11 अक्टूबर 2026
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डीआरआई ने विशाखापत्तनम के पास ₹8.98 करोड़ का सोना जब्त किया, दो गिरफ्तार; बांग्लादेश तस्करी नेटवर्क का खुलासा

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डीआरआई ने विशाखापत्तनम के पास ₹8.98 करोड़ का सोना जब्त किया, दो गिरफ्तार; बांग्लादेश तस्करी नेटवर्क का खुलासा

सारांश

डीआरआई ने 8-9 अक्टूबर की रात विशाखापत्तनम के पास हाई-स्पीड पीछा कर ₹8.98 करोड़ का सोना जब्त किया। बांग्लादेश सीमा से लाए गए इस सोने को हैदराबाद पहुँचाया जाना था। पूर्वी भारत में एक साथ चले अभियान में कुल ₹11.50 करोड़ से अधिक का सोना बरामद, छह गिरफ्तार।

मुख्य बातें

डीआरआई ने 8-9 अक्टूबर 2026 को विशाखापत्तनम के पास एक कार से ₹8.98 करोड़ मूल्य का 5,832.90 ग्राम सोना जब्त किया।
सोना कार की सीट के नीचे गुप्त खाने में छिपाकर कोलकाता से हैदराबाद ले जाया जा रहा था।
सोना कथित तौर पर भारत-बांग्लादेश सीमा के ज़रिए तस्करी कर लाया गया था।
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
पूर्वी क्षेत्र में एक साथ चले अभियान में ₹11.50 करोड़ से अधिक का लगभग 7.8 किलोग्राम सोना बरामद, कुल 6 गिरफ्तारियाँ ।
डंकुनी टोल प्लाजा पर 50 सोने की ईंटें (~6.8 किग्रा, ₹10 करोड़) और मालदा टाउन व न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों पर ~1 किग्रा सोना (₹1.5 करोड़) भी जब्त।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 8-9 अक्टूबर 2026 की रात विशाखापत्तनम के निकट एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाई-स्पीड पीछा करने के बाद ₹8.98 करोड़ मूल्य का 5,832.90 ग्राम सोना जब्त किया। अधिकारियों के अनुसार, यह सोना भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते तस्करी कर कोलकाता से हैदराबाद ले जाया जा रहा था। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम: पीछा और बरामदगी

खुफिया सूचना के आधार पर डीआरआई अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर कड़ी निगरानी तैनात की। काफी देर तक पीछा करने के बाद उन्होंने संदिग्ध कार को रोका, जिसमें दो व्यक्ति सवार थे। वाहन की व्यापक तलाशी के दौरान अधिकारियों को सामने वाली सह-यात्री सीट के पास पैरों की जगह के नीचे एक विशेष रूप से निर्मित गुप्त खाना मिला।

उस खाने से तीन पैकेट बरामद किए गए, जिनमें 999 शुद्धता वाला 24-कैरेट सोना था। बरामद सोने का कुल वजन 5,832.90 ग्राम और बाज़ार मूल्य ₹8.98 करोड़ आँका गया। अधिकारियों ने सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत सोने को जब्त किया।

आरोपियों पर कार्रवाई

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। डीआरआई ने बताया कि यह सोना कथित तौर पर भारत-बांग्लादेश सीमा से अवैध रूप से देश में लाया गया था और आगे हैदराबाद तक पहुँचाया जाना था।

व्यापक अभियान: पूर्वी क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई

यह बरामदगी एक बड़े समन्वित अभियान का हिस्सा है। डीआरआई ने रविवार को जारी बयान में खुलासा किया कि 8-9 अक्टूबर को पूर्वी क्षेत्र में चलाए गए अभियानों में कुल लगभग 7.8 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया गया, जिसकी कुल कीमत ₹11.50 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।

पश्चिम बंगाल में डंकुनी टोल प्लाजा पर एक चार पहिया वाहन से 50 सोने की ईंटें जब्त की गईं, जिनका वजन लगभग 6.8 किलोग्राम और अनुमानित मूल्य ₹10 करोड़ था। यह वाहन बांग्लादेश सीमा के निकट स्थित बनपुर से कोलकाता की ओर जा रहा था और उसमें चार लोग सवार थे।

