क्या नूंह के किसान बागवानी की नई तकनीकों से आय में वृद्धि कर रहे हैं?

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क्या नूंह के किसान बागवानी की नई तकनीकों से आय में वृद्धि कर रहे हैं?

सारांश

हरियाणा के नूंह जिले में किसान बागवानी की नई तकनीकों से अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं। यह बदलाव उन्हें मुनाफा कमाने में मदद कर रहा है और उनके जीवन में खुशहाली ला रहा है। जानें, कैसे ये तकनीकें किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही हैं।

मुख्य बातें

बागवानी तकनीक से किसानों की आय में वृद्धि।
ड्रिप सिंचाई और टनल तकनीक का उपयोग।
पानी की बचत और फसल की गुणवत्ता में सुधार।
किसानों को सब्सिडी और अनुदान राशि मिल रही है।
आसपास के किसान भी बागवानी योजनाओं से जुड़ रहे हैं।

नूंह, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा के नूंह जिले के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी की आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बेहतर लाभ कमा रहे हैं। इन नई तकनीकों ने न केवल किसानों की आय में वृद्धि की है, बल्कि उनके चेहरों पर भी खुशी की चमक देखने को मिल रही है।

बागवानी विभाग के सहयोग से किसान ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और टनल तकनीक का उपयोग कर कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इससे खेती अब लाभ का सौदा बनती जा रही है। पिनगवां ब्लॉक के रहपुवा और सटकपुरी गांवों में किसान विशेष रूप से सब्जी और फल वाली बागवानी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

पानी की बचत को ध्यान में रखते हुए, ड्रिप प्रणाली के माध्यम से मल्चिंग और टनल में खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, घीया, तोरी और करेला जैसी फसलों की खेती की जा रही है। इस प्रक्रिया ने सिंचाई में पानी की खपत को कम करने के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता और पैदावार में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।

रहपुवा गांव के किसान जलालुद्दीन अहमद ने बताया कि उन्होंने ननहैम्स कंपनी की तरबूज की किस्म लगाई है, जिससे प्रति एकड़ 70–75 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो रही है। उनकी कुल लागत करीब 50-60 हजार रुपए है, जबकि दिल्ली की मंडी में तरबूज 3,000 से 3,500 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है। इससे किसान को एक एकड़ से लगभग दो लाख रुपए तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वे खरबूजा, खीरा, करेला, तरबूज, टमाटर आदि की खेती करते हैं। 20 साल पहले इसकी शुरुआत की थी, अब सरकार की तरफ से सब्सिडी भी मिल रही है।

किसान मोहम्मद इरशाद ने कहा कि पहले हम साधारण तरीके से खेती करते थे, लेकिन बाद में नई तकनीक की जानकारी मिली, जिससे हमें फायदा हो रहा है। कीड़ों और ओलों से बचाव हो रहा है। तीस–चालीस एकड़ में हम खेती कर रहे हैं, जिसमें कई प्रकार की सब्जियां हैं।

इस सफलता को देखकर आसपास के किसान भी बागवानी विभाग की योजनाओं से जुड़ने लगे हैं।

बागवानी विभाग के जिला अधिकारी डॉ. अब्दुल रज्जाक द्वारा क्षेत्र का निरीक्षण किया गया। इस दौरान बताया गया कि विभाग द्वारा किसानों को ड्रिप सिस्टम, मल्चिंग, टनल खेती सहित विभिन्न मदों में अनुदान राशि उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही किसानों को बेहतर फसल उत्पादन और सही दामों पर विपणन के तरीकों की भी जानकारी दी जा रही है। इससे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का किसानों की आय बढ़ाने का सपना धरातल पर साकार होता नजर आ रहा है।

जिला अधिकारी डॉ. अब्दुल रज्जाक का कहना है कि नूंह में किसान नई तकनीक से खेती कर रहे हैं। उन्हें सब्सिडी दी जा रही है और ये लोग कई तरह के फल और सब्जियां उगा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां नूंह जिले के किसान नई तकनीकों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि कृषि में नवाचार कैसे ग्रामीण जीवन को बदल सकता है और किसानों की आय को बढ़ा सकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बागवानी की नई तकनीकों से किसानों को क्या लाभ हुआ है?
किसानों की आय में वृद्धि हुई है और फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
ड्रिप सिंचाई का उपयोग कैसे किया जाता है?
ड्रिप सिंचाई प्रणाली से पानी की खपत कम होती है और फसलों को बेहतर तरीके से सींचा जा सकता है।
किसान किन फसलों की खेती कर रहे हैं?
किसान तरबूज, खरबूजा, टमाटर और अन्य सब्जियों की खेती कर रहे हैं।
सरकार से किसानों को क्या सहायता मिल रही है?
किसानों को नई तकनीकों के लिए सब्सिडी और अनुदान राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
क्या बागवानी विभाग की योजनाओं में भागीदारी बढ़ रही है?
हां, आसपास के किसान भी बागवानी विभाग की योजनाओं में रुचि दिखा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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