मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए विश्व हिंदू रक्षा परिषद का बड़ा अभियान, 5 नवंबर से जनजागरण शुरू
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने लखनऊ में आयोजित धर्म संसद में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से जुड़े विवाद को केंद्र में रखते हुए देशव्यापी अभियान छेड़ने का ऐलान किया है। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय के अनुसार, इस धर्म संसद में रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को कुल 12 प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें भव्य श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण का संकल्प सर्वोपरि है।
धर्म संसद में पारित प्रमुख प्रस्ताव
परिषद द्वारा पारित 12 प्रस्तावों में मथुरा में भव्य श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण के लिए अभियान, 'ब्रज स्वाभिमान' अभियान की शुरुआत, मंदिर निर्माण का विरोध करने वाली राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ प्रदर्शन, और धर्मांतरण के विरुद्ध कॉल सेंटर स्थापित करना प्रमुख रूप से शामिल हैं। परिषद का कहना है कि इन प्रस्तावों के जरिए सनातन धर्म से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर देशव्यापी जन-जागरण किया जाएगा।
5 नवंबर से जनजागरण, 5 दिसंबर को मथुरा कूच का आह्वान
गोपाल राय ने बताया कि मथुरा के मुद्दे को लेकर परिषद 5 नवंबर 2026 से जनजागरण अभियान आरंभ करेगी। इसके बाद 5 दिसंबर 2026 को बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के मथुरा पहुँचने का दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि 5 दिसंबर को ईदगाह परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ करने और ईदगाह की सफाई कर मंदिर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाने की योजना है। गौरतलब है कि इस पूरे विवाद से जुड़े मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं और विभिन्न पक्षों के बीच कानूनी प्रक्रिया जारी है।
आपसी सहमति का प्रस्ताव — 'जमीन के बदले 10 गुना जमीन'
राय ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष आपसी सहमति से समाधान के लिए तैयार होते हैं, तो परिषद विवादित भूमि के बदले 10 गुना तक जमीन देने को तैयार है। उन्होंने इसकी तुलना अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े समाधान प्रक्रिया से की और कहा कि बातचीत के रास्ते भी खुले हैं, परंतु परिषद अपना अभियान जारी रखेगी।
अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का दावा
गोपाल राय ने दावा किया कि भारत में पहली बार कई देशों के राष्ट्रीय नेता एक मंच पर एकत्रित हुए हैं। उनके अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य दुनिया भर में सनातन धर्म के खिलाफ कथित हमलों के विरुद्ध एकजुट होकर काम करना है।
विवाद की पृष्ठभूमि और आगे की राह
परिषद का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ईदगाह का निर्माण किया गया है और वह इसे हटाकर वहाँ भव्य मंदिर निर्माण चाहती है। यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद मथुरा और काशी से जुड़े धार्मिक स्थल विवादों ने राष्ट्रीय स्तर पर नई राजनीतिक ऊर्जा हासिल की है। मामला वर्तमान में न्यायालय के समक्ष लंबित होने के कारण किसी भी बाह्य गतिविधि की कानूनी सीमाएँ तय होंगी, जो इस अभियान की दिशा और परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं।