नीरज पटेल की सफलता: सब्सिडी से हुई जरबेरा की खेती में लाखों की कमाई

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नीरज पटेल की सफलता: सब्सिडी से हुई जरबेरा की खेती में लाखों की कमाई

सारांश

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किसान नीरज पटेल ने सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर जरबेरा फूलों की खेती से अपनी किस्मत बदली है। उनकी सफलता ने अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है।

मुख्य बातें

सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करना आवश्यक है।
आधुनिक कृषि तकनीकें किसानों की आय बढ़ा सकती हैं।
जरबेरा फूलों की खेती में निरंतर मांग है।
पॉलीहाउस तकनीक से उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
युवा किसान प्रेरणा स्रोत बन सकते हैं।

लखनऊ, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं की मदद से किसान अब पारंपरिक खेती से कदम बढ़ाकर आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। बाराबंकी जिले के युवा किसान नीरज पटेल इस बदलाव का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरे हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत प्राप्त सब्सिडी और तकनीकी सहयोग से उन्होंने पॉलीहाउस में जरबेरा फूलों की खेती शुरू की है, जिससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके आस-पास के लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बनाए हैं।

नीरज पटेल ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती को अपना पेशा बनाने का निर्णय लिया। उनके परिवार में पारंपरिक खेती की परंपरा थी, लेकिन नीरज कुछ नया और लाभकारी करना चाहते थे। एक कार्यक्रम में उन्हें जरबेरा फूलों की खेती और पॉलीहाउस तकनीक के बारे में जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया।

इस जानकारी के आधार पर उन्होंने आधुनिक तरीके से फूलों की खेती शुरू करने का निश्चय किया। सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत उन्हें वर्ष 2018 में लगभग 29.5 लाख रुपए का ऋण मिला और साथ ही 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ भी मिला। इस सहायता से उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया, जिसकी कुल लागत लगभग 70 से 75 लाख रुपए आई।

सरकारी सहायता के कारण यह महंगी तकनीक अपनाना उनके लिए संभव हो पाया। वर्तमान में नीरज के पॉलीहाउस में लगभग 25 हजार जरबेरा के पौधे हैं, जो एक बार लगाने के बाद लगभग छह वर्षों तक उत्पादन देते हैं। आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से पौधों को बूंद-बूंद पानी दिया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

जरबेरा फूलों की बाजार में निरंतर मांग बनी रहती है। शादी-विवाह, सजावट और विभिन्न आयोजनों में इन फूलों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, जिससे उनकी बिक्री में कोई समस्या नहीं आती।

नीरज बताते हैं कि सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें सालाना लगभग 8 से 10 लाख रुपए की शुद्ध आय होती है। उनकी इस पहल से गाँव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और उच्च लाभ वाली खेती की ओर रुख कर रहे हैं। उनकी यह सफलता सरकारी योजनाओं के सही उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रभावी प्रयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीरज पटेल ने किस प्रकार की खेती शुरू की?
नीरज पटेल ने पॉलीहाउस में जरबेरा फूलों की खेती शुरू की।
सरकार से नीरज को कितनी सब्सिडी मिली?
नीरज को सरकार से 50 प्रतिशत सब्सिडी मिली।
जरबेरा फूलों की खेती से नीरज को कितनी आय होती है?
नीरज को सालाना लगभग 8 से 10 लाख रुपए की शुद्ध आय होती है।
पॉलीहाउस की स्थापना की कुल लागत क्या थी?
पॉलीहाउस की स्थापना की कुल लागत लगभग 70 से 75 लाख रुपए थी।
नीरज पटेल की सफलता का मुख्य कारण क्या है?
नीरज की सफलता का मुख्य कारण सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रभावी प्रयोग है।
राष्ट्र प्रेस
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