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ईस्टर्न रेलवे ने स्क्रैप बिक्री में कमाए ₹251.92 करोड़, टॉप-3 जोनल रेलवे में शामिल

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ईस्टर्न रेलवे ने स्क्रैप बिक्री में कमाए ₹251.92 करोड़, टॉप-3 जोनल रेलवे में शामिल

सारांश

ईस्टर्न रेलवे ने महज पाँच महीनों में स्क्रैप बिक्री से ₹251.92 करोड़ कमाकर देश के टॉप-3 जोनल रेलवे में जगह बनाई — यह लक्ष्य से 21% अधिक और पिछले साल से 30.5% की उछाल है। 'मिशन जीरो स्क्रैप बैलेंस' की यह सफलता रेलवे की गैर-किराया राजस्व रणनीति का असरदार उदाहरण बन रही है।

मुख्य बातें

ईस्टर्न रेलवे ने 2026-27 के पहले पाँच महीनों ( 31 अगस्त 2026 तक) में स्क्रैप बिक्री से ₹251.92 करोड़ कमाए।
यह निर्धारित लक्ष्य ₹207.17 करोड़ से 21% अधिक और पिछले वर्ष की इसी अवधि के ₹193 करोड़ से 30.5% ज्यादा है।
29,055 मीट्रिक टन फेरस स्क्रैप से ₹100.63 करोड़ , नॉन-फेरस स्क्रैप से ₹53.65 करोड़ और 11,500 मीट्रिक टन कंडम रेल से ₹28.56 करोड़ प्राप्त हुए।
175 कंडम यात्री कोच से ₹31.87 करोड़ और 310 कंडम वैगन से ₹11.82 करोड़ की ई-नीलामी हुई।
यह उपलब्धि ₹565 करोड़ के वार्षिक स्क्रैप-बिक्री लक्ष्य का लगभग 45% है।
अभियान हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा डिवीजन तथा चार वर्कशॉप में संचालित हुआ।

ईस्टर्न रेलवे (ER) ने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पाँच महीनों में स्क्रैप बिक्री से ₹251.92 करोड़ अर्जित कर देशभर के टॉप-3 जोनल रेलवे में अपनी जगह बना ली है। 31 अगस्त 2026 तक यह उपलब्धि ER के निर्धारित लक्ष्य से 21 प्रतिशत अधिक है और पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 30.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।

मुख्य उपलब्धि और लक्ष्य

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक ₹207.17 करोड़ के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले ईस्टर्न रेलवे ने ₹251.92 करोड़ की स्क्रैप बिक्री हासिल की। यह वित्त वर्ष के ₹565 करोड़ के वार्षिक आंतरिक स्क्रैप-बिक्री लक्ष्य का लगभग 45 प्रतिशत है। तुलना के लिए, 2025-26 की इसी अवधि में 31 अगस्त 2025 तक ER ने ₹193 करोड़ की स्क्रैप बिक्री की थी।

किन श्रेणियों से हुई सर्वाधिक कमाई

पुराने इंजीनियरिंग और ट्रैक सामग्री के निपटान ने इस राजस्व में बड़ा योगदान दिया। लगभग 11,500 मीट्रिक टन कंडम रेल के निपटान से ₹28.56 करोड़, लगभग 29,055 मीट्रिक टन विभिन्न फेरस स्क्रैप से ₹100.63 करोड़ और नॉन-फेरस स्क्रैप से ₹53.65 करोड़ प्राप्त हुए।

कंडम रोलिंग स्टॉक की बिक्री ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया — इस अवधि में 175 कंडम यात्री कोच ₹31.87 करोड़ में बेचे गए, जबकि 310 कंडम मालगाड़ी वैगन की ई-नीलामी से ₹11.82 करोड़ मिले।

मिशन जीरो स्क्रैप बैलेंस की रणनीति

यह उपलब्धि ER के 'मिशन जीरो स्क्रैप बैलेंस' अभियान का परिणाम है, जिसके तहत वर्कशॉप, डिपो, शेड, यार्ड और अन्य रेलवे स्थलों पर पड़े अनुपयोगी, पुराने और अतिरिक्त सामग्री की व्यवस्थित पहचान कर उनका त्वरित निपटान किया जाता है। स्क्रैप डिस्पोजल अभियान ER के चार डिवीजन — हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा — के साथ-साथ जमालपुर, लिलुआ, हालिसहर और कांचरापाड़ा की वर्कशॉप से जुड़े प्रमुख स्टोर डिपो में चलाया गया।

ER के प्रिंसिपल चीफ मैटेरियल्स मैनेजर संदीप शुक्ला ने कहा कि इस सफलता में लगातार स्क्रैप की पहचान और लॉट बनाना, अनुपयोगी संपत्तियों को समय पर कंडम करना और ई-ऑक्शन प्रणाली के जरिए पारदर्शी तरीके से निपटान — इन तीन कारकों की मुख्य भूमिका रही।

परिचालन और पर्यावरणीय लाभ

ER के सीपीआरओ शिब्रम ने कहा, 'यह माइलस्टोन ईस्टर्न रेलवे के कुशल एसेट मैनेजमेंट, वित्तीय समझदारी और पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।' उन्होंने बताया कि समय पर स्क्रैप निपटान से रेलवे की मूल्यवान भूमि और भंडारण स्थान मुक्त होता है, कार्यस्थल की सुरक्षा और हाउसकीपिंग बेहतर होती है, और फेरस-नॉन-फेरस धातु की रीसाइक्लिंग के जरिए सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा मिलता है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे अपनी गैर-किराया राजस्व धाराओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। ईस्टर्न रेलवे 'मिशन जीरो स्क्रैप बैलेंस' की रफ्तार जारी रखते हुए वित्त वर्ष के शेष महीनों में अपना वार्षिक लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बुनियादी ढाँचे के विस्तार के बीच वित्तीय दबाव को कम करने का व्यावहारिक रास्ता है। हालाँकि, 30.5% की वृद्धि प्रभावशाली है, असली सवाल यह है कि क्या 'मिशन जीरो स्क्रैप बैलेंस' एक स्थायी राजस्व मॉडल बन सकता है या यह महज एकमुश्त संचित स्क्रैप की सफाई है। दीर्घकालिक दृष्टि से, ई-ऑक्शन प्रणाली की पारदर्शिता और नियमित मॉनिटरिंग इस पहल की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईस्टर्न रेलवे ने स्क्रैप बिक्री से कितना राजस्व अर्जित किया?
ईस्टर्न रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पाँच महीनों (31 अगस्त 2026 तक) में स्क्रैप बिक्री से ₹251.92 करोड़ अर्जित किए, जो निर्धारित लक्ष्य ₹207.17 करोड़ से 21% अधिक है।
ईस्टर्न रेलवे का 'मिशन जीरो स्क्रैप बैलेंस' क्या है?
'मिशन जीरो स्क्रैप बैलेंस' ईस्टर्न रेलवे की एक व्यवस्थित पहल है, जिसका उद्देश्य वर्कशॉप, डिपो, यार्ड और अन्य रेलवे स्थलों पर पड़े अनुपयोगी और पुराने सामग्री की पहचान कर उनका त्वरित निपटान करना है। इससे रेलवे की भूमि खाली होती है और गैर-किराया राजस्व बढ़ता है।
स्क्रैप बिक्री में सर्वाधिक राजस्व किस श्रेणी से आया?
सर्वाधिक राजस्व फेरस स्क्रैप (लगभग 29,055 मीट्रिक टन) से ₹100.63 करोड़ आया। इसके बाद नॉन-फेरस स्क्रैप से ₹53.65 करोड़, 175 कंडम यात्री कोच से ₹31.87 करोड़ और 11,500 मीट्रिक टन कंडम रेल से ₹28.56 करोड़ प्राप्त हुए।
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कितनी वृद्धि हुई?
2025-26 की इसी अवधि (31 अगस्त 2025 तक) में ईस्टर्न रेलवे ने ₹193 करोड़ की स्क्रैप बिक्री की थी। इस वर्ष ₹251.92 करोड़ की उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में 30.5% अधिक है।
यह अभियान किन डिवीजनों और वर्कशॉप में चलाया गया?
स्क्रैप डिस्पोजल अभियान ईस्टर्न रेलवे के चार डिवीजन — हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा — तथा जमालपुर, लिलुआ, हालिसहर और कांचरापाड़ा की वर्कशॉप से जुड़े प्रमुख स्टोर डिपो में संचालित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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