क्या डॉन अबू सलेम ने भाई के निधन के बाद मांगी इमरजेंसी पैरोल?
सारांश
Key Takeaways
- अबू सलेम ने इमरजेंसी पैरोल के लिए याचिका दायर की है।
- उन्होंने पारिवारिक रस्मों में शामिल होने की अनुमति मांगी है।
- बॉम्बे हाईकोर्ट इस मामले पर सुनवाई कर रहा है।
- यह मामला पारिवारिक संबंधों और धार्मिक रस्मों से जुड़ा है।
- अदालत का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने अपने बड़े भाई के निधन के उपरांत इमरजेंसी पैरोल की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाकर पारिवारिक रस्मों में शामिल होने की अनुमति मांगी है।
याचिका के अनुसार, अबू सलेम के बड़े भाई अबू हाकिम अंसारी का 14 नवंबर 2025 को निधन हुआ। सलेम ने उन्हें पिता समान बताया और कहा कि वह 40वें दिन की रस्में, कुरान ख्वानी, कब्रिस्तान में दुआ और परिवार से मिलने के लिए अस्थायी रूप से जेल से बाहर जाना चाहते हैं।
अबू सलेम की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कुछ समय के लिए उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जाने की अनुमति मांगी गई है।
याचिका में अबू सलेम ने कहा है कि उसके बड़े भाई का निधन हो गया है और वह परिवार के सदस्यों से मिलना चाहता है। साथ ही, उसने धार्मिक रस्मों में शामिल होने और अपने भाई की कब्र पर जाने की अनुमति भी मांगी है। अबू सलेम का कहना है कि यह उसके लिए भावनात्मक रूप से बहुत कठिन समय है और परिवार के बीच रहना उसके लिए जरूरी है।
अबू सलेम ने अदालत को बताया कि जब उसका भाई गंभीर रूप से बीमार था, तब उसने पैरोल के लिए आवेदन किया था, लेकिन उस पर समय पर सुनवाई नहीं हो पाई। अब भाई के निधन के बाद उसने इमरजेंसी पैरोल के लिए फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कानूनी प्रक्रिया और अदालतों की छुट्टियों के कारण पहले आवेदन पर निर्णय नहीं हो पाया।
वर्तमान में, अबू सलेम नासिक सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है। उसकी ओर से दायर याचिका में मानवीय आधार पर राहत की मांग की गई है। अब बॉम्बे हाई कोर्ट इस मामले में आगे सुनवाई करेगा और तय करेगा कि अबू सलेम को इमरजेंसी पैरोल दी जाए या नहीं।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम सी. चांडक की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने टिप्पणी की कि मुस्लिम परंपरा के अनुसार 40 दिनों की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है। इस पर सलेम की ओर से पेश अधिवक्ता फरहाना शाह ने दलील दी कि याचिका समय पर दायर की गई थी, लेकिन शीतकालीन अवकाश के कारण उस पर सुनवाई नहीं हो सकी।