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पूर्वी चंपारण में पुलिस पर भीड़ का हमला, भारतमाला प्रोजेक्ट अतिक्रमण हटाओ अभियान बना हिंसक

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पूर्वी चंपारण में पुलिस पर भीड़ का हमला, भारतमाला प्रोजेक्ट अतिक्रमण हटाओ अभियान बना हिंसक

सारांश

बिहार के पूर्वी चंपारण में भारतमाला परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने गई पुलिस पर भीड़ ने पथराव किया, चौकीदार घायल। जमुई में भी 20 अप्रैल को पुलिस पर हमले में दो SI और एक कांस्टेबल घायल हुए थे। अप्रैल में बिहार में पुलिस पर हमले की यह दूसरी बड़ी घटना।

मुख्य बातें

पूर्वी चंपारण के करमवा चौक पर भारतमाला परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने गई पुलिस टीम पर भीड़ ने पथराव किया।
हमले में एक चौकीदार घायल हुआ, जिसे भीड़ ने घेरकर पास के घर में घसीटने की कोशिश की।
20 अप्रैल को जमुई में भी पुलिस पर हमले में दो सब-इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हुए थे।
अप्रैल 2025 में बिहार में पुलिस पर हमले की यह दूसरी बड़ी घटना है, जो एक चिंताजनक पैटर्न की ओर इशारा करती है।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन पर हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अतिक्रमण हटाने से पहले पर्याप्त संवाद और पुनर्वास व्यवस्था न होने से ऐसी हिंसक घटनाएं होती हैं।

पटना, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन सड़क के किनारे अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस टीम पर शुक्रवार, 25 अप्रैल को भीड़ ने पथराव कर हमला बोल दिया। करमवा चौक पर हुई इस घटना में एक चौकीदार घायल हो गया और पुलिस को अस्थायी रूप से पीछे हटना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

मुख्य घटनाक्रम: करमवा चौक पर क्या हुआ?

ढाका पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले करमवा चौक पर पुलिस अधिकारी भारतमाला परियोजना के तहत बन रही सड़क के किनारे कथित अतिक्रमणों को हटाने पहुंचे थे। यह परियोजना देश के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रमों में से एक है, जिसके अंतर्गत बिहार में भी बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण हो रहा है।

जैसे ही पुलिस दल ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ता गया। कुछ ही देर में कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस वाहन पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए, जिससे स्थिति तेजी से बेकाबू हो गई।

हमलावरों के दबाव में पुलिसकर्मियों को घटनास्थल से पीछे हटना पड़ा। इसी अफरा-तफरी के बीच वहां पहुंचे एक चौकीदार को ग्रामीणों के एक समूह ने घेर लिया और उस पर कथित तौर पर हमला कर उसे पास के एक घर में घसीटने की कोशिश की।

सौभाग्य से, कुछ जिम्मेदार स्थानीय नागरिकों ने समय रहते हस्तक्षेप किया और चौकीदार को भीड़ के चंगुल से बचा लिया। हमले में उसे चोटें आईं।

जमुई में भी पुलिस पर हमला — बिहार में बढ़ता पैटर्न

यह घटना अकेली नहीं है। इससे महज चार दिन पहले, 20 अप्रैल को जमुई जिले में भी पुलिस दल पर हमला हुआ था। उस घटना में पुलिस खैरमा गांव में फरार आरोपी धीबू यादव को गिरफ्तार करने पहुंची थी, जो कई आपराधिक मामलों में वांछित था।

खैरमा पुल के पास एक ईंट भट्ठे के निकट जैसे ही पुलिस ने गिरफ्तारी का प्रयास किया, आरोपी ने अपने परिजनों और साथियों के साथ मिलकर लाठी, डंडे, ईंट और पत्थरों से पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। इस हमले में दो सब-इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गए।

हमले के बावजूद पुलिस दल ने हिम्मत नहीं हारी और धीबू यादव को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।

भारतमाला परियोजना और अतिक्रमण विवाद की जड़ें

भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क निर्माण योजना है, जिसके तहत बिहार में हजारों किलोमीटर के राजमार्ग बनाए जा रहे हैं। इस परियोजना में सड़क चौड़ीकरण और नए मार्गों के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जरूरी होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी इस तरह की परियोजनाओं के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है, तो स्थानीय आबादी — विशेषकर वे लोग जो दशकों से उस जमीन पर निर्भर हैं — का विरोध स्वाभाविक है। लेकिन विरोध का हिंसक रूप लेना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।

आलोचकों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने से पहले पर्याप्त पूर्व सूचना, पुनर्वास व्यवस्था और संवाद न होने से ऐसी टकराव की स्थितियां बनती हैं।

कानून प्रवर्तन की सुरक्षा पर उठते सवाल

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जमीनी अभियानों के दौरान पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं होती। अप्रैल 2025 में बिहार में पुलिस पर हमले की यह दूसरी बड़ी घटना है।

वीडियो के वायरल होने के बाद अब पुलिस प्रशासन पर दोहरा दबाव है — एक ओर हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग, दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना कि भविष्य में ऐसे अभियान अधिक सुरक्षित और संवेदनशील तरीके से चलाए जाएं।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्वी चंपारण पुलिस हमलावरों के खिलाफ क्या और कितनी जल्दी कार्रवाई करती है और क्या भारतमाला परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब इस प्रक्रिया में न पर्याप्त पुनर्वास हो, न संवाद — तो हिंसा अपरिहार्य बन जाती है। विडंबना यह है कि विकास परियोजनाएं जिन लोगों के लिए बनाई जाती हैं, वही उनके विरोध में खड़े हो जाते हैं। असली सवाल यह नहीं कि हमलावरों पर FIR होगी या नहीं — असली सवाल यह है कि क्या सरकार अतिक्रमण हटाने की नीति को मानवीय और पारदर्शी बनाएगी, ताकि पुलिस और नागरिक दोनों सुरक्षित रहें।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वी चंपारण में पुलिस पर हमला क्यों हुआ?
पूर्वी चंपारण के करमवा चौक पर भारतमाला परियोजना के तहत बन रही सड़क के किनारे अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस टीम पर स्थानीय भीड़ ने पथराव किया। पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनाव बढ़ने से स्थिति हिंसक हो गई।
करमवा चौक हमले में कौन घायल हुआ?
इस हमले में घटनास्थल पर पहुंचे एक चौकीदार को भीड़ ने घेरकर हमला किया और उसे घर में घसीटने की कोशिश की। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से उसे बचाया गया, लेकिन उसे चोटें आईं।
जमुई में पुलिस पर हमले की घटना क्या थी?
20 अप्रैल को जमुई के खैरमा गांव में फरार आरोपी धीबू यादव को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर आरोपी और उसके साथियों ने लाठी, डंडे व पत्थरों से हमला किया। इसमें दो सब-इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हुए।
भारतमाला परियोजना में अतिक्रमण हटाने का विरोध क्यों होता है?
भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाना जरूरी है, जिससे स्थानीय निवासियों की आजीविका प्रभावित होती है। पर्याप्त पूर्व सूचना और पुनर्वास व्यवस्था न होने से विरोध हिंसक रूप ले लेता है।
पूर्वी चंपारण हमले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन पर हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव है। अभी तक गिरफ्तारी या FIR की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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