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के सुदूर पहाड़ी क्षेत्र गुंडोह से कृषि नवाचार की एक उल्लेखनीय कहानी सामने आई है। यहाँ के 19 वर्षीय युवा किसान यावर सलीम ने दावा किया है कि उन्होंने खीरे का एक ऐसा हाइब्रिड पौधा तैयार किया है, जिससे प्रति पौधा लगभग 100 किलोग्राम तक उत्पादन संभव है। यह दावा कृषि समुदाय में चर्चा का विषय बन गया है, हालाँकि इसकी स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
कैसे हुआ नवाचार
यावर सलीम के अनुसार, उन्हें बचपन से ही खेती-किसानी में गहरी रुचि रही है और उनका परिवार पीढ़ियों से कृषि से जुड़ा रहा है। इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत जिज्ञासा ने उन्हें खीरे की नई किस्म विकसित करने की दिशा में प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि उन्होंने दो अलग-अलग हाइब्रिड किस्मों को आपस में मिलाकर यह नया पौधा तैयार किया है। यावर का कहना है कि इस प्रक्रिया में किसी प्रयोगशाला की सुविधा नहीं थी — यह सब उनके अपने खेत में पारंपरिक परागण-आधारित विधि से हुआ।
उत्पादन और आमदनी का गणित
यावर सलीम ने बताया कि बाज़ार में खीरे की कीमत ₹40 से ₹50 प्रति किलोग्राम के बीच है। उनके अनुसार, यदि एक पौधे से 100 किलोग्राम खीरा निकलता है, तो एक पौधे से ही लगभग ₹4,000 की आय हो सकती है। यदि कोई किसान 10 ऐसे पौधे लगाता है, तो उसकी कुल आमदनी ₹40,000 तक पहुँच सकती है।
उन्होंने बताया कि उनका परिवार इसी खेती पर निर्भर है और वे खीरे की बिक्री से लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। यह दावा उल्लेखनीय है, क्योंकि डोडा जैसे पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में पारंपरिक फसलों की उत्पादकता सीमित रहती है।
किसानों से अपील
यावर ने कहा कि उनका लक्ष्य इस तकनीक को देश और दुनिया भर के किसानों तक पहुँचाना है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे खेती के आधुनिक और प्रयोगात्मक तरीकों को अपनाएँ और खीरे जैसी सब्जियों को 'मामूली फसल' मानने की सोच बदलें।
उनका मानना है कि छोटे और सीमांत किसान भी इस तरह के प्रयोग अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मज़बूत कर सकते हैं। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर सरकार किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती रही है।
विशेषज्ञ सत्यापन की दरकार
यह ध्यान देने योग्य है कि यावर सलीम का यह दावा कथित तौर पर उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नई हाइब्रिड किस्म की उत्पादन क्षमता की पुष्टि के लिए नियंत्रित परिस्थितियों में परीक्षण और कृषि विभाग या कृषि विश्वविद्यालयों से मान्यता आवश्यक होती है। अभी तक किसी अधिकृत संस्था ने इस किस्म का स्वतंत्र परीक्षण नहीं किया है।
यदि यह दावा सत्यापित होता है, तो यह जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि होगी। आने वाले समय में कृषि विभाग की भूमिका इस नवाचार को वैज्ञानिक आधार देने में निर्णायक होगी।