25 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुजरात के किसान दानुभाई सोलंकी की एवोकाडो क्रांति: ₹800–₹1,500/kg भाव, लाखों की कमाई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुजरात के किसान दानुभाई सोलंकी की एवोकाडो क्रांति: ₹800–₹1,500/kg भाव, लाखों की कमाई

सारांश

भावनगर के कोडिया गाँव के किसान दानुभाई सोलंकी ने 50 पौधों से शुरू कर एवोकाडो की वैज्ञानिक खेती को लाखों की कमाई में बदल दिया है। ₹800–₹1,500/kg के बाज़ार भाव और सरकारी बागवानी योजनाओं के सहारे वे पूरे गुजरात के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

मुख्य बातें

दानुभाई सोलंकी , कोडिया गाँव ( भावनगर ), ने 3-4 साल पहले 50 पौधों से एवोकाडो खेती शुरू की।
इस वर्ष 15 पौधे फलदायी हुए; प्रत्येक से लगभग 60 किलोग्राम उत्पादन।
बाज़ार में एवोकाडो का भाव ₹800 से ₹1,500 प्रति किलोग्राम तक है।
नेट हाउस, ग्रीन हाउस और ड्रिप सिंचाई से लागत घटाकर मुनाफा बढ़ाया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के निर्देश पर राज्य सरकार एवोकाडो, ड्रैगन फ्रूट, शतावरी व अंजीर की खेती के लिए किसानों को बागवानी सहायता दे रही है।
दानुभाई अब गाँव के अन्य किसानों को भी एवोकाडो खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

भावनगर जिले की तलजा तालुका के कोडिया गाँव के किसान दानुभाई सोलंकी ने एवोकाडो की वैज्ञानिक खेती को अपनाकर गुजरात के कृषि जगत में एक नई मिसाल कायम की है। गुजरात सरकार की बागवानी सहायता योजनाओं का लाभ उठाकर और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर वे आज लाखों रुपये की सालाना आमदनी कर रहे हैं। ड्रिप सिंचाई और नेट हाउस जैसी विधियों ने उनके फार्म को पूरे राज्य के प्रगतिशील किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बना दिया है।

एवोकाडो खेती की शुरुआत

दानुभाई सोलंकी ने बताया कि 3-4 साल पहले उन्होंने 50 पौधों से एवोकाडो की रोपाई शुरू की थी। इस वर्ष इनमें से 15 पौधे फल देने लगे हैं और प्रत्येक पौधे से लगभग 60 किलोग्राम फल का उत्पादन हो रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गुजरात की जलवायु में एवोकाडो की कुछ किस्में तो खूब बिकती हैं, जबकि कुछ अन्य किस्मों को बाज़ार में उतारने में कठिनाई होती है — इसलिए किस्म का चयन सोच-समझकर करना ज़रूरी है।

आधुनिक तकनीक का कमाल

दानुभाई पारंपरिक खेती के तरीकों पर निर्भर नहीं हैं। वे नेट हाउस, ग्रीन हाउस और ड्रिप सिंचाई का उपयोग करते हैं, जिससे पानी की खपत कम होती है और उत्पादन लागत भी नियंत्रित रहती है। गौरतलब है कि यह वही तकनीक है जिसे राज्य सरकार की बागवानी योजनाओं के तहत प्रोत्साहित किया जाता है — यानी सरकारी सहायता और किसान की मेहनत का यह मेल सफलता की असली वजह बनी।

बाज़ार में एवोकाडो की माँग और भाव

भावनगर के कृषि नायब नियामक एमबी बाघमसी के अनुसार, एवोकाडो को सर्वोत्तम फलों में गिना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन और स्वस्थ वसा की उच्च मात्रा होती है और शुगर का स्तर कम रहता है। इस कारण यह मधुमेह रोगियों के लिए भी उपयुक्त है। फिलहाल बाज़ार में एवोकाडो का भाव ₹800 से ₹1,500 प्रति किलोग्राम तक है, और उत्पादन हाथों-हाथ बिक जाता है।

सरकारी योजनाओं की भूमिका

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों को परंपरागत फसलों के साथ-साथ एवोकाडो, ड्रैगन फ्रूट, शतावरी और अंजीर जैसी नकदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। गांधीनगर के कृषि संयुक्त निदेशक बीजी राठौड़ ने बताया कि बागवानी विभाग 'डेंस फार्मिंग', नई फसलों की शुरुआत और मूल्य-संवर्धित उपज के लिए अलग-अलग सहायता योजनाएँ प्रदान करता है।

गाँव में बदलाव की लहर

कोडिया गाँव के किसान अजाभाई भादरका ने कहा कि दानुभाई की खेती देखने के लिए अब बाहर से भी लोग आते हैं — यह पूरे गाँव के लिए गर्व की बात है। दानुभाई अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ साझा कर रहे हैं ताकि वे भी एवोकाडो की खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें। यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात की कृषि नीति नकदी फसलों और बागवानी की ओर तेज़ी से मुड़ रही है — और दानुभाई जैसे किसान उस बदलाव की जीती-जागती मिसाल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि दानुभाई जैसी सफलता कुछ चुनिंदा किसानों तक सीमित न रहे।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दानुभाई सोलंकी ने एवोकाडो की खेती कैसे शुरू की?
दानुभाई सोलंकी ने भावनगर जिले के कोडिया गाँव में 3-4 साल पहले 50 पौधों से एवोकाडो की रोपाई शुरू की थी। गुजरात सरकार की बागवानी सहायता योजनाओं का लाभ उठाकर और ड्रिप सिंचाई व नेट हाउस जैसी आधुनिक विधियाँ अपनाकर उन्होंने उत्पादन बढ़ाया।
एवोकाडो का बाज़ार में क्या भाव है?
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल एवोकाडो का बाज़ार भाव ₹800 से ₹1,500 प्रति किलोग्राम तक है। इसकी औषधीय उपयोगिता और डायबिटीज-अनुकूल गुणों के कारण माँग अधिक रहती है और उपज जल्दी बिक जाती है।
गुजरात सरकार किसानों को एवोकाडो खेती के लिए क्या सहायता देती है?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार बागवानी विभाग के ज़रिए डेंस फार्मिंग, नई फसलों की शुरुआत और मूल्य-संवर्धित उपज के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। किसानों को एवोकाडो, ड्रैगन फ्रूट, शतावरी और अंजीर की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
एवोकाडो स्वास्थ्य के लिए क्यों फायदेमंद है?
भावनगर के कृषि नायब नियामक एमबी बाघमसी के अनुसार, एवोकाडो में उच्च मात्रा में प्रोटीन और स्वस्थ वसा होती है तथा शुगर का स्तर कम होता है। इसी वजह से मधुमेह रोगी भी इसे खा सकते हैं और इसकी वैश्विक माँग लगातार बढ़ रही है।
क्या गुजरात की जलवायु एवोकाडो खेती के लिए उपयुक्त है?
दानुभाई सोलंकी के अनुभव के अनुसार, गुजरात में एवोकाडो की खेती संभव है लेकिन किस्म का चुनाव महत्वपूर्ण है। कुछ किस्में स्थानीय बाज़ार में अच्छी बिकती हैं जबकि अन्य किस्मों को बेचने में कठिनाई होती है, इसलिए कृषि विभाग के मार्गदर्शन में सही किस्म का चयन करना ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले