डॉ. राजेंद्र रूपनावर आत्महत्या: रोहित पवार ने माँगी एसआईटी जाँच, ₹1 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने डॉ. राजेंद्र रूपनावर के आत्महत्या मामले में महाराष्ट्र सरकार से विशेष जाँच दल (एसआईटी) के गठन, परिजनों को ₹1 करोड़ मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग की है। उन्होंने कहा कि एक गरीब परिवार से आए युवा डॉक्टर को सिर्फ इसलिए अपनी जान गँवानी पड़ी क्योंकि उन्होंने नियमों का पालन करते हुए एक प्रभावशाली नेता के दबाव के सामने झुकने से इनकार किया।
मुख्य घटनाक्रम
डॉ. राजेंद्र रूपनावर एक सामान्य परिवार से थे और सरकारी कॉलेज से चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर बने थे। वे जल्द ही एमडी की परीक्षा देने वाले थे। रोहित पवार के अनुसार, एक दिन किसी बड़े नेता का पीए और सिक्योरिटी गार्ड वहाँ पहुँचा और डॉक्टर पर नियमों की अवहेलना करते हुए प्रमाणपत्र जारी करने का दबाव बनाया। जब डॉ. रूपनावर ने नियमों का हवाला देते हुए मना किया, तो उन्हें धमकियाँ दी गईं, जिससे वे भावनात्मक रूप से गहरे आघात में चले गए।
रोहित पवार ने बताया कि जुलाई में भी डॉक्टर ने आत्महत्या का प्रयास किया था, लेकिन लोगों ने उन्हें रोक लिया। दो-तीन दिन पहले फिर ऐसा प्रयास हुआ और इस बार चिकित्सकीय उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों से मुलाकात और एफआईआर पर सवाल
रोहित पवार ने बताया कि डॉक्टर के परिजनों से मुलाकात में सामने आया कि प्राथमिकी (एफआईआर) में आरोपी कोंडे देशमुख का नाम शामिल नहीं है और सिक्योरिटी ऑफिसर का नाम भी दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित किया गया है, लेकिन मौजूदा न्याय व्यवस्था पर कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हम आरोपी को किसी भी कीमत पर कानून के शिकंजे से बचने नहीं देंगे।'
सरकार से माँगें
रोहित पवार ने सरकार के सामने तीन प्रमुख माँगें रखीं — पहली, परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा; दूसरी, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी; और तीसरी, जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कार्रवाई जिससे वह 10 वर्षों तक सलाखों से बाहर न आ सके। उन्होंने एसआईटी गठन के साथ जाँच के लिए दो महीने की समयसीमा तय करने की माँग भी की।
हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इससे पहले भी कई मामलों में एसआईटी का गठन हो चुका है, लेकिन जाँच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई — यह एक बड़ी विडंबना है जिस पर वे खुद सवाल उठाते हैं।
अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया
मुंबई के एक अस्पताल में बुर्का विवाद पर रोहित पवार ने कहा कि अस्पताल में पोशाक को लेकर बहस करना 'अर्थविहीन' है और इस भूमि पर किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. रूपनावर के साथ जो हुआ वह इसलिए हुआ क्योंकि वे गरीब थे — और राज्य में इस तरह का भेदभाव लगातार जारी है।
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे के बारे में उन्होंने कहा कि वे एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और सरकार व उनके बीच जल्द संवाद होगा। मराठा आरक्षण की जटिलताओं को सुलझाने के लिए संसद का रास्ता अपनाना होगा।
जीडीपी वृद्धि पर उन्होंने कहा कि जो आँकड़े सामने आ रहे हैं वे 'सामान्य जीडीपी' हैं, 'वास्तविक जीडीपी' नहीं — और महँगाई भी इसके पीछे एक बड़ा कारण है। उनके अनुसार, केवल आँकड़ों के आधार पर सरकार की प्रशंसा करना उचित नहीं है।
आगे क्या होगा
रोहित पवार ने साफ किया कि वे इस मामले में हर स्तर पर दबाव बनाए रखेंगे। एसआईटी जाँच और मुआवजे की माँग पर सरकार की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। यह मामला महाराष्ट्र में डॉक्टरों की सुरक्षा और सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में राजनीतिक दखलंदाजी के व्यापक सवाल को फिर से केंद्र में ले आया है।