दूधेश्वर वेद विद्यालय का रजत जयंती समारोह: 25 वर्षों से वैदिक शिक्षा की अखंड ज्योति जला रहा गाजियाबाद का यह संस्थान
सारांश
मुख्य बातें
गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर नाथ मंदिर परिसर में संचालित दूधेश्वर वेद विद्यालय ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर 18 जुलाई को भव्य रजत जयंती समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से पधारे महामंडलेश्वर, संत-महात्मा, धर्माचार्य और अनेक धार्मिक हस्तियों ने सहभागिता की। सनातन धर्म और वैदिक परंपराओं के संरक्षण को समर्पित यह संस्थान उत्तर प्रदेश में वैदिक शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
समारोह का आध्यात्मिक वातावरण
कार्यक्रम में चारों वेदों के मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और संतों के प्रवचनों से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से आवेशित रहा। समारोह के दौरान वैदिक संस्कृति, सनातन धर्म तथा भारतीय परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन पर गहन मंथन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित रहे।
पीठाधीश्वर महंत नारायण गिरी का संदेश
दूधेश्वर नाथ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत नारायण गिरी ने कहा कि दूधेश्वर वेद विद्यालय पिछले 25 वर्षों से वैदिक शिक्षा और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। उन्होंने बताया कि यहाँ से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश और विदेश में भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं तथा सनातन मूल्यों का प्रसार कर रहे हैं। महंत गिरी ने यह भी रेखांकित किया कि बदलते समय में वैदिक शिक्षा को नई पीढ़ी तक पहुँचाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
धर्मगुरुओं और विशिष्ट अतिथियों की प्रतिक्रियाएँ
समारोह में उपस्थित आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य वैदिक और सनातन संस्कृति के संरक्षण को एक नई दिशा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि संतों की उपस्थिति में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। आचार्य कृष्णम ने यह भी जोड़ा कि भारतीय परंपराओं और संस्कारों को आगे बढ़ाने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आज़म खान की यूनिवर्सिटी से जुड़े न्यायालय के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले भी कई मंदिर तोड़े गए हैं और उस समय मौन रहने वाले लोग अब अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों की स्थापना स्वागत योग्य है, किंतु सभी शिक्षण संस्थानों को कानून के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि दूधेश्वर नाथ मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति, शिक्षा और संस्कारों का भी प्रमुख केंद्र है। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में स्वयंभू शिवलिंग, गौशाला और वेद विद्यालय एक साथ संचालित हैं, और यहाँ से निकले विद्यार्थी देश-विदेश में भारतीय संस्कृति के वाहक बने हुए हैं। मौलाना जर्जिस के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि ऐसे बयानों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।
दूधेश्वरनाथ मठ: गाजियाबाद की प्राचीन धरोहर
महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद ने दूधेश्वरनाथ मठ को गाजियाबाद की प्राचीन धरोहर बताते हुए कहा कि यह इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। गौरतलब है कि यह मठ और इसका वेद विद्यालय दशकों से उत्तर प्रदेश में वैदिक परंपराओं की निरंतरता बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाते आए हैं।
आगे की राह
रजत जयंती समारोह के साथ ही संस्थान ने अगले 25 वर्षों के लिए वैदिक शिक्षा के विस्तार और नई पीढ़ी तक सनातन मूल्यों की पहुँच सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है। विभिन्न राज्यों से आए संतों और धर्माचार्यों ने इस दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।