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दशहरे पर शस्त्र पूजन: मथुरा में 6 दिसंबर को कृष्ण मंदिर के पास ढाँचा गिराने का संकल्प

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दशहरे पर शस्त्र पूजन: मथुरा में 6 दिसंबर को कृष्ण मंदिर के पास ढाँचा गिराने का संकल्प

सारांश

दशहरे के अवसर पर मथुरा में शस्त्र पूजन के बीच चित्रगुप्त पीठ प्रमुख डॉ. स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 6 दिसंबर को श्री कृष्ण मंदिर के पास स्थित प्रस्तावित ढाँचे को गिराने का संकल्प लिया — ऐसी तारीख जो 1992 से ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील रही है।

मुख्य बातें

चित्रगुप्त पीठ प्रमुख डॉ.
स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 6 दिसंबर को मथुरा में कारसेवा की घोषणा की।
विजयदशमी अनुष्ठानों में श्री कृष्ण मंदिर के पास ढाँचा गिराने के संकल्प के साथ हथौड़े, छेनी, लोहदंड और फावड़ों की पूजा की गई।
महाराज ने कहा कि औरंगजेब की किसी भी निशानी को नहीं छोड़ा जाएगा।
अयोध्या में पूर्व बाबरी मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी ने दशहरे पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं।
जम्मू-कश्मीर सहित देशभर में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने विजयदशमी पर्व धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया।

देशभर में विजयदशमी 2026 का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, इस बीच मथुरा से एक उल्लेखनीय बयान सामने आया है। चित्रगुप्त पीठ के प्रमुख डॉ. स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 6 दिसंबर को कारसेवा की घोषणा की है, जिसके अंतर्गत श्री कृष्ण मंदिर के निकट स्थित एक प्रस्तावित ढाँचे को गिराने का संकल्प लिया गया है। विजयदशमी के अनुष्ठानों के दौरान इस अभियान के प्रतीक के रूप में हथौड़ों, छेनियों, लोहदंड और फावड़ों की पूजा की गई।

शस्त्र पूजन का संकल्प

डॉ. स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा, 'शस्त्र और अस्त्र दोनों का पूजन किया गया। जिन अस्त्रों का पूजन किया गया, उनमें बड़े-बड़े हथौड़े, घन, छेनी और फावड़े जैसी बहुत सी चीजें हैं। समय बहुत नजदीक आ चुका है। 6 दिसंबर को गुंबद को गिराने का संकल्प है।' उन्होंने आगे कहा, 'फावड़े के पूजन के पीछे की वजह यह है कि जैसे-जैसे हथौड़े बजेंगे तो मलबा गिरेगा। जब मलबा गिरेगा तो उसे हटाने का काम फावड़े से होगा। हम तुरंत ही सफाई करते रहेंगे क्योंकि हम औरंगजेब की किसी भी निशानी को छोड़ना नहीं चाहते।'

गौरतलब है कि 6 दिसंबर की तारीख ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है — इसी दिन 1992 में बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिरा था। ऐसे में यह घोषणा सांप्रदायिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है और सुरक्षा एजेंसियों की नज़र इस पर होगी।

अयोध्या से इकबाल अंसारी का संदेश

अयोध्या में बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने दशहरे पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा, 'दशहरा और नवरात्रि बहुत ही शुभ अवसर हैं। हमारा देश देवी-देवताओं की कृपा से धन्य है और लोगों की आस्था है कि इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था, जिससे राम राज्य की शुरुआत हुई। पूरे देश के लोग भगवान राम का सम्मान करते हैं।'

जम्मू-कश्मीर में विजयदशमी

जम्मू और कश्मीर में भी विजयदशमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक सदस्य ने कहा, 'यह त्योहार अधर्म पर धर्म की जीत और बुराई के विनाश का प्रतीक है। हमारे सनातन धर्म में हर वर्ष विजयदशमी इसी उपलक्ष्य में मनाई जाती है।'

क्या होगा आगे

मथुरा में 6 दिसंबर को प्रस्तावित कारसेवा को लेकर प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियों पर फ़िलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़े कई मामले अदालतों में विचाराधीन हैं। आने वाले हफ्तों में राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर सबकी नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब यही तारीख मथुरा के लिए इस्तेमाल की जा रही है। यह घोषणा एक धार्मिक आयोजन से आगे जाकर राजनीतिक संदेश देती है, और ऐसे समय में आई है जब मथुरा विवाद के कई मामले न्यायालयों में लंबित हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन बयानों को त्योहारी रंग में रंग देती है, जबकि असली सवाल यह है कि प्रशासन और न्यायपालिका इस पर क्या रुख अपनाते हैं। बिना किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया के यह घोषणा हवा में लटकी है — और इसका असर जमीन पर क्या होगा, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मथुरा में 6 दिसंबर को क्या करने का संकल्प लिया गया है?
चित्रगुप्त पीठ प्रमुख डॉ. स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 6 दिसंबर को श्री कृष्ण मंदिर के पास एक प्रस्तावित ढाँचे को गिराने की कारसेवा का ऐलान किया है। विजयदशमी के अनुष्ठानों के दौरान हथौड़ों, छेनियों, लोहदंड और फावड़ों की पूजा इसी संकल्प के प्रतीक के रूप में की गई।
दशहरे पर शस्त्र पूजन का क्या महत्त्व है?
विजयदशमी पर शस्त्र पूजन भारत की पारंपरिक परंपरा है, जिसमें औजारों और हथियारों को देवी-देवताओं के समक्ष पूजा जाता है। मथुरा में इस वर्ष इस परंपरा को कारसेवा संकल्प से जोड़ा गया, जिसने इसे धार्मिक-राजनीतिक महत्त्व दे दिया।
इकबाल अंसारी कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
इकबाल अंसारी बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार हैं जो अयोध्या में रहते हैं। उन्होंने दशहरे के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह त्योहार भगवान राम की विजय का प्रतीक है तथा पूरा देश उनका सम्मान करता है।
6 दिसंबर की तारीख क्यों महत्त्वपूर्ण मानी जाती है?
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिराया गया था, जो भारतीय इतिहास की एक अत्यंत संवेदनशील घटना है। मथुरा में इसी तारीख को कारसेवा की घोषणा ने इसे विशेष रूप से उल्लेखनीय बना दिया है।
इस घोषणा पर प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया है?
फिलहाल इस घोषणा पर उत्तर प्रदेश सरकार या स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मथुरा में मंदिर-मस्जिद से जुड़े कई मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं, इसलिए यह मामला कानूनी और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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