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बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर: यूनिसेफ के अनुसार ये लक्षण दिखें तो तुरंत करें पहचान

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बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर: यूनिसेफ के अनुसार ये लक्षण दिखें तो तुरंत करें पहचान

सारांश

सोशल मीडिया और आधुनिक जीवनशैली के दबाव में बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर तेज़ी से बढ़ रहा है। यूनिसेफ और मनोवैज्ञानिक डॉ. लिसा डामूर के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हैं — और सही समय पर पहचान व प्यार भरा सहयोग इस समस्या को दूर कर सकता है।

मुख्य बातें

यूनिसेफ के अनुसार, जब बच्चे का खाने, वजन या व्यायाम से रिश्ता अस्वास्थ्यकर हो जाए, तो उसे ईटिंग डिसऑर्डर कहते हैं।
लिसा डामूर के अनुसार यह समस्या तनाव, डिप्रेशन, आनुवंशिक कारणों और सोशल मीडिया के दबाव से उत्पन्न होती है।
प्रमुख लक्षणों में कैलोरी गिनना , खाना छिपाना, अत्यधिक व्यायाम और खाने के समय घबराहट शामिल हैं।
यह समस्या किसी भी उम्र, लिंग या शरीर के आकार वाले बच्चे को हो सकती है।
शंका होने पर तुरंत बाल मनोवैज्ञानिक या चिकित्सक से संपर्क करें — जल्दी पहचान से इलाज आसान होता है।

ईटिंग डिसऑर्डर यानी खाने की गड़बड़ी आज बच्चों में तेज़ी से बढ़ती एक गंभीर मानसिक-शारीरिक समस्या बन चुकी है। यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) के अनुसार, जब किसी बच्चे का खाने, वजन या व्यायाम के साथ रिश्ता अस्वास्थ्यकर हो जाता है और वह अपनी आत्म-मूल्य को शारीरिक दिखावट के आधार पर आँकने लगता है, तो इसे ईटिंग डिसऑर्डर कहा जाता है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और आधुनिक जीवनशैली के दबाव में यह समस्या किसी भी उम्र, लिंग या शरीर के आकार वाले बच्चे को प्रभावित कर सकती है।

ईटिंग डिसऑर्डर क्या है और यह क्यों होता है

यूनिसेफ द्वारा उद्धृत मनोवैज्ञानिक डॉ. लिसा डामूर के अनुसार, यह समस्या किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई कारकों के मेल से उत्पन्न होती है। इनमें मानसिक तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा आनुवंशिक कारण — यदि परिवार में किसी को पहले से यह समस्या रही हो — भी जोखिम बढ़ाते हैं।

सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट बॉडी' और अत्यधिक पतलेपन के आदर्शों का दबाव भी एक बड़ा कारण है। परिवार में खाने को लेकर नकारात्मक बातचीत भी बच्चे की सोच को प्रभावित करती है। गौरतलब है कि यह बच्चे की कोई गलती नहीं है — यह एक चिकित्सीय स्थिति है जिसके लिए समझ और सहयोग की ज़रूरत है।

मुख्य लक्षण जो माता-पिता को पहचानने चाहिए

विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित संकेत दिखने पर सतर्क हो जाना चाहिए:

कैलोरी गिनना या कुछ खाद्य पदार्थों को पूरी तरह छोड़ देना, खाना छिपाकर खाना या खाने के बारे में झूठ बोलना, हद से ज़्यादा व्यायाम करना, शरीर और वजन को लेकर बार-बार नाराज़गी जताना, तथा खाने के समय घबराहट या बेचैनी महसूस करना — ये सभी ईटिंग डिसऑर्डर के प्रमुख संकेत हो सकते हैं। जितनी जल्दी इन लक्षणों की पहचान हो, उतना ही उपचार आसान होता है।

घर पर माता-पिता क्या कर सकते हैं

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि माता-पिता खाने को 'अच्छा' या 'बुरा' न बताएँ। 'जंक फूड' या 'खराब खाना' जैसे शब्दों की जगह संतुलित और पौष्टिक आहार की बात करें। बच्चे को यह सिखाएँ कि भूख लगने पर खाएँ और पेट भरने पर रुकें — यानी शरीर की आवाज़ सुनना ज़रूरी है।