इसी दिन पश्चिम बंगाल में डीआरआई की टीमों ने मालदा टाउन रेलवे स्टेशन और न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों में सवार यात्रियों को रोका। उनके पास से लगभग 1 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब ₹1.5 करोड़ बताई गई।

तस्करी नेटवर्क का खुलासा

अधिकारियों ने बताया कि इन अभियानों से सड़क और रेलवे नेटवर्क के ज़रिए सीमावर्ती क्षेत्रों से कोलकाता तक सोने की तस्करी के एक सुनियोजित तंत्र का पर्दाफाश हुआ है। गौरतलब है कि डीआरआई ने हाल के महीनों में बांग्लादेश सीमा से सोने की तस्करी पर अपनी कार्रवाई को उल्लेखनीय रूप से तेज किया है। इन समन्वित छापों में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

आगे क्या होगा

जब्त सोने और गिरफ्तार आरोपियों के मामले में आगे की जाँच जारी है। डीआरआई की यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊँचाई पर हैं, जिससे तस्करी के प्रलोभन में वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एजेंसी और अधिक व्यापक नेटवर्क का भंडाफोड़ कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

डंकुनी और पश्चिम बंगाल के रेलवे स्टेशनों पर एक ही रात की समन्वित कार्रवाई यह संकेत देती है कि डीआरआई के पास पहले से परिपक्व खुफिया नेटवर्क था — यह छिटपुट कार्रवाई नहीं थी। असली सवाल यह है कि सड़क और रेल दोनों मार्गों का एक साथ उपयोग करने वाला यह तस्करी तंत्र कितने समय से सक्रिय था और क्या यह पहली बार पकड़ा गया है। 24-कैरेट सोने की ऊँची अंतरराष्ट्रीय कीमतें और भारत-बांग्लादेश सीमा की लंबाई इस व्यापार को मुनाफे का सौदा बनाती है। जब तक तस्करी नेटवर्क के सरगना तक कार्रवाई नहीं पहुँचती, ये गिरफ्तारियाँ आपूर्ति श्रृंखला की कड़ियाँ ही साबित होंगी।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरआई ने विशाखापत्तनम के पास क्या जब्त किया?
डीआरआई ने 8-9 अक्टूबर 2026 की रात विशाखापत्तनम के पास एक कार से 5,832.90 ग्राम 24-कैरेट सोना जब्त किया, जिसका बाज़ार मूल्य ₹8.98 करोड़ है। सोना कार की सीट के नीचे विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खाने में छिपाकर रखा गया था।
यह सोना कहाँ से आया था और कहाँ ले जाया जा रहा था?
अधिकारियों के अनुसार, यह सोना भारत-बांग्लादेश सीमा के ज़रिए तस्करी कर भारत लाया गया था और कोलकाता से हैदराबाद पहुँचाया जाना था। जब्त सोने को 'विदेशी मूल' का बताया गया है।
इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया?
विशाखापत्तनम मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिन्होंने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा। पूर्वी क्षेत्र में उसी रात के समन्वित अभियान में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया।
डीआरआई के व्यापक अभियान में और क्या बरामद हुआ?
8-9 अक्टूबर को पूर्वी क्षेत्र में चले अभियान में डंकुनी टोल प्लाजा पर ~6.8 किलोग्राम सोना (₹10 करोड़), और मालदा टाउन व न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशनों पर ~1 किलोग्राम सोना (₹1.5 करोड़) जब्त किया गया। कुल मिलाकर लगभग 7.8 किलोग्राम सोना, जिसकी कीमत ₹11.50 करोड़ से अधिक है, बरामद किया गया।
सोने की तस्करी के लिए किन मार्गों का उपयोग किया जा रहा था?
डीआरआई के अनुसार, तस्कर सीमावर्ती क्षेत्रों से कोलकाता और आगे अन्य शहरों तक सोना पहुँचाने के लिए सड़क और रेलवे नेटवर्क दोनों का उपयोग कर रहे थे। एजेंसी ने बांग्लादेश से सीमा पार सोने की तस्करी पर अपनी कार्रवाई हाल के समय में तेज की है।
राष्ट्र प्रेस
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