परिवार के साथ मिलकर हेल्दी भोजन बनाना और खाना एक सकारात्मक आदत है। व्यायाम को दंड नहीं, बल्कि खेल और मस्ती का रूप दें। साथ ही, बच्चे को उन सोशल मीडिया कंटेंट से दूर रखें जो अवास्तविक सौंदर्य मानक प्रस्तुत करते हैं।

कब लें पेशेवर मदद

यदि माता-पिता को बच्चे के खान-पान को लेकर कोई भी शंका हो, तो तुरंत किसी बाल मनोवैज्ञानिक या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बच्चे से बातचीत में सहानुभूतिपूर्ण भाषा अपनाएँ। यूनिसेफ के अनुसार, एक सुझाया गया वाक्य है: 'अच्छा खाना और खाने का मज़ा लेना खुद की देखभाल का हिस्सा है — मुझे चिंता है कि तुम अपनी देखभाल ठीक से नहीं कर पा रहे हो, इसलिए हम मिलकर मदद लेंगे।'

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ वैश्विक स्तर पर बढ़ रही हैं और भारत में जागरूकता अभी भी सीमित है। सही समय पर हस्तक्षेप बच्चे के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को सुरक्षित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि सोशल मीडिया की पहुँच छोटे शहरों और कस्बों में भी उतनी ही गहरी है। यूनिसेफ की यह सलाह ज़रूरी है, लेकिन भारत में बाल मनोवैज्ञानिकों की भारी कमी को देखते हुए 'विशेषज्ञ से मिलें' की सलाह अधिकांश परिवारों के लिए व्यावहारिक नहीं है। असली ज़रूरत है स्कूल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में बाल मनोचिकित्सा को प्राथमिकता देना — जिस पर अभी तक पर्याप्त नीतिगत ध्यान नहीं दिया गया है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर क्या होता है?
यूनिसेफ के अनुसार, जब किसी बच्चे का खाने, वजन या व्यायाम के साथ रिश्ता अस्वास्थ्यकर हो जाता है और वह अपनी आत्म-मूल्य को शारीरिक दिखावट से आँकने लगता है, तो उसे ईटिंग डिसऑर्डर कहते हैं। यह एक मानसिक-शारीरिक स्थिति है, न कि बच्चे की गलती।
ईटिंग डिसऑर्डर के मुख्य लक्षण क्या हैं?
कैलोरी गिनना, कुछ खाद्य पदार्थ पूरी तरह छोड़ देना, खाना छिपाकर खाना या झूठ बोलना, हद से ज़्यादा व्यायाम करना और खाने के समय घबराहट महसूस करना — ये सभी प्रमुख लक्षण हैं। इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर के क्या कारण हैं?
मनोवैज्ञानिक डॉ. लिसा डामूर के अनुसार यह कई कारणों के मेल से होता है — मानसिक तनाव, एंग्जायटी, डिप्रेशन, आनुवंशिक कारण और सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट बॉडी' के दबाव सहित परिवार में खाने को लेकर नकारात्मक बातचीत भी इसमें योगदान देती है।
माता-पिता घर पर क्या कर सकते हैं?
खाने को 'अच्छा' या 'बुरा' न बताएँ, बच्चे को शरीर की आवाज़ सुनना सिखाएँ, परिवार के साथ मिलकर हेल्दी भोजन बनाएँ और खाएँ, व्यायाम को खेल का रूप दें, और बच्चे को अवास्तविक सौंदर्य मानक दिखाने वाले सोशल मीडिया कंटेंट से दूर रखें।
कब किसी विशेषज्ञ से मिलना ज़रूरी है?
यदि बच्चे में ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी दिखे या खाने को लेकर कोई भी शंका हो, तो बिना देर किए किसी बाल मनोवैज्ञानिक या चिकित्सक से संपर्क करें। जितनी जल्दी समस्या की पहचान हो, उतना ही उपचार आसान और प्रभावी होता है।
राष्ट्र प्रेस
